उत्तराखण्ड के उद्योग
उत्तराखण्ड का औद्योगिक विकास और राज्य की अर्थव्यवस्था में इसके विभिन्न उद्योगों का योगदान एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह लेख आपको उत्तराखण्ड के प्रमुख उद्योगों, उनकी वर्तमान स्थिति और नवीनतम आंकड़ों की विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा। यह टॉपिक UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार राज्य में MSME और उद्योगों की वर्तमान स्थिति एवं जीडीपी (GDP) में उनका योगदान।
- कृषि, खनिज और वन आधारित प्रमुख उद्योगों (जैसे- चीनी, सूती वस्त्र, सीमेंट, कागज, रेशम और औषधि निर्माण) का जिलेवार महत्वपूर्ण विवरण।
- उत्तराखण्ड के हथकरघा, हस्तशिल्प (हिमाद्रि ब्रांड) और ऊनी वस्त्र उद्योगों से जुड़े परीक्षापयोगी तथ्य।
- राज्य में पनचक्की उद्योग, रसायन उद्योग एवं औद्योगिक विकास नीतियों (जैसे 2003 प्रोत्साहन पैकेज) का ऐतिहासिक और वर्तमान परिदृश्य।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, उत्तराखण्ड में एमएसएमई स्थापित इकाइयों की संख्या 88,489 है।
उत्तराखण्ड के कुल सकल घरेलू उत्पाद में द्वितीयक क्षेत्र का योगदान वर्ष 1999-2000 में 19.2% से बढ़कर वर्ष 2021-22 में लगभग 46.21% हो गया।
राज्य के गठन (नवम्बर, 2000) से पहले उत्तराखण्ड राज्य वास्तविक रूप से उद्योग विहीन क्षेत्र के रूप में जाना जाता था।
वर्ष 2003 में उत्तराखण्ड को केन्द्र सरकार द्वारा विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज प्राप्त हुआ, जिसके फलस्वरूप राज्य में औद्योगिकीकरण का प्रसार हुआ।
1 अप्रैल, 2008 को औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े पर्वतीय जिलों के लिए विशेष एकीकृत औद्योगिक प्रोत्साहन नीति, 2008 की घोषणा की गई।
वर्ष 2023-24 में उत्तराखण्ड की आर्थिक वृद्धि दर 7.83% रही। UKPSC 2025
उत्तराखण्ड के प्रमुख उद्योग
उत्तराखण्ड में उद्योगों का संग्रहण मुख्यतः 5 जिलों (उधमसिंह नगर (सर्वाधिक), हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल व पौड़ी) में है।
राज्य के कुछ प्रमुख उद्योगों का विवरण निम्नलिखित है-
कृषि आधारित उद्योग
चीनी उद्योग
- आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, राज्य में चीनी की प्रमुख 8 मिलें हैं, जिनमें 3 सहकारी, 2 सार्वजनिक तथा 3 निजी हैं।
- उधमसिंह नगर में 4, हरिद्वार में 3 व देहरादून में 1 चीनी मिल है।
- डोईवाला में चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1930 में की गई थी।
सूती वस्त्र उद्योग
राज्य की सबसे पुरानी सूती वस्त्र मिल काशीपुर (उधमसिंह नगर) में अवस्थित है।
राज्य में सूती वस्त्र की अन्य मिलें देहरादून, उधमसिंह नगर तथा नैनीताल जिलों में अवस्थित हैं।
औषधि निर्माण उद्योग
- उत्तराखण्ड में लगभग 2,000 से अधिक प्रकार की जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं, जिस कारण सरकार ने जड़ी-बूटियों के संरक्षण, संवर्द्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन पर विशेष बल दिया है।
- हरिद्वार में लगभग 300 से अधिक जड़ी-बूटी उद्योग केन्द्र हैं।
- देहरादून के समीप वीरभद्र (ऋषिकेश) नामक स्थान पर इण्डियन ड्रग्स एण्ड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड नाम से औषधि निर्माण का कारखाना स्थापित है।
- हल्द्वानी में कत्था फैक्टरी अवस्थित है।
- इसके अतिरिक्त देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और नैनीताल में औषधि निर्माण केन्द्र अवस्थित हैं।
खनिज आधारित उद्योग
- सीमेण्ट, मैग्नेसाइट, सिलिका, मार्बल आदि राज्य के प्रमुख खनिज आधारित उद्योग हैं।
- अधिकांश सीमेण्ट फैक्टरियाँ देहरादून में अवस्थित हैं।
