महिला एवं बाल विकास से सम्बन्धी योजनाएँ
उत्तराखण्ड राज्य में महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाएँ परीक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख में हम राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और शिशु कल्याण के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं को कवर करेंगे। यह टॉपिक UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- उत्तराखण्ड में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने वाली नवीनतम योजनाएं (जैसे- लखपति दीदी योजना 2022, एकल महिला स्वरोजगार योजना और मिनी गैस एजेन्सी योजना 2023)।
- बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, भ्रूण हत्या रोकने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी अति महत्वपूर्ण नीतियां (नन्दा गौरा योजना, वैष्णवी किट और जननी सुरक्षा योजना)।
- पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं के कठिन जीवन को आसान बनाने वाली अनोखी पहल (मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना)।
- अनाथ बच्चों के संरक्षण हेतु 'पालना योजना' एवं 'श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम' जैसे संस्थानों से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षापयोगी तथ्य।
उत्तराखण्ड मिनी गैस एजेन्सी योजना
- प्रारम्भ - वर्ष 2023
- इस योजना के अन्तर्गत महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को मिनी गैस एजेन्सी चलाने का अवसर दिया जा रहा है।
- प्रत्येक गैस सिलेण्डर की रिफिल पर ₹20 का कमीशन तथा योजना के प्रचार के लिए ₹1 हजार की धनराशि प्रदान की जाती है।
उत्तराखण्ड मुख्यमन्त्री एकल महिला स्वरोजगार योजना
- प्रारम्भ - वर्ष 2023
- इस योजना की घोषणा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर की गई थी।
- इस योजना के अन्तर्गत ₹1 लाख तक के प्रोजेक्ट पर 50% तक अनुदान दिया जाएगा। महिला की आयु 45 वर्ष से कम होनी चाहिए।
उत्तराखण्ड लखपति दीदी योजना
- प्रारम्भ - वर्ष 2022
- इस योजना के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी राज्य की लगभग 1 लाख 25 हजार महिलाओं की आय ₹1 लाख करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमन्त्री घस्यारी कल्याण योजना
- प्रारम्भ - 30 अक्टूबर, 2021
- उद्देश्य - महिलाओं को जंगलों से चारा लाने के श्रम से मुक्ति दिलाना
- इस योजना के माध्यम से चारा पट्टी के लिए जंगलों में जाने वाली महिलाओं को उनके घर पर ही उनके जानवरों के लिए पौष्टिक चारा सब्सिडी दर पर दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमन्त्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना
- प्रारम्भ - 15 अगस्त, 2019
- सरकार ने 1 वर्ष के भीतर महिलाओं के लिए 5100 पहाड़ी शैली की दुकान (कियोस्क) बनाने का लक्ष्य रखा है।
- सरकारी आँकड़ों के अनुसार इसका लाभ 20 हजार महिलाओं को मिलेगा। ये दुकानें विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों में होंगी।
नन्दा गौरा योजना
- प्रारम्भ - 1 जनवरी, 2018
- उद्देश्य - कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना, बाल विवाह पर रोक लगाना एवं उच्च शिक्षा को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बनाना।
- यह योजना बी.पी.एल श्रेणी में आने वाली उन महिलाओं के लिए है, जिनकी 2 जीवित बालिकाएँ हों।
- इस योजना के अन्तर्गत प्रथम किस्त में ₹11000 की धनराशि एवं द्वितीय किस्त में ₹51000 की धनराशि प्रदान की जाती है। इस प्रकार कुल ₹62000 की धनराशि प्रदान की जाती है।
वैष्णवी सुरक्षा योजना
- प्रारम्भ - वर्ष 2018
- इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक परिवार को नवजात बेटी के साथ माता की एक फोटो भेजने पर नवजात शिशु के लिए वैष्णवी किट मिलेगी। जिसमें नवजात बेटी के तात्कालिक उपयोग की कई चीजें शामिल हैं।
पालना योजना
- प्रारम्भ - 2 अक्टूबर, 2015 (केदारपुरम के बालिका निकेतन से)
- इस योजना के अन्तर्गत सरकार अनाथ बच्चों को गोद लेती है।
- इस योजना में बच्चों के लिए उचित जीवन, शिक्षा व अन्य सुविधाएँ प्रदान करने की व्यवस्था की जाती है।
जननी सुरक्षा योजना
- प्रारम्भ - वर्ष 2005
- इसके अन्तर्गत संस्थागत प्रसव को बल दिया जाता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव के लिए ₹1400 तथा शहरी क्षेत्रों में प्रसव के लिए ₹1000 प्रदान किए जाते हैं।
- इस योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिला को घर से अस्पताल ले जाने की व्यवस्था भी की जाती है।
उत्तराखण्ड राज्य में PM. JAN MAN योजना की सही लाभार्थी बुक्सा और राजि जनजाति हैं।
उत्तराखण्ड की अन्य महिला एवं बाल विकास योजनाएँ
| योजनाएँ | विवरण |
|---|---|
| मुख्यमन्त्री महालक्ष्मी योजना (17 जुलाई, 2021) | • इस योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं एवं कन्या शिशु पोषण हेतु किट उपलब्ध कराई जाती है। |
| मुख्यमन्त्री आँचल अमृत योजना (7 मार्च, 2019) | • इस योजना का उद्देश्य 20 हजार आँगनवाड़ी केन्द्रों में पढ़ने वाले बच्चों को सप्ताह में दो दिन 100-100 मिली दूध दिया जाएगा, जिसका लाभ 2.5 लाख बच्चों को मिलेगा। |
| खिलती कलिया योजना (15 अगस्त, 2015) |
• इस योजना की शुरुआत 6 वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने के उद्देश्य से की गई थी। |
| सबला योजना (19 नवम्बर, 2010) |
• यह योजना हरिद्वार, चमोली, उत्तरकाशी व नैनीताल में शुरु की गई। • इसका उद्देश्य 11 से 18 वर्ष की स्कूल न जाने वाली बालिकाओं के समन्वित विकास को सुनिश्चित करना है। |
| वन्देमातरम् योजना (9 फरवरी, 2004) |
• यह गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क उपचार सुविधा प्रदान करने के लिए प्रारम्भ की गई थी। |
| प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 | • इसके अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं को सवैतनिक अवकाश दिए जाने का प्रावधान किया गया है। |
| उत्तराखण्ड निःशुल्क साइकिल योजना | • उत्तराखण्ड की वे छात्राएँ, जो 8वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हों साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय से सम्बन्ध रखती हों, उन्हें निःशुल्क साइकिल प्रदान की जाएगी। |
| रहबर योजना | • इस योजना का उद्देश्य 18-35 वर्ष की गरीब अल्पसंख्यक महिलाओं को स्व-रोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना है। |
| किशोरी शक्ति योजना (मोनाल परियोजना) (2011) |
• इस योजना की शुरुआत अप्रैल, 2011 में की गई थी। यह 11 से 18 वर्ष की बालिकाओं के जीवन कौशल के निर्माण के उद्देश्य से शुरु की गई है। इस योजना का नाम बदलकर किशोरी शक्ति योजना कर दिया गया है। |
| आदिभोज योजना | • इस योजना की शुरुआत महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना के अन्तर्गत की गई है। |
| महिला कम्पोनेण्ट प्लान | • इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी क्षेत्र में महिलाओं के लिए 30% से कम बजट का निर्धारण न हो। |
श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम
- स्वामी मन्मथन के आदर्शों पर चलने वाली यह एक स्वैच्छिक संस्था है, जो महिला और बाल केन्द्रित सामुदायिक विकास के ध्येय से कार्य कर रही है। इस संस्था का सूत्र वाक्य खुशहाल बच्चा, खुशहाल परिवार, खुशहाल समाज है।
- यह संस्था, सरकार और समुदाय की सामूहिक पहल से समाज विकास की पक्षधर है।
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