उत्तराखण्ड में शिक्षा व्यवस्था

उत्तराखण्ड में शिक्षा व्यवस्था

क्या आप उत्तराखण्ड की सरकारी नौकरियों का सपना देख रहे हैं? तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था (Education System in Uttarakhand) से जुड़े प्रश्न आपके लिए बहुत मायने रखते हैं। यह टॉपिक UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, और Forest Guard जैसी सभी प्रमुख राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए अति महत्वपूर्ण है। इस लेख में राज्य के शैक्षिक विकास और प्रमुख संस्थानों की सटीक जानकारी दी गई है।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • शिक्षा का ढांचा और साक्षरता: उत्तराखण्ड की साक्षरता दर, शिक्षा परिषदों के गठन और SCERT जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं का पूरा इतिहास।
  • नवीनतम शैक्षिक नीतियां: प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के अहम बदलाव, जिसमें 2025 से लागू होने वाले नए अनिवार्य विषयों (ड्रोन टेक्नोलॉजी, IT आदि) की रोचक जानकारी शामिल है।
  • प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय: भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय (पन्तनगर), गुरुकुल काँगड़ी, HNB गढ़वाल और IIM जैसे प्रमुख संस्थानों की स्थापना और उनके महत्वपूर्ण तथ्य।
  • ऐतिहासिक स्कूल और कॉलेज: दून स्कूल, महादेवी कन्या पाठशाला और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल जैसे राज्य के उन प्रमुख संस्थानों का विवरण जो अक्सर परीक्षाओं में सीधे पूछे जाते हैं।
साक्षरता के दृष्टिकोण से उत्तराखण्ड का देश में 17वाँ स्थान है। 2011 के अनुसार, प्रदेश की साक्षरता 78.8% है, जिसमें पुरुष एवं महिलाओं का साक्षरता प्रतिशत क्रमशः 87.4% और 70% है।
राज्य में शिक्षा एवं परीक्षाओं आदि के संचालन हेतु उत्तराखण्ड शिक्षा एवं परीक्षा परिषद् का गठन रामनगर (नैनीताल) में किया गया। इसने पहली बार वर्ष 1999 में उत्तराखण्ड में परीक्षा का आयोजन किया।
उत्तरांचल शिक्षा एवं परीक्षा परिषद् की स्थापना 22 सितम्बर, 2001 में हुई।

प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा

  • उत्तराखण्ड के गठन के पश्चात् कक्षा 1 से 12 तक (प्राथमिक एवं माध्यमिक) शिक्षा को एकीकृत कर एक निदेशालय का गठन किया गया।
  • राज्य में शिक्षा अनुसन्धान, मूल्यांकन एवं शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु राज्य शैक्षणिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT) की स्थापना 17 जनवरी, 2002 को नरेन्द्र नगर, टिहरी गढ़वाल में की गई थी।
  • उत्तरांचल विद्यालय शिक्षा अधिनियम, 2006 में पारित होने के पश्चात् 11 दिसम्बर, 2008 में उत्तराखण्ड विद्यालय शिक्षा परिषद् का गठन किया गया।
  • वर्ष 2011 में प्राथमिक, माध्यमिक और अकादमिक शोध प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग निदेशालय गठित किए गए।
  • राज्य के रामनगर में विद्यालयी शिक्षा परिषद् और देहरादून में माध्यमिक शिक्षा परिषद् स्थित है।
  • राज्य के उधमसिंह नगर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई है।
  • राज्य में रुद्रप्रयाग, बागेश्वर तथा चम्पावत में तीन लघु जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई है।
  • राज्य में विद्यालय पूर्व शिक्षा के लिए प्रारम्भिक शिशु देखभाल एवं शिक्षा केन्द्रों की भी स्थापना की गई है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार राज्य में 13,743 राजकीय विद्यालय तथा 3985 निजी/प्राइवेट विद्यालय हैं।
वर्ष 2025 में उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT) द्वारा प्रस्तावित किया गया कि कक्षा-10 के विद्यार्थियों को पाँच विषयों के स्थान पर 10 अनिवार्य विषय पढ़ने होंगे। इससे उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा। ये विषय ब्यूटी एण्ड वेलनेस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और IT से सम्बन्धित होंगे।