- कुआँवाला सीमेण्ट फैक्टरी, गुनियाल ग्राम (राजपुर) तथा रानी पोखरी सीमेण्ट फैक्टरी देहरादून में स्थित है।
- झीरौली (अल्मोड़ा) तथा चण्डाक (पिथौरागढ़) में मैग्नेसाइट फैक्टरियाँ स्थापित हैं।
मार्बल उद्योग
देहरादून में मार्बल उद्योग विकसित अवस्था में है, यहाँ मार्बल के अनेक कारखाने हैं।
वन आधारित उद्योग
राज्य के प्रमुख वन आधारित उद्योग कागज, लकड़ी, दियासलाई तथा रेशम आदि हैं।
कागज उद्योग
प्रमुख केन्द्र - नैनीताल व उधमसिंह नगर
अन्य केन्द्र - हरिद्वार व देहरादून
एशिया का सबसे बड़ा कागज उद्योग कारखाना सेंचुरी पेपर एण्ड पल्प मिल लालकुआँ, नैनीताल में अवस्थित है।
लकड़ी उद्योग
देहरादून तथा नैनीताल (हल्द्वानी) में मुख्य रूप से फर्नीचर का कार्य किया जाता है।
देहरादून व नैनीताल खेल के सामानों के लिए भी मुख्य रूप से जाने जाते हैं।
देहरादून तथा नैनीताल (हल्द्वानी) जिलों में बेंत (एक प्रकार की पहाड़ी घास) से फर्नीचर एवं छड़ियाँ बनाई जाती हैं।
दियासलाई उद्योग
वन की लकड़ी की उपलब्धता के कारण उत्तराखण्ड के अनेक स्थानों पर दियासलाई उद्योग को बढ़ावा मिला है।
यह उद्योग नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून व अल्मोड़ा आदि जिलों में अवस्थित है।
रेशम उद्योग
- उत्तराखण्ड में रेशम उद्योग का प्रारम्भ रेशम कीट फार्म (1958), देहरादून से माना जाता है।
- रेशम के कीट पालने के लिए शहतूत के वृक्षों को लगाने का कार्य देहरादून एवं पौड़ी गढ़वाल जिलों में किया गया है।
- रेशम सहकारी संघ, प्रेमनगर (देहरादून) में कीटों को पालने तथा कोकून उत्पन्न करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
- इस उद्योग को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान केन्द्रों तथा सहकारी समितियों की स्थापना की गई है।
- वर्ष 2007 में देहरादून में सिल्क पार्क का निर्माण किया गया।
हथकरघा व हस्तशिल्प आधारित उद्योग
उत्तराखण्ड के हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों का विपणन हिमाद्रि ब्राण्ड के अधीन किया जाता है।
हथकरघा एवं हस्तशिल्प आधारित उद्योगों के विकास के लिए काशीपुर में क्राफ्ट डिजाइन केन्द्र की स्थापना की गई है।
उत्तराखण्ड के प्रमुख हथकरघा एवं हस्तशिल्प
| हस्तशिल्प | विवरण |
|---|---|
| रिंगाल |
• रिंगाल पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले बाँस का एक प्रकार है। • यह चमोली, अल्मोड़ा तथा पिथौरागढ़ का प्रमुख हस्तशिल्प उद्योग है। रिंगाल से डाले, कण्डी, चटाई, सूप, टोकरी, मोस्टा आदि तैयार किए जाते हैं, जिनका उपयोग घरेलू एवं कृषि कार्यों के लिए किया जाता है। इसे पुश्तैनी उद्योग के रूप में सभी जिलों में देखा जा सकता है। |
| बाँस | • बाँस से सूप, डाले, कण्डी, छापड़ी, टोकरी आदि तैयार किए जाते हैं। सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में रूड़ियों का बाँस तथा रिंगाल से सूप आदि तैयार करने का परम्परागत तथा पुश्तैनी कार्य किया जाता है। |
| भंगेल | • उत्तराखण्ड के अनेक क्षेत्रों में भाँग के पौधों से प्राप्त रेशों से कुथले, कम्बल, दरी, रस्सियाँ आदि तैयार की जाती हैं। |
| कालीन |
• पिथौरागढ़ जिले के धारचूला एवं मुनस्यारी तथा चमोली जिले के कुछ क्षेत्रों में कालीन उद्योग अत्यधिक प्रसिद्ध है। • भेड़ों से ऊन प्राप्त कर यहाँ पश्मीना, शॉल, चुटका, कम्बल, दन, थुलमा और पंखी आदि तैयार किए जाते हैं। |
| चर्म शिल्प | • स्थानीय भाषा में चमड़े का कार्य करने वालों को बड़ई या शारकी कहा जाता है। मुख्यत: लोहाघाट, जौहारी घाटी, नाचनी एवं मिलम में चर्म कार्य किया जाता है। यहाँ बैग, पर्स, जूते आदि तैयार किए जाते हैं। |
