उत्तराखण्ड के प्रमुख पर्व-त्यौहार

उत्तराखण्ड के प्रमुख पर्व-त्यौहार

उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृति और यहाँ के पारंपरिक पर्व-त्यौहार राज्य की अनूठी पहचान हैं। यह विषय न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अभिन्न हिस्सा है, बल्कि UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। परीक्षाओं में यहाँ के लोकपर्वों से अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए यह लेख आपकी तैयारी के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • मकर संक्रान्ति के अवसर पर कुमाऊँ क्षेत्र में मनाए जाने वाले अनोखे 'घुघतिया' (काले कौआ) त्यौहार से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
  • चैत्र मास में बच्चों द्वारा मनाए जाने वाले वसंत और प्रकृति के उत्सव 'फूलदेई' या 'फूल संग्राद' की संपूर्ण सांस्कृतिक महत्ता।
  • श्रावण मास के प्रथम दिन पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले प्रसिद्ध लोकपर्व 'हरेला' की परम्पराओं का वर्णन।
  • उत्तराखण्ड के अन्य परम्परागत त्योहारों से जुड़ी वे सभी रोचक और सटीक जानकारियाँ जो आपकी परीक्षा के लिए जरूरी हैं।
राज्य के प्रमुख पर्व-त्यौहारों का विवरण निम्न है-

घुघतिया

  • समय - जनवरी के मध्य (मकर संक्रान्ति)
  • क्षेत्र - कुमाऊँ
  • इसमें आटे के टेढ़े-मेढ़े 'घुघुत' बनाए जाने के कारण इसे 'घुघतिया' कहा जाता है।
  • इस दिन छोटे बच्चे गले में पहने हुए घुघुते को तोड़कर कौवों को आवाज देकर बुलाते हैं तथा उन्हें खिलाते हैं। इसे 'काले कौआ त्यौहार' भी कहा जाता है।

फूल संग्राद या फूलदेई

  • समय - चैत मास के प्रथम दिन
  • क्षेत्र - सम्पूर्ण प्रदेश
  • फूल संक्रान्ति के नाम से प्रसिद्ध यह त्यौहार 7 दिन से लेकर एक महीने तक मनाया जाता है।
  • इसमें कुँवारे बच्चों द्वारा घरों से अनाज माँगकर उसका हलवा बनाकर देव की पूजा की जाती है। देवी को प्रसन्न करने के लिए औजी लोग विभिन्न वाद्य बजाकर प्रस्तुति देते हैं।

हरेला

  • समय - श्रावण मास के प्रथम दिन
  • क्षेत्र - सम्पूर्ण प्रदेश
  • यह पर्यावरण को ध्यान में रखकर पौध-रोपण के रूप में मनाया जाता है।
  • इसमें एक बर्तन में मिट्टी डालकर धान, मक्का, उड़द, मटर आदि 5 या 7 या 9 प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। फिर इसे शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय को चढ़ाया जाता है।

उत्तराखण्ड के अन्य प्रमुख पर्व-त्यौहार

पर्व-त्योहार/क्षेत्र समय विशेष तथ्य
चैंतोल (पिथौरागढ़) चैत्र मास की अष्टमी को इसमें स्थानीय देवता 'देवल' की पूजा की जाती है तथा धार्मिक शोभायात्रा निकाली जाती है।
सारा (गढ़वाल) बैशाख इसमें बीमारियों से बचाव हेतु नन्दा देवी के दूतों की पूजा होती है।
घी संक्रान्ति (ओलगिया) (सम्पूर्ण प्रदेश) भाद्रपद (सितम्बर) के मध्य इसमें दूबघास की पत्तियाँ, घी में डुबोकर सिर पर लगाई जाती है। इस दिन घी खाना शुद्ध माना जाता है। चन्द्र शासनकाल में लोग इस दिन राजा को भेंट देते थे।
खतडुवा (कुमाऊँ) आश्विन मास की संक्रान्ति यह मुख्य रूप से पशुओं का त्योहार है, इसे 'गै त्योहार' कहा जाता है। इस दिन लोग चीड़ या अन्य वृक्षों को काटकर गाड़ देते हैं। उसके आस-पास घास-फूस का ढेर जमा हो जाता है, जिसे खतडुवा कहा जाता है।
पंचमी (सम्पूर्ण प्रदेश) सूर्य के उत्तरायण के बाद इसमें जौ के पत्तों की पूजा करके मन्दिर में चढ़ाए जाते हैं। इसमें रिश्तेदारों को लिफाफे में रखकर जौ की पत्तियाँ डाक से भेजी जाती हैं।
तुणाई (देहरादून) श्रावण मास यह जौनसार वाबर क्षेत्र में धूम-धाम से मनाया जाता है।
आठू (सम्पूर्ण प्रदेश) भाद्रपद इसमें चांचरी का आयोजन किया जाता है। साथ ही अखण्ड सौभाग्य की कामना हेतु गौरा-महेश्वर की पूजा-अर्चना की जाती है।
जागड़ा (सम्पूर्ण प्रदेश) भाद्रपद यह महासू देवता के स्नान के अवसर पर मनाया जाता है। इससे महासू देवता की पूजा होती है।
कलाई (कुमाऊँ) बैशाख यह फसल कटने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
बैंसी (सम्पूर्ण प्रदेश) श्रावण व पौष मास में यह 22 दिनों तक आयोजित होता है। इस अवसर पर लोग गाँव के मन्दिरों में सात्विक जीवन बिताते हैं।
बिखौती या विषवत् संक्रान्ति (सम्पूर्ण प्रदेश) वैशाख माह के प्रथम दिन इसमें श्रद्धालु व्रत करते हैं तथा तीर्थ जाने वाले श्रद्धालु तीर्थ यात्रा पर जाते हैं।

उत्तराखण्ड के परम्परागत त्योहार/पर्व

त्यौहार/पर्व विशेष तथ्य
दीपावली (कार्तिक, सम्पूर्ण प्रदेश)
  • स्थानीय भाषा में इसे 'बग्वाल' या 'बग्वाई' कहा जाता है।
  • इस दिन घर-आँगन की लिपाई-पुताई की जाती है। पशुओं को नहलाकर उन्हें मीठा खिलाया जाता है। रात में दीप जलाकर उजाला किया जाता है।
रामलीला (दशहरे पर, सम्पूर्ण प्रदेश)
  • इस अवसर पर रामायण का मंचन किया जाता है। प्रदेश में कर्मांचलीय रामलीला मूलतः अल्मोड़ा शैली की रामलीला मानी जाती है।
होली (फाल्गुन, सम्पूर्ण प्रदेश)
  • प्रदेश में 'खड़ी' व 'बैठकी' दो शैलियों में होली मनाई जाती है। प्रदेश में यह मधुर गीतों के संग हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
नाग पंचमी (श्रावण, सम्पूर्ण प्रदेश)
  • इस दिन नागों को दूध पिलाया जाता है।
रक्षाबन्धन (श्रावण, सम्पूर्ण प्रदेश)
  • इन दिन बहन द्वारा अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधा जाता है।
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।