उत्तराखण्ड के प्रमुख नगर एवं पर्यटन स्थल
देवभूमि उत्तराखण्ड अपने ऐतिहासिक मंदिरों, मठों और अद्भुत पर्यटन स्थलों के लिए विश्वविख्यात है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विशेष लेख UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है, जिससे परीक्षा में आपके अंक सुनिश्चित होंगे!
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- गढ़वाल के प्रमुख पर्यटन स्थल: जोशीमठ, माणा (भारत का पहला गाँव), औली का प्रसिद्ध रोपवे, मसूरी (पहाड़ों की रानी) और टिहरी के डोबरा-चांठी सस्पेंशन ब्रिज से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षापयोगी तथ्य।
- कुमाऊँ के ऐतिहासिक और रमणीय नगर: अल्मोड़ा का द्वारहाट (कुमाऊँ का खजुराहो), नैनीताल के प्रमुख स्थल, भारत का स्विट्जरलैंड 'कौसानी' (जहाँ गाँधी जी ने प्रवास के दौरान Bhagwat Geeta के संदेशों को 'अनाशक्ति योग' के रूप में लिपिबद्ध किया था) और चम्पावत के ऐतिहासिक किलों की रोचक जानकारी।
- धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र: हरिद्वार (हर की पौड़ी), उत्तरकाशी के गोमुख, कैलाश मानसरोवर यात्रा के मुख्य पड़ाव और राज्य के महत्वपूर्ण आश्रमों (मायावती व अनाशक्ति आश्रम) का विस्तृत विवरण।
- नगरों के प्राचीन नाम व संस्थापक: राज्य के प्रमुख नगरों जैसे कोटद्वार, रामनगर, हल्द्वानी और लोहाघाट के प्राचीन नामों, उनके उपनामों तथा उनके संस्थापकों से जुड़े वे सीधे सवाल जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
उत्तराखण्ड विभिन्न मन्दिरों, पीठों एवं मठों की उपस्थिति के कारण ही देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध है। पर्यटन उद्योग राज्य की आय तथा रोजगार का एक प्रमुख साधन है।
उत्तराखण्ड के प्रमुख नगरों एवं पर्यटन स्थलों का परिचय निम्नवत् है-
जोशीमठ
- अवस्थिति - चमोली
- प्राचीन नाम - योषि
- प्रमुख स्थल - नरसिंह मन्दिर, क्वारी पास (कर्जन ट्रेल मार्ग)
- यह क्षेत्र कत्यूरी राजाओं की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था।
- जोशीमठ में 1200 वर्ष पुराना कल्पवृक्ष है, जिसके नीचे शंकराचार्य ने ज्ञान प्राप्त किया था।
गौचर
- अवस्थिति - रुद्रप्रयाग और चमोली जिले की सीमा पर अलकनन्दा नदी के तट
- गौचर में किसानों को चरागाह निर्माण के लिए प्रेरित करने का कार्य भी लेडी वेलिंग्टन द्वारा वर्ष 1920 में किया गया।
- वर्ष 1943 में तत्कालीन कमिश्नर बर्नेडी ने गौचर में औद्योगिक एवं विकास मेला की शुरुआत की थी। यह मेला 14 नवम्बर से एक सप्ताह तक चलता है।
- गौचर को वर्ष 2019 में स्वच्छ गंगा टाउन का पुरस्कार मिला था।
माणा गाँव
- अवस्थिति - बद्रीनाथ से 4 किमी दूर
- प्राचीन नाम - मणिभद्रपुरी