| धातु एवं मृत्तिका शिल्प | • राज्य के अनेक भागों में धातुओं से कलात्मक वस्तुएँ तथा बर्तन आदि बनाए जाते हैं, किन्तु अल्मोड़ा का ताँबा धातु शिल्प विशेष रूप से प्रसिद्ध है। राज्य के सभी भागों में मिट्टी से बर्तन, सुराही, दीप, कलश आदि बनाए जाते हैं। |
उत्तराखण्ड में पनचक्की उद्योग मध्यकाल से प्रचलित है, जिसका उपयोग अनाजों को पीसने के लिए किया जाता रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा अप्रैल, 2001 में पनचक्की को लघु उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया।
राज्य के अन्य उद्योग
फल उद्योग
आम, लीची, केला, अमरूद, पपीता तथा रसभरी आदि फलों की पैदावार के लिए 300 से 400 मी ऊँचाई वाले क्षेत्र अनुकूल हैं।
रामगढ़ (नैनीताल) में फल संरक्षण केन्द्र संचालित है।
ऊनी वस्त्र उद्योग
- राज्य में ऊनी वस्त्र के गृह उद्योग नैनीताल, चम्पावत, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, टिहरी, बागेश्वर तथा देहरादून आदि जिलों में स्थापित हैं। पौड़ी तथा अल्मोड़ा की ऊनी शॉल अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
- राज्य में ऊन के क्रय-विक्रय हेतु वूल (ऊन) बैंकों की स्थापना की गई है।
- ऊन से सूत बनाने व सूत से ऊनी वस्त्र बनाने के लिए प्रशिक्षण एवं उत्पादन केन्द्रों की स्थापना टिहरी, पिथौरागढ़, देहरादून, नैनीताल तथा चमोली आदि जिलों में की गई है।
रसायन उद्योग
उत्तराखण्ड के अनेक स्थानों पर पंजीकृत औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित हैं। इनमें हल्द्वानी, काशीपुर, बाजपुर और रुद्रपुर इकाइयों द्वारा रंग, वार्निश (रोगन), गन्धराल, गन्धक की गड्डी, संश्लेषित प्रक्षालक, धुलाई का साबुन, जस्ता, सल्फेट, बीब्रेन, मेथल, क्राइटल, तेल इत्यादि का उत्पादन किया जाता है।
उत्तराखण्ड में दिसम्बर, 2024 में कोटघर में पहली वाइन उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया गया। UKPSC 2025
उत्तराखण्ड में स्थित प्रमुख संस्थान एवं उद्योग
| संस्थान का नाम | स्थिति |
|---|---|
| इण्डियन मेडिसिन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड | मोहन (अल्मोड़ा) |
| इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फॉर ड्रग्स रिसर्च | ताड़ीखेत (अल्मोड़ा) |
| कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी | रानीखेत (अल्मोड़ा) |
| इण्डियन ड्रग्स एण्ड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड | वीरभद्र, ऋषिकेश (देहरादून) |
| हिन्दुस्तान एण्टीबायोटिक्स लिमिटेड | ऋषिकेश (देहरादून) |
| ऑर्डिनेन्स फैक्टरी | रायपुर (देहरादून) |
| डिफेन्स इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लीकेशन लैबोरेटरी (DRDO द्वारा संचालित) | रायपुर (देहरादून) |
| ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स | रायपुर (देहरादून) |
| भारत हैवी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BHEL) | रानीपुर (हरिद्वार) |
| इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड टेलीफोन फैक्टरी | भीमताल (नैनीताल) |
| भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड | कोटद्वार (पौड़ी) |
| हिन्दुस्तान मशीन टूल्स | रानीबाग (नैनीताल) |
| जी. बी. पन्त हिमालय पर्यावरणीय एवं विकास संस्थान | कोसी कटारमल (अल्मोड़ा) |
| औषधीय एवं सुगन्धित पौध संस्थान | पन्तनगर (उधमसिंह नगर) |
| उच्च स्थलीय पौध शोध संस्थान | श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) |
| ऑयल एण्ड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन | तेल भवन देहरादून |
| वैक्सीन कारखाना | पटवाडांगर (नैनीताल) |
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