उच्च शिक्षा

  • उच्च शिक्षा निदेशालय हल्द्वानी, नैनीताल में स्थित है।
  • पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में प्राविधिक शिक्षा निदेशालय है, जिसके अधीन अक्टूबर, 2003 को रुड़की में उत्तराखण्ड प्राविधिक शिक्षा एवं परीक्षा परिषद् की स्थापना की गई थी।
  • देहरादून में वर्ष 2004 में संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद् का गठन हुआ। देहरादून में संस्कृत शिक्षा परिषद् भी स्थित है।
  • देहरादून में वर्ष 2003 में पेट्रोलियम एवं ऊर्जा विश्वविद्यालय तथा मल्टीमीडिया एवं सूचना प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित हिमगिरी नभ विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।
  • 21 अप्रैल, 2005 को उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। हरिद्वार के रानीपुर में संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित है।
  • 27 जनवरी, 2005 को उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। वर्ष 2018 में इसका नाम बदलकर वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय कर दिया गया। इसका मुख्यालय देहरादून (सुद्धोवाला) में है।
  • 31 अक्टूबर, 2005 को नैनीताल में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।
  • वर्ष 2009 में सुमाड़ी, श्रीनगर गढ़वाल में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के स्थायी परिसर का शिलान्यास किया गया।
  • भरसार, पौड़ी में वर्ष 2011 में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली औद्योगिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। वर्ष 2015 में इस विश्वविद्यालय के नाम के आगे वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली का नाम जोड़ा गया।
उत्तराखण्ड में 11वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत 29 अप्रैल, 2011 को उधमसिंह नगर में द्वितीय श्रेणी के भारतीय प्रबन्धन संस्थान (Indian Institute of Management, IIM) की स्थापना की गई।
  • देहरादून (सुद्धोवाला) में वर्ष 2012 में राज्य का प्रथम महिला इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की गई थी।
  • डी.आई.टी. विश्वविद्यालय राजपुर को वर्ष 2013 में विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 2013 में उत्तरांचल विश्वविद्यालय, देहरादून को विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ था।
  • वर्ष 2016 में अल्मोड़ा में उत्तराखण्ड आवासीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।
  • वर्ष 2020 में अल्मोड़ा में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।
  • उत्तराखण्ड राज्य के गठन से पूर्व यहाँ उच्च शिक्षा के लिए सभी श्रेणियों में कुल 6 विश्वविद्यालय (रुड़की, गढ़वाल, कुमाऊँ, गुरुकुल काँगड़ी डीम्ड, पन्तनगर और वन अनुसन्धान संस्थान डीम्ड) थे।
  • राज्य शैक्षिक प्रबन्धन एवं परीक्षण संस्थान (सीमेट) देहरादून में स्थित है। देहरादून में ICFAI विश्वविद्यालय भी स्थित है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, राज्य में उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 117 महाविद्यालय तथा 5 राजकीय विश्वविद्यालय स्थित हैं।

उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थाएँ

राज्य की प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थाओं का विवरण निम्न प्रकार है-

गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय

  • इसकी स्थापना स्वामी श्रद्धानन्दजी द्वारा वर्ष 1900 में की गई थी तथा मार्च, 1902 में इसे हरिद्वार में स्थानान्तरित कर दिया गया था।
  • वर्ष 1924 में इस विश्वविद्यालय को काँगड़ी से स्थानान्तरित कर कनखल और ज्वालापुर के मध्य स्थापित कर दिया गया।
  • वर्ष 1962 में इसे हीरक जयन्ती के अवसर पर विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया।
  • गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय की गणना देश के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में की जाती है।
  • यह एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है, जो प्राचीन भारतीय विद्याओं के साथ आधुनिक विषयों, प्रबन्ध, प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर आदि में उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।

डी.ए.वी. कॉलेज

  • इसकी स्थापना वर्ष 1902 में संस्कृत विद्यालय के रूप में ठाकुर पूरण सिंह नेगी के द्वारा की गई थी।
  • वर्ष 1910 तक यह मिडिल स्कूल रहा। इसके पश्चात् वर्ष 1911 में इसे हाईस्कूल तथा वर्ष 1922 में इण्टरमीडिएट का स्तर प्राप्त हुआ। वर्ष 1946 में इसे स्नातक तथा वर्ष 1948 में इसे पोस्ट ग्रेजुएट का दर्जा प्राप्त हुआ।
  • प्रारम्भ में आगरा विश्वविद्यालय से सम्बन्धित इस कॉलेज को वर्ष 1965 में मेरठ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किया गया। वर्ष 1974 के बाद से यह गढ़वाल विश्वविद्यालय से सम्बन्धित है।

गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

  • इसकी स्थापना 17 नवम्बर, 1960 को तत्कालीन प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू द्वारा पन्तनगर, उधमसिंह नगर में की गई थी।
  • भारत का प्रथम कृषि विश्वविद्यालय जिसने देश में हरित क्रान्ति लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • वर्ष 1972 में इस कृषि विश्वविद्यालय का नाम गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (पूर्व में उत्तर प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय) रखा गया।
  • पन्तनगर परिसर के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के 6 दूरस्थ परिसर-रानीचौरा (टिहरी), दौराला (मेरठ), नगीना (बिजनौर), मझरा (नैनीताल), बुलन्दशहर तथा पौड़ी में स्थित हैं।

कुमाऊँ विश्वविद्यालय

  • इसकी स्थापना वर्ष 1973 में नैनीताल में की गई थी।
  • यह शोध की एक अग्रणी संस्था है।
  • इसके तीन परिसर अल्मोड़ा, नैनीताल और भीमताल में स्थित हैं तथा इससे सम्बद्ध 35 महाविद्यालय और संस्थान कुमाऊँ के 6 जिलों में स्थित हैं।