- प्रमुख स्थल - मुचकुन्द गुफा, गणेश गुफा, व्यास गुफा, भीम पुल, मातामूर्ति का मन्दिर, घण्टाकर्ण मन्दिर
- इस गाँव में ग्रीष्मकाल में मारछा जनजाति निवास करती है।
- प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने माणा गाँव को अन्तिम गाँव की संज्ञा न देकर भारत का पहला गाँव कहा है।
- वसुधारा प्रपात चमोली के अन्तिम गाँव माणा से 5 किमी की दूरी पर स्थित है। इस प्रपात की ऊँचाई 122 मी है।
औली
- अवस्थिति - जोशीमठ से लगभग 15 किमी की दूरी पर
- प्रमुख स्थल - अंजनी माता का मन्दिर, दयाली सेरा, गुरसो बुग्याल, चतर कुण्ड
- यह स्थल कामेत, नन्दादेवी, हाथी व गौरी पर्वतों से घिरा है।
- एशिया के सबसे लम्बे व ऊँचे रोपवे में से एक औली में स्थित है, जिसकी लम्बाई 4.15 किमी है।
- यहाँ स्कीइंग महोत्सव वर्ष 1987 से गढ़वाल मण्डल विकास निगम द्वारा किया जा रहा है।
हेमकुण्ड
- अवस्थिति - जोशीमठ से 20 किमी की दूरी पर ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर
- यह वह स्थान है, जहाँ दसवें सिख गुरु गोबिन्द सिंह ने तपस्या की थी।
ग्वालदम
- अवस्थिति - चमोली एवं बागेश्वर की सीमा पर
- यह क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौन्दर्य, सेब एवं चाय के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
देहरादून के प्रमुख पर्यटन स्थल
| स्थल | विवरण |
|---|---|
| गुच्चुपानी | देहरादून से लगभग आठ किमी दूर पहाड़ों से आच्छादित रॉबर्स गुफाएँ हैं। |
| भागीरथी रिसॉर्ट्स | सेलाकुई में पिकनिक स्पॉट के रूप में प्रसिद्ध है। |
| फन वैली | रोमांचकारी खेलों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। |
| लच्छीवाला | डोईवाला में पिकनिक स्पॉट है। |
| भारतीय सर्वेक्षण विभाग | इसकी स्थापना 1767 ई. में की गई थी। UKPSC 2024 |
| घण्टाघर (क्लॉक टॉवर/बलबीर टॉवर) | 24 जुलाई, 1948 में तत्कालीन राज्यपाल सरोजिनी नायडू ने देहरादून घण्टाघर की नींव रखी थी। लाल बहादुर शास्त्री ने अक्टूबर, 1953 में घण्टाघर का उद्घाटन किया था। |
| मालसी डियर पार्क | उत्तराखण्ड का प्रथम चिड़ियाघर मालसी डियर पार्क था, जो देहरादून का सबसे पुराना चिड़ियाघर भी है। इसका विकास मिनी जूलॉजिकल पार्क के रूप में किया गया। |
मसूरी
- अवस्थिति - देहरादून से 35 किमी दूरी पर
- उपनाम - पहाड़ों की रानी
- प्रमुख स्थल - गनहिल, हैप्पी वैली, लाल टिब्बा, ज्वाला देवी मन्दिर, जॉर्ज एवरेस्ट हाउस, सेण्ट पॉल्स चर्च
- सम्पूर्ण विश्व में स्विट्जरलैण्ड के अतिरिक्त मसूरी में विण्टरलाइन का मनोरम दृश्य जनवरी माह में दिखता है।
हरिद्वार
यह शिवालिक श्रेणी के बिल्व एवं नील पर्वतों के मध्य गंगा के दाहिने तट पर अवस्थिति है।
हर की पौड़ी
- राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई की याद में गंगा नदी पर पौड़ियों का निर्माण कराया था। इन्हीं पौड़ियों को कालान्तर में हर की पौड़ी कहा जाने लगा।
