उत्तराखण्ड के वन्यजीव अभयारण्य
उत्तराखण्ड के वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) राज्य की समृद्ध जैव-विविधता और पर्यावरण का अभिन्न अंग हैं। यह टॉपिक UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड जैसी सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। इस लेख में हम परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले इन अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों का गहराई से अध्ययन करेंगे।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- उत्तराखण्ड के सातों वन्यजीव अभयारण्यों (जैसे- केदारनाथ, गोविन्द, अस्कोट आदि) की स्थापना वर्ष, उनका क्षेत्रफल और वहाँ पाए जाने वाले प्रमुख पशु-पक्षियों की विस्तृत जानकारी।
- राज्य के सबसे बड़े (केदारनाथ) और सबसे पुराने (गोविन्द) वन्यजीव विहार सहित अल्पाइन घास के मैदानों से जुड़े अहम परीक्षापयोगी तथ्य।
- वन्यजीवों के लिए चलाए गए विशेष प्रबन्ध; जैसे- कस्तूरी मृग परियोजना, स्नोलैपर्ड (हिम तेंदुआ) प्रोजेक्ट, टाइगर वॉच और गिद्ध संरक्षण योजनाओं का सम्पूर्ण विवरण।
- नन्दादेवी जैवमण्डलीय सुरक्षित क्षेत्र और राज्य के पहले एवं देश के 38वें रामसर स्थल (आसन कंजर्वेशन रिजर्व) से जुड़ी महत्त्वपूर्ण एवं सटीक जानकारी।
जैव-विविधता का संरक्षण वन्यजीव विहार में इन-सीटू संरक्षण विधि से होता है। वन्यजीव अभयारण्य में राष्ट्रीय पार्क की अपेक्षा मानव गतिविधियों में कुछ छूट होती है; जैसे- घास काटना, लकड़ी चुनना आदि।
उत्तराखण्ड में सात वन्यजीव अभयारण्य हैं। इसका वर्णन निम्नलिखित है-
गोविन्द वन्यजीव अभयारण्य
स्थापना - वर्ष 1955
विस्तार - उत्तरकाशी के हर की दून (स्वर्गारोहिणी पर्वत तथा बन्दरपूँछ पर्वत तक विस्तृत) में फैला हुआ है।
क्षेत्रफल - 485.89 वर्ग किमी
प्रमुख पशु-पक्षी - मोनाल, फीजेण्ट, गोल्डन ईगल, कलीज, दाढ़ी वाला गिद्ध व कोकलास पक्षी तथा कस्तूरी मृग, हिम बाघ (स्नोलैपर्ड), हिमालयन थार, काकड़, सेही, साम्भर
यह राज्य का सबसे पुराना वन्यजीव अभयारण्य है।
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य
- स्थापना - वर्ष 1972
- अवस्थिति - चमोली एवं रुद्रप्रयाग के केदारखण्ड क्षेत्र में
- क्षेत्रफल 975.20 वर्ग किमी में विस्तृत है। (राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य) वन प्रजातियाँ बाँस, खर्सू, मोरू, बुरांस, बलूत, देवदार, जूनिपर तथा हेमलॉक आदि प्रमुख हैं।
- प्रमुख वन्यजीव - कस्तूरी मृग, तेन्दुआ, बाघ, काकड़, हिमालयन भूरा भालू
- यहाँ अल्पाइन घास के मैदान अधिक मिलते हैं।
- इस अभयारण्य को मुख्यतः हिमालयी कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया था।
- इस अभयारण्य में मोनाल, चकोर आदि पक्षी पाए जाते हैं।
अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य
- स्थापना - वर्ष 1986 (पिथौरागढ़ जिले)
- क्षेत्रफल - 600 वर्ग किमी
- प्रमुख वन्यजीव - हिम बाघ, रीछ, हिमालयी रीछ, भरल थार, कस्तूरी मृग
- प्रमुख पक्षी कोकलास, फीजेण्ट, मोनाल, पहाड़ी तीतर, हिमालयन स्नोकोक, ट्रैगोपान
- यहाँ सर्वाधिक कस्तूरी मृग पाए जाते हैं।
सोनानदी वन्यजीव अभयारण्य
स्थापना - वर्ष 1987 (पौड़ी गढ़वाल जिले में)
क्षेत्रफल - 301 वर्ग किमी
प्रमुख वनस्पतियाँ साल व उसकी सहचर प्रजातियाँ, शीशम, असना, जामुन, बाँस
यहाँ विभिन्न वन्यजीव; जैसे- हाथी, शेर, गुलदार, अजगर, मगर, सुअर, घड़ियाल आदि और पक्षियों में ग्रेट पाइड, हॉर्नबिल, पलास फिशिंग ईगल, कलीज, हिमालयन पाइड, किंग फिशर आदि पाए जाते हैं।
बिनसर वन्यजीव अभयारण्य
स्थापना वर्ष - 1988 अल्मोड़ा में
क्षेत्रफल - 47 वर्ग किमी
विस्तार - वन्यजीव अभयारण्य अल्मोड़ा, बागेश्वर की सीमा में
वन्यजीव - तेन्दुआ, काला भालू, घुरल, काकड़, जंगली बिल्ली और पक्षी मोनाल, हिमालयन स्नोकोक, गोल्डन ईगल
प्रमुख वनस्पतियाँ - देवदार, बाँस, बुरांस, सुरई, चीड़
मसूरी वन्यजीव विहार
स्थापना - वर्ष 1993 देहरादून में
क्षेत्रफल - 10.82 वर्ग किमी
