उत्तराखण्ड में ऊर्जा संसाधन

उत्तराखण्ड में ऊर्जा संसाधन

उत्तराखण्ड को नदियों की बहुलता के कारण भारत का 'पावर हाउस' कहा जाता है। राज्य के ऊर्जा संसाधन और जल-विद्युत परियोजनाएं एक ऐसा विषय है जो UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस महत्वपूर्ण टॉपिक से परीक्षा में अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • उत्तराखण्ड में ऊर्जा उत्पादन की वर्तमान स्थिति और आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के परीक्षापयोगी नवीनतम आँकड़े।
  • उत्तराखण्ड की प्रथम और देश की दूसरी ऐतिहासिक 'ग्लोगी जल-विद्युत परियोजना' से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
  • उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर स्थित 'मनेरी-भाली परियोजना' और इसके विभिन्न चरणों की जानकारी।
  • पर्यावरण के अनुकूल 'रन ऑफ द रिवर' (Run of the River) सुरंग तकनीक की कार्यप्रणाली और इसके लाभ।
उत्तराखण्ड राज्य में बहुत-सी छोटी-बड़ी नदियों का उद्गम होने के कारण यहाँ जल-विद्युत उत्पादन की अपार सम्भावनाएँ हैं। इस राज्य को भारत का पावर हाउस भी कहा जाता है।
लघु जल-विद्युत परियोजना नीति, 2015 ने नवीकरणीय ऊर्जा नीति, 2008 को प्रतिस्थापित किया था।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, उत्तराखण्ड में दिसम्बर, 2024 तक स्थापित क्षमता 1440.60 मेगावाट तथा कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 4398.00 मिलियन यूनिट है।

उत्तराखण्ड की प्रमुख जल-विद्युत परियोजनाएँ

  • ग्लोगी जल-विद्युत परियोजना
  • अवस्थिति - मसूरी (क्यारकुली एवं भट्टा, गाँव के बीच)
  • विद्युत क्षमता - 3.5 मेगावाट
  • वर्ष 1907 में बिलिंग हर्ट ने कर्नल वेब के नेतृत्व में इस परियोजना की रूपरेखा तैयार की एवं वर्ष 1912 में यहाँ बिजली उत्पादन प्रारम्भ हो गया।
  • यह परियोजना देश की दूसरी (प्रथम मैसूर) एवं उत्तराखण्ड की प्रथम परियोजना है।

मनेरी-भाली परियोजना

  • अवस्थिति - उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी
  • विद्युत क्षमता - 90 मेगावाट
  • प्रथम चरण प्रारम्भ - वर्ष 1983
  • धरासू पावर स्टेशन - 304 मेगावाट क्षमता (2008 में प्रारम्भ)
  • राज्य की जल-विद्युत परियोजनाओं में अधिकतर सुरंग प्रणाली अर्थात् रन ऑफ द रिवर तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
  • इस तकनीक में नदियाँ प्राकृतिक मार्ग के स्थान पर सुरंगों के माध्यम से अपना रास्ता तय करती हैं। इससे पर्यावरण को हानि नहीं होती तथा विद्युत गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है।
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।