- इस पवित्र स्थान को ब्रह्मकुण्ड नाम से भी जाना जाता है। हर की पौड़ी वह स्थान है, जहाँ से पवित्र नदी गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है।
- यहाँ प्रत्येक 12 वर्षों में महाकुम्भ तथा प्रत्येक 6 वर्षों में अर्द्धकुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है।
हरिद्वार के प्रमुख स्थल
| स्थल | विवरण/अवस्थिति |
|---|---|
| कुशावर्त घाट | • इसका निर्माण महारानी अहिल्याबाई द्वारा कराया गया था। |
| राजा विजय सिंह स्मारक | • यह कुंजा बहादुरपुर में स्थित है। |
| भीमगोड़ा | • यह हर की पौड़ी के पास स्थित एक कुण्ड है। |
| शान्ति कुंज/ गायत्री तीर्थ | • इसकी स्थापना वर्ष 1971 में पण्डित आचार्य श्रीराम शर्मा के संरक्षण में हुई थी। |
| कनखल | • पौराणिक समय में शिवजी के ससुर दक्ष प्रजापति की राजधानी, यहाँ सतीकुण्ड नामक स्थान है, जहाँ माता सती अग्नि में समाई थीं。 • यहाँ दक्ष प्रजापति मन्दिर या दक्षेश्वर मन्दिर लंढौर रियासत की रानी धनकौर ने बनवाया था। |
| मनसा देवी मन्दिर | • हरिद्वार नगर के पश्चिम में स्थित शिवालिक के बिल्व शिखर पर स्थित है。 • इस मन्दिर में जत्कारू ऋषि की पत्नी सर्पराज्ञी देवी (माता मनसा) की तीन मुख और पाँच भुजाओं वाली अष्टनाग मूर्ति स्थापित है। |
| सप्तऋषि नाम | • यहाँ गंगाजी सात धाराओं में विभक्त होकर बहती है। |
| बिल्केश्वर मन्दिर | • बिल्व पर्वत की तलहटी में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। इसी स्थान पर माता पार्वती ने शिव प्राप्ति के लिए तप किया था। |
टिहरी
टिहरी नगर भागीरथी एवं भिलंगना नदी के संगम पर स्थित था। अब यह नगर टिहरी बाँध की झील में डूब चुका है।
वर्ष 2004 में टिहरी नगर को खाली करके यहाँ के निवासियों को नई टिहरी में स्थानान्तरित कर दिया गया।
टिहरी के प्रमुख स्थल
| स्थल | विवरण/अवस्थिति |
|---|---|
| घनसाली | बालगंगा एवं भिलंगना नदी के निकट पर्यटन स्थल |
| धनोल्टी | देवदार, ओक व रोहडोडोनड्रान के वृक्षों से आच्छादित प्रमुख पर्यटन स्थल |
| आनन्द स्पा | नरेन्द्र नगर के समीप घने जंगल में स्थित टिहरी नरेश का महल |
| डुण्डीप्रयाग | कीर्तिनगर में शिव मन्दिर के पास अलकनन्दा नदी पर |
| देवप्रयाग (सुदर्शन क्षेत्र, इन्द्रप्रयाग) | भागीरथी तथा अलकनन्दा नदियों के संगम पर ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग पर स्थित, समस्त तीर्थों का शिरोमणि व समग्र पाप विनाशक |
| रघुनाथ (राम मन्दिर) | देवप्रयाग में स्थित द्रविड़ शैली का मन्दिर |
| नाग टिब्बा | 3048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक मन्दिर है, जिसका मार्ग एक प्रसिद्ध ट्रैक भी है। |
| विश्वनाथ गुफा | हिन्दाव पट्टी में स्थित है, इसे गुरु आदि शंकराचार्य एवं गुरु वशिष्ठ की तपस्थली भी कहा जाता है। |
| कैम्पटी फॉल | मसूरी के पास स्थित एक विशाल जलप्रपात |
| सुरकण्डा देवी सिद्धपीठ | जौनपुर ब्लॉक में स्थित है, यह राज्य की एकमात्र सिद्धपीठ है, जहाँ गंगा दशहरे पर विशाल मेला लगता है। |
डोबरा-चांठी सस्पेंशन ब्रिज
- उत्तराखण्ड का सबसे लम्बा सस्पेंशन ब्रिज टिहरी झील पर बना डोबरा चांठी पुल है, जो टिहरी से प्रतापनगर तक निर्मित है। इसकी कुल लम्बाई 725 मी है, जिसमें मुख्य पुल की लम्बाई 440 मी तथा चौड़ाई
- 7 मी है। यह समुद्र तल से 850 मी की ऊँचाई पर स्थित है।
- इस ब्रिज का निर्माण कार्य दक्षिण कोरियाई कम्पनी योसीन इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा वर्ष 2006 में शुरू किया गया था।
- तत्कालीन मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 8 नवम्बर, 2020 को इस पुल का उद्घाटन किया था।
उत्तरकाशी
- इसका प्राचीन नाम बाड़ाहाट एवं ब्रह्मापुर था।
- उत्तरकाशी नगर प्राकृतिक दृश्यों; जैसे- नदियों, पहाड़ों से परिपूर्ण है, जहाँ भागीरथी व वरुण नदियाँ बहती हैं।
- मनेरी से गंगोत्री मार्ग पर भागीरथी के बाएँ किनारे पर गन्धक युक्त गर्म जल का स्रोत है।
गोमुख
अवस्थिति - गंगोत्री से 18 किमी दूर
एक हिमनद है, जहाँ से भागीरथी (गंगा) नदी का उद्गम होता है।
हर्षिल
- अवस्थिति - उत्तरकाशी से 73 किमी की दूरी पर गंगोत्री मार्ग पर
- प्राचीन नाम - हरिशिला
- यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुन्दरता और सेबों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आर्मी कैन्टोनमेण्ट भी स्थापित है।
- फ्रेडरिक विल्सन ने यहाँ सेब के बागान लगाए, जिसके कारण यहाँ सेब की एक प्रजाति का नाम विल्सन है। यहाँ सर्वप्रथम आलू की खेती भी विल्सन द्वारा की गई थी।
- यह स्थल उत्तराखण्ड का मिनी स्विट्जरलैण्ड के रूप में प्रसिद्ध है।
- इस क्षेत्र में लक्ष्मी नारायण मन्दिर का निर्माण भागीरथी तट पर 1818 ई. में कराया गया।
- हर की दून रंवाई क्षेत्र में सुपिन नदी के बेसिन पर हर की दून पर्यटन स्थल अवस्थित है। समसू हर की दून क्षेत्र के ईष्ट देवता हैं। यहाँ दुर्योधन के रूप में समसू की पूजा की जाती है।
पौड़ी गढ़वाल
पौड़ी के प्रमुख पर्यटक स्थल दुगड्डा, कोटद्वार, लैंसडाउन व देवलगढ़ आदि हैं।
दुगड्डा
- अवस्थिति - कोटद्वार से 16 किमी की दूरी पर लंगूर एवं सिलगाड़ नदियों के संगम पर
- प्राचीन नाम - नाथोपुर
- इस स्थान को पं. धनिराम मिश्र ने 19वीं शताब्दी में अपने खेत पर बसाया था।
- ब्रिटिश काल में यह प्रमुख व्यापारिक एवं राजनीतिक केन्द्र था। जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1930 तथा 1945 में दुगड्डा आए।