प्राचीन नाम - विनोग माउण्टेन क्वेल
प्रमुख वन्यजीव - घुरल, काकड़, लंगूर, बन्दर, सेही, सुअर, भालू, गुलदार आदि और पक्षी-तीतर, बटेर, चकोर, जंगली मुर्गा
विलुप्त घोषित पहाड़ी बटेर (माउण्टेन क्वेल) को अन्तिम बार यहीं देखा गया था।
नन्धौर वन्यजीव अभयारण्य
स्थापना - दिसम्बर, 2012 नैनीताल में नन्धौर नदी के पास
क्षेत्रफल - 270 वर्ग किमी
वन्यजीव - बाघ, लंगूर, भालू
नोट- पौड़ी के लैंसडाउन क्षेत्र में मालन पशु विहार स्थित है।
उत्तराखण्ड के वन्यजीव अभयारण्य : एक दृष्टि में
| नाम | क्षेत्रफल एवं जिला | स्थापना |
|---|---|---|
| गोविन्द वन्यजीव विहार | 485.89 वर्ग किमी (उत्तरकाशी) | वर्ष 1955 |
| केदारनाथ वन्यजीव विहार | 975.20 वर्ग किमी (चमोली व रुद्रप्रयाग) | वर्ष 1972 |
| अस्कोट वन्यजीव विहार | 600 वर्ग किमी (पिथौरागढ़) | वर्ष 1986 |
| सोनानदी वन्यजीव विहार | 301 वर्ग किमी (पौड़ी गढ़वाल) | वर्ष 1987 |
| बिनसर वन्यजीव विहार | 47 वर्ग किमी (अल्मोड़ा) | वर्ष 1988 |
| मसूरी वन्यजीव विहार | 10.82 वर्ग किमी (देहरादून) | वर्ष 1993 |
| नन्धौर वन्यजीव विहार | 270 वर्ग किमी (नैनीताल व चम्पावत) | वर्ष 2012 |
उत्तराखण्ड में अन्य संरक्षित क्षेत्र
- वर्ष 1995 में गोविन्द बल्लभ पन्त उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान की स्थापना हुई, जिसका विस्तार नैनीताल जिले में 4.693 वर्ग किमी क्षेत्रफल में विस्तृत है।
- भारत सरकार ने उत्तराखण्ड के चमोली, बागेश्वर व पिथौरागढ़ जिलों में 5860 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत नन्दादेवी जैवमण्डलीय सुरक्षित क्षेत्र की स्थापना वर्ष 1988 में की थी।
नोट- उत्तराखण्ड में माउण्टेन क्वेल, सफेद पीठ वाले गिद्ध, बारहसिंगा, भूरे भालू और ऊदबिलाव राज्य के मुख्य जन्तु हैं, जो संकटग्रस्त या विलुप्ति की कगार पर हैं।
वन्यजीवों के लिए विशेष प्रबन्ध
- वर्ष 1970 में कस्तूरी मृग परियोजना प्रारम्भ की गई। कस्तूरी मृग अनुसन्धान की स्थापना वर्ष 1977 में महरुड़ी में की गई।
- वर्ष 1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम पारित किया गया।
- कस्तूरी मृग फार्म योजना 1980-81 के अन्तर्गत वर्ष 1982 में चमोली के काँचुला खर्क में एक कस्तूरी मृग प्रजनन एवं संरक्षण केन्द्र की स्थापना की गई।
- वर्ष 1990-91 में हिम तेन्दुए की सुरक्षा के लिए स्नोलैपर्ड परियोजना की शुरुआत की गई।
- वर्ष 1991-92 में टाइगर वॉच योजना को प्रारम्भ किया गया।
- वर्ष 1992 में हाथी परियोजना प्रारम्भ की गई।
- वर्ष 2006 में गिद्ध संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई।
- नैनादेवी हिमालय बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व नैनीताल में स्थित है।
- इसकी स्थापना वर्ष 2015 में की गई थी तथा यह 21,224 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
उत्तराखण्ड में रामसर स्थल
उत्तराखण्ड का पहला एवं देश का 38वाँ रामसर, आसन कंजर्वेशन रिजर्व वर्ष 2020 में घोषित हुआ।
यह देहरादून के यमुना व आसन नदी के संगम पर स्थित है।
आसन कंजर्वेशन रिजर्व चकराता वन प्रभाग के अन्तर्गत 444.4 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है।
यह जलाशय साइबेरियन पक्षियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण आश्रय स्थल है।
उत्तराखण्ड के प्रमुख वैटलैण्ड
| नाम | स्थापना | क्षेत्रफल जिला |
|---|---|---|
| आसन वैटलैण्ड | वर्ष 2005 | 444.4 वर्ग हेक्टेयर (देहरादून) |
| झिलमिल वैटलैण्ड | वर्ष 2005 | 3,783.5 वर्ग हेक्टेयर (हरिद्वार) |
| पवालगढ़ वैटलैण्ड | वर्ष 2012 | 5,824.7 वर्ग हेक्टेयर (नैनीताल) |
उत्तराखण्ड की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की शानदार और सटीक तैयारी के लिए हमारी वेबसाइट https://www.uttarakhandgk.com/ पर नियमित रूप से विजिट करें। अपनी तैयारी को और मजबूत बनाने के लिए वेबसाइट का नाम हमेशा याद रखें - WWW.UTTARAKHANDGK.COM!

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें