उत्तराखण्ड के राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखण्ड के राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता और जैव-विविधता का मुख्य आधार यहाँ के राष्ट्रीय उद्यान हैं। यह विषय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाहे आप UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड या राज्य की किसी भी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, इस टॉपिक से हर बार निश्चित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • उत्तराखण्ड के 6 राष्ट्रीय उद्यानों का विस्तृत विवरण: जिम कॉर्बेट, गोविन्द, नन्दादेवी, फूलों की घाटी, राजाजी और गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना, क्षेत्रफल और उनके जिलों की सटीक जानकारी।
  • परीक्षापयोगी विशेष तथ्य: एशिया के सबसे पहले राष्ट्रीय उद्यान (जिम कॉर्बेट) से लेकर राज्य के सबसे बड़े (गंगोत्री) और सबसे छोटे (फूलों की घाटी) उद्यानों से जुड़े महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य।
  • विश्व धरोहर और टाइगर रिजर्व: यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल उद्यानों (नन्दादेवी और फूलों की घाटी) तथा राज्य के महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व से जुड़ी जानकारी।
  • वन्यजीव और वनस्पतियां: इन उद्यानों में पाए जाने वाले दुर्लभ वन्यजीवों (जैसे- कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ), विशिष्ट वनस्पतियों और उद्यान क्षेत्रों से बहने वाली प्रमुख नदियों का ज्ञान।
ऐसे विशेष क्षेत्र, जहाँ सभी प्रकार के जीवों एवं वनस्पतियों के संरक्षण के लिए मानव गतिविधियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध रहता है, राष्ट्रीय उद्यान कहलाते हैं।
जैव-विविधता का संरक्षण राष्ट्रीय उद्यानों में उनके मूल आवासों में इन-सीटू संरक्षण विधि से किया जाता है।

उत्तराखण्ड में 6 राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं-
  • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
  • गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान
  • नन्दादेवी राष्ट्रीय उद्यान
  • फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान
  • राजाजी राष्ट्रीय उद्यान
  • गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थापना - वर्ष 1936 में हेली नेशनल पार्क (एशिया का पहला राष्ट्रीय उद्यान)
  • अन्य नाम - रामगंगा नेशनल पार्क
  • क्षेत्रफल - 520.82 वर्ग किमी है, पौड़ी में 312.76 किमी एवं नैनीताल में 208.8 किमी में विस्तृत
  • प्रवेश द्वार - ढिकाला, नैनीताल
प्रकृति प्रेमी जिम कॉर्बेट के नाम पर वर्ष 1957 में इसका पुनः नामकरण किया गया।
  • वर्ष 1973 में कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान को भारत का पहला टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। पटवारी 2023
इसमें पाए जाने वाले प्रमुख जीव मगरमच्छ, चीतल, साम्भर, कांकड़, बाघ, हाथी, तेन्दुआ, अजगर, हिरण आदि हैं।
कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के मध्य में पाटलीदून पार्क, कॉर्बेट वाटर फॉल एवं पश्चिमी रामगंगा नदी स्थित है।
अप्रैल, 2012 में कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर 500 मी तक के दायरे को साइलेन्स जोन घोषित किया गया।
वर्ष 2021 के विश्व के सर्वश्रेष्ठ रख-रखाव वाले राष्ट्रीय उद्यानों में इसका दूसरा स्थान है।
राज्य के उद्यानों में आने वाले सर्वाधिक पर्यटकों का क्रम क्रमशः कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान एवं फूलों की घाटी है।
वर्ष 2020 में कोविड-19 के खतरे को देखते हुए देश का पहला एनीमल क्वारनटाइन सेन्टर जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में ही बनाया गया था।

गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थापना - उत्तरकाशी (वर्ष 1980) जिले में
  • क्षेत्रफल - 472 वर्ग किमी
  • नामकरण - गोविन्द बल्लभ पन्त के नाम पर
  • उद्यान के अन्तर्गत प्राकृतिक स्थल - हर की दून घाटी व रुईंसियार झील
  • वन्यजीव - कस्तूरी मृग, हिम तेन्दुआ, काला भालू, ट्रैगोपान, कलीज, मोनाल आदि
  • वनस्पति - भोजपत्र, देवदार, बाँज आदि

नन्दादेवी राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थापना - वर्ष 1982 (चमोली जिले) में
  • क्षेत्रफल - 624 वर्ग किमी
  • पूर्ववर्ती नाम - संजय गाँधी नेशनल पार्क (मुख्यालय-जोशीमठ)
  • वन्यजीव - हिमालय भालू, स्नो लैपर्ड्स, मस्क डियर, मोनाल, कस्तूरी मृग आदि
  • वनस्पतियाँ - देवदार, सनौवर, रोडोडेंड्रन (बुरांस) और जूनिपर आदि।
  • वर्ष 1988 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थापना - वर्ष 1982 में (चमोली जिले में)
  • क्षेत्रफल - 87.50 वर्ग किमी (राज्य का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान)
  • खोजकर्ता - फ्रैंक एस स्माइथ (ब्रिटिश पर्वतारोही)
  • अन्य नाम - बैकुण्ठ भ्यूंडार, गन्धमादन, पुष्पावली एवं फ्रैंक स्माइथ घाटी आदि।
  • दुर्लभ वन्यजीव - कस्तूरी मृग, गुलदार, भरल, हिमालय भालू आदि
  • फूलों की घाटी नन्दा देवी जीवमण्डल का एक भाग है। UKPSC 2025
  • 14 जुलाई, 2005 को इस राष्ट्रीय उद्यान में यूनेस्को की विश्व धरोहर घोषित किया गया।
  • इसका वर्णन कालिदास के मेघदूत खण्ड में अलका व स्कन्द पुराण के केदारखण्ड में नन्दनकानन मिलता है।
  • पुष्पावती नदी फूलों की घाटी से होकर बहती है।
  • इसके सन्दर्भ में फ्रैंक एस स्माइथ ने अपने पुस्तक द वैली ऑफ फ्लॉवर में बताया है।

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थापना - वर्ष 1983 में
  • क्षेत्रफल - 820 वर्ग किमी
  • विस्तार - तीन जिलों (देहरादून, पौड़ी तथा हरिद्वार) में
  • नामकरण - अन्तिम गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी के नाम पर
  • यह देश का 48वाँ तथा राज्य का दूसरा टाइगर रिजर्व है। इसे वर्ष 2015 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
  • राज्य का प्रथम वन्यजीव संरक्षण केन्द्र मोतीचूर वन्यजीव विहार देहरादून में है।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान

  • स्थापना - वर्ष 1989 (उत्तरकाशी) में
  • क्षेत्रफल - 2,390 वर्ग किमी
  • वन्यजीव - भालू, कस्तूरी मृग, भरेल, हिम तेन्दुआ
  • प्रमुख पक्षी - मोनाल, कोकलास, ट्रैगोपान
  • यह राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।

उत्तराखण्ड के राष्ट्रीय उद्यान : एक दृष्टि में

नाम जिला एवं क्षेत्रफल स्थापना
कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान 520.82 वर्ग किमी (पौड़ी व नैनीताल) वर्ष 1936
गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान 472 वर्ग किमी (उत्तरकाशी) वर्ष 1980
नन्दादेवी राष्ट्रीय उद्यान 624 वर्ग किमी (चमोली) वर्ष 1982
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान 87.50 वर्ग किमी (चमोली) वर्ष 1982
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान 820 वर्ग किमी (देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार) वर्ष 1983
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान 2,390 वर्ग किमी (उत्तरकाशी) वर्ष 1989
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।