- भवानी सिंह रावत ने दुगड्डा में शहीद मेले की शुरुआत की।
कोटद्वार
- अवस्थिति - खोह नदी के तट पर
- पुराना नाम - मोरध्वज
- उपनाम - गढ़वाल का ग्रास्टिनगंज या स्टील सिटी ऑफ उत्तराखण्ड या गढ़वाल का प्रवेश द्वार
- प्रमुख स्थल - सिद्धबली मन्दिर, जोसेफ कैथेड्रल चर्च, बुद्धा पार्क
- इस नगर को बसाने का पहला मास्टर प्लान के.सी. माथुर ने दिया था। इसे वर्ष 1901 में नगर का दर्जा प्राप्त हुआ।
- गढ़वाल का एकमात्र रेलवे स्टेशन कोटद्वार में है।
- कोटद्वार को लैंसडाउन सड़क मार्ग से वर्ष 1909 में जोड़ा गया।
- कोटद्वार का नाम कण्वनगरी कोटद्वार में परिवर्तित करने की मंजूरी प्रदान की जा चुकी है।
कण्वाश्रम
- अवस्थिति - शिवालिक श्रेणी के हेमकूट तथा मणिकूट पर्वतों के मध्य (कोटद्वार से 10 किमी दूर) मालिनी नदी के तट पर
- महाकवि कालिदास ने कण्वाश्रम से शिक्षा प्राप्त की तथा मालिनी नदी के तट पर अभिज्ञानशाकुंतलम की रचना की थी।
- महाकवि कालिदास द्वारा कण्वाश्रम को किसलय प्रदेश कहा गया।
लैंसडाउन
- अवस्थिति - कोटद्वार से 37 किमी की दूरी पर स्थित
- प्रमुख स्थल - ताड़केश्वर मन्दिर, कालेश्वर महादेव, भुल्ला ताल झील, दरबान सिंह नेगी व गबरसिंह नेगी स्मारक, गढ़वाली मैस (1888 ई. में बनी), टिफिन-टॉप, सेण्ट मेरीज़ गिरजाघर (1895 ई.), गढ़वाल रेजीमेण्ट युद्ध स्मारक (1923)
- इस सैन्य नगर पर 4 नवम्बर, 1887 को गढ़वाल राइफल्स की पहली बटालियन की स्थापना की गई थी।
- 21 सितम्बर, 1890 को ब्रिटिश वायसराय लैंसडाउन के नाम पर इस स्थान का नाम लैंसडाउन रखा गया था।
देवलगढ़
- प्रमुख स्थल - सोम का भांडा या राजा का चबूतरा, काल भैरव का मन्दिर, राजराजेश्वरी देवी मन्दिर
- देवलगढ़ के संस्थापक कांगड़ा शासक देवल थे, जिसके नाम पर इसका नाम पड़ा। 1512 ई. में अजयपाल ने चाँदपुर गढ़ से अपनी राजधानी देवलगढ़ में स्थानान्तरित की।
पिथौरागढ़ के प्रमुख स्थल
| स्थल | विवरण/अवस्थिति |
|---|---|
| गंगोलीहाट |
|
| अस्कोट |
|
| धारचूला |
|
| डीडीहाट |
|
| मुनस्यारी (जोहार क्षेत्र का प्रवेश द्वार, तिकसेन) |
|
कैलाश मानसरोवर यात्रा
- कुमाऊँ मण्डल विकास निगम, ITBP एवं भारतीय विदेश मन्त्रालय के सहयोग से कैलाश मानसरोवर यात्रा सम्पन्न होती है।
- कैलाश मानसरोवर यात्रा पिथौरागढ़ के लिपुलेख दर्रे से होकर जाती है।
- नवीढ़ाग इस यात्रा का अन्तिम पड़ाव है।
- कैलाश मानसरोवर की यात्रा मुनस्यारी की जोहार घाटी व चमोली के नीति दर्रा के माध्यम से भी की जाता है।
- इस यात्रा को लिपुलेख दर्रे से कराए जाने सम्बन्धी समझौता चीन के साथ वर्ष 1981 में किया गया था।
अल्मोड़ा
- यहाँ के प्रमुख स्थल बिनसर, मटेला, सिमतोला, मारतोला व ब्राइट और कॉर्नर, उपट नामक गोल्फ मैदान, रायलाकोट का किला, चिलियानौला आदि हैं।
- रामशिला मन्दिर अल्मोड़ा नगर के मध्य में स्थित है। 1588 ई. में अष्ट महल दुर्ग के मध्य में राजा रूपचन्द ने इस रामशिला मन्दिर समूह की स्थापना की।
- अल्मोड़ा में सिस्टर निवेदिता कॉलेज हाउस स्थित है, जिसकी स्थापना सिस्टर निवेदिता द्वारा की गई थी। इसका प्राचीन नाम ओकले हाउस था।
द्वारहाट
- द्वारहाट मन्दिर समूह हिमालय की द्वारिका के नाम से जाना जाता है, जिसे लखनपुर, मन्दिरों की नगरी व कुमाऊँ का खजुराहो भी कहा जाता है।
- यहाँ कत्यूरी राजाओं द्वारा बनाए गए 30 मन्दिर के समूह को राहुल सांकृत्यायन द्वारा 11-12वीं सदी का बताया गया है।
- द्वारहाट में स्थित विभाण्डेश्वर मन्दिर पर विषुवत् संक्रान्ति को स्यालदे बिखौती का मेला लगता है। इस मन्दिर को उत्तर का काशी भी कहा जाता है।
रानीखेत
- अवस्थिति - अल्मोड़ा से 50 किमी दूर झूलादेवी पर्वत में
- उपनाम - पर्यटकों की नगरी
- प्राचीन नाम - झूलादेव एवं ऑकलैण्ड हिल्स
- समुद्र तल से ऊँचाई 6000 मी
- 1869 ई. में सर हेनरी रैम्जे ने आधुनिक रानीखेत की स्थापना की थी। रानीखेत लॉर्ड मेयो का अति प्रिय पर्यटन स्थल था।
- रानीखेत को विश्व की सर्वोत्तम हिल का दर्जा विलियम दोग्लस द्वारा दिया गया था।
- फल संरक्षण एवं शोध केन्द्र रानीखेत के समीप चौबटिया में स्थित है। चौबटिया को फलोद्यान का देश कहा जाता है।
- गाँधी कुटी एवं गोरिला देवता का मन्दिर रानीखेत से कुछ दूरी पर ताड़ीखेत में स्थित है।
- झूला देवी मन्दिर रानीखेत से 10 किमी की दूरी पर चौबटिया मार्ग पर स्थित है। यह स्थान दुर्गा देवी और राम मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है।
नैनीताल
यहाँ के प्रमुख स्थल भवाली, काठगोदाम, रामगढ़, रामनगर व हल्द्वानी हैं।
नैनीताल नगर की खोज ब्रिटिश यात्री सी. पी. बैरन द्वारा की गई थी। नैनीताल को सरोवर नगरी या झीलों की नगरी के नाम से जाना जाता है।
काठगोदाम
- अवस्थिति - गौला नदी के तट पर
- उपनाम - कुमाऊँ का प्रवेश द्वार
- पुराना नाम - बमोरी घाट या बाड़ाखेड़ी
- प्रमुख स्थल - गुलाब घाटी
- दानसिंह मालदार ने बाड़ाखेड़ी में लकड़ी के गोदाम वर्ष 1900 में बनाए थे, जिस कारण इसका नाम चौहान पाटा भी पड़ा था।
- 1884 ई. में काठगोदाम रेलवे स्टेशन शुरू हुआ। वर्ष 1994 में इसकी बड़ी रेलवे लाइन बनाई गई थी।
- पुष्पभद्रा, नैनीगाड़ एवं गोला नदी का संगम रानीबाग के समीप होता है।
रामगढ़
- इसका उपनाम फलों का कटोरा है।
- रामगढ़ में फलों के उद्यान पी. ई. डेरियाज द्वारा लगाए गए थे।
- रामगढ़ नैनीताल में प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा का संग्रहालय अवस्थित है।
- रामगढ़ में टैगोर टॉप गुरुदेव रविन्द्रनाथ के प्रवास करने के कारण प्रसिद्ध है।
रामनगर
- यहाँ का प्रमुख धार्मिक स्थल गर्जिया देवी का मन्दिर है।
- रामनगर 1850 ई. में अंग्रेज कमिश्नर रैम्जे द्वारा बसाया गया था। प्रारम्भ में इसका नाम रैम्जे नगर था। यह कोसी नदी के तट पर स्थित है। यह मुरादाबाद-काशीपुर रेल पथ का अन्तिम स्टेशन है।
- महर्षि वाल्मीकि आश्रम के भग्नावशेष गर्जिया में स्थित हैं।
- रामनगर में जुड़वा घाटी व उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् स्थित हैं।
हल्द्वानी
- राज्य का सबसे बड़ा व्यापारिक नगर हल्द्वानी गौला नदी के तट पर स्थित है।
- हल्दू पेड़ों की अधिकता के कारण इसका नाम हल्द्वानी पड़ा।
- 1834 ई. में विलियम ट्रेल ने आधुनिक हल्द्वानी की नींव रखी थी।
- हल्द्वानी में ट्रेल द्वारा बनाए गए बंगले को खाम का बंगला कहा जाता है।
- हल्द्वानी में आर्यसमाज भवन का निर्माण वर्ष 1901 में तथा सनातन धर्म सभा का निर्माण वर्ष 1902 में हुआ।
- लखनऊ से हल्द्वानी पहली रेलगाड़ी अप्रैल, 1884 में पहुँची थी।
- हल्द्वानी नगरपालिका की स्थापना 1 सितम्बर, 1966 को हुई थी। नगर निगम वर्ष 2011 में बनाया गया था।
बागेश्वर
पाण्डुस्थल बागेश्वर से 28 किमी की दूरी पर कुमाऊँ एवं गढ़वाल सीमा पर स्थित है। कहा जाता है कि यहाँ पाण्डवों ने अज्ञातवास किया था। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर इस स्थान पर मेला आयोजित होता है।
भारत का स्विट्जरलैण्ड : कौसानी
- अवस्थिति - बागेश्वर से 39 किमी की दूरी पर कोसी और गरुड़ नदियों के बीच
- संस्थापक - हेनरी रैम्जे
- पुराना नाम - बलना
- उपनाम - कुमाऊँ का गहना
- प्रमुख स्थल - कौशिक मुनि की तपस्थली होने के कारण इसका नाम कौसानी पड़ा।
- कौसानी में महात्मा गाँधी ने वर्ष 1929 में लगभग 12 दिन का प्रवास किया था।
- कौसानी में स्थित अनाशक्ति आश्रम को गाँधी आश्रम भी कहते हैं, क्योंकि गाँधी जी ने कौसानी में गीता की भूमिका पर अनाशक्ति योग पर लेख लिखा था।
- वर्ष 1941 में कौसानी में लक्ष्मी आश्रम की स्थापना गाँधी जी की शिष्या सरला बहन द्वारा की गई थी।
ऊधमसिंह नगर
यह किच्छा से 13 किमी एवं नैनीताल से 83 किमी दूर कल्याणी नदी के तट पर अवस्थिति है।
इस नगर का नाम कुमाऊँ के राजा रुद्रचन्द के नाम पर रखा गया था, जिसने इसकी स्थापना 1588 ई. में की थी।
रुद्रपुर
- दीपचन्द ने रुद्रपुर में एक किले का निर्माण रुहेलाओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया था।
- अल्मोड़ा में चन्द शासन के पतन के बाद 1790 ई. में रुद्रपुर क्षेत्र को काशीपुर के लाट नन्दराम ने अवध के नवाब को सौंप दिया था।
- रेल सेवा का प्रारम्भ रुद्रपुर में 1886 ई. में हुआ।
- रुद्रपुर बम विस्फोट अक्टूबर, 1991 में किया गया था।
- वर्ष 2002 में रुद्रपुर में उत्तराखण्ड ग्राम विकास संस्थान की स्थापना हुई।
- राज्य का दूसरा एवं कुमाऊँ क्षेत्र का पहला साइबर थाना वर