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय

  • उत्तराखण्ड में उच्च शिक्षा को दृष्टि में रखते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) में वर्ष 1973 में की गई थी।
  • अप्रैल, 1989 में इसका नाम परिवर्तित कर 'हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय' कर दिया गया।
  • 15 जनवरी, 2009 को इसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय

इसकी स्थापना उत्तराखण्ड विधानसभा द्वारा प्रतिस्थापित 'देव संस्कृति विश्वविद्यालय विधेयक, 2002' के अन्तर्गत 22 मार्च, 2002 को शान्तिकुंज, हरिद्वार में की गई थी। इसका संचालन वेदमाता गायत्री ट्रस्ट शान्तिकुंज द्वारा किया जाता है। हरिद्वार की यह शिक्षण संस्था श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठापना कर विद्यार्थियों को सम्मानजनक जीविकोपार्जन के अवसरों एवं सम्भावनाओं को प्राप्त करने योग्य बनाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है।

श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय

  • इसकी स्थापना वर्ष 2010 में की गई थी।
  • हेमवती नन्दन गढ़वाल विश्वविद्यालय के टिहरी परिसर को अलग करके दीनदयाल उपाध्याय उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय नाम से स्थापित किया गया।
  • वर्ष 2012 में इसका नाम बदलकर श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय कर दिया गया। इस विश्वविद्यालय का एक परिसर सेलाकुई, देहरादून में स्थित है।

उत्तराखण्ड स्थित प्रमुख विश्वविद्यालय

नाम अवस्थिति स्थापना
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार 1902
गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि विश्वविद्यालय ऊधमसिंह नगर 1960
हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय पौड़ी गढ़वाल 1973
कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल 1973
देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार 2002
हिमगिरि नभ विश्वविद्यालय देहरादून 2003
दून विश्वविद्यालय देहरादून 2005
उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार 2005
वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय देहरादून 2005
उत्तराखण्ड मुक्त यूनिवर्सिटी हल्द्वानी 2005
उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून 2009
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्योगिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार (पौड़ी) 2011
श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय टिहरी 2010 (2012 में नाम परिवर्तित)
मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की (हरिद्वार) 2015
उत्तराखण्ड आवासीय विश्वविद्यालय अल्मोड़ा 2016
महाराजा अग्रसेन गढ़वाल विश्वविद्यालय पौड़ी 2016
भगवन्त ग्लोबल विश्वविद्यालय कोटद्वार 2016
रासबिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून 2016
श्री गुरु रामराय विश्वविद्यालय देहरादून 2017
क्वान्टम विश्वविद्यालय रुड़की (हरिद्वार) 2018

उत्तराखण्ड में शिक्षा से सम्बन्धित प्रतिष्ठित संस्थाएँ

महादेवी कन्या पाठशाला की स्थापना श्रीमती महादेवी भटनागर द्वारा 15 सितम्बर, 1902 में देहरादून में की गई थी।
दून कॉलेज (देश का प्रथम पंजीकृत विद्यालय) की स्थापना वर्ष 1935 में देहरादून में सतीश रंजन दास (बैरिस्टर और वायसराय की काउन्सिल के सदस्य) ने की थी। दून विश्वविद्यालय की विधिवत् स्थापना वर्ष 2005 में की गई थी।
श्री गुरु रामराय एजुकेशन मिशन की स्थापना वर्ष 1950 (देहरादून) में श्री महन्त इन्दिरेश चरणदास ने की थी।
उत्तराखण्ड में इस मिशन का शिक्षा में महत्त्वपूर्ण योगदान है तथा इसी के अन्तर्गत राज्य में पहला स्कूल (गुरु रामराय विद्यालय) वर्ष 1950 में खोला गया था।
राज्य का पहला सैनिक स्कूल देहरादून के घोड़ाखाल में वर्ष 1966 में स्थापित किया गया था।

उत्तराखण्ड के प्रतिष्ठित स्कूल/कॉलेज एवं उनके स्थापना वर्ष

स्कूल/कॉलेज अवस्थिति स्थापना
वेलहेम गर्ल्स हाईस्कूल देहरादून 1857
शेरवुड कॉलेज नैनीताल 1869
लण्डौर लैंग्वेज स्कूल मसूरी 1870
वाइन वर्ग ऐलन स्कूल मसूरी 1887
ओकग्रोव स्कूल मसूरी 1888
कॉन्वेंट ऑफ जीसस एण्ड मैरी देहरादून 1902
महादेवी कन्या पाठशाला देहरादून 1902
कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल देहरादून 1926
सेण्ट जोसेफ एकेडमी देहरादून 1934
वेल्हम ब्वॉयज स्कूल देहरादून 1937
बिड़ला विद्या मन्दिर नैनीताल 1947
ब्राइटलैण्ड स्कूल देहरादून 1958
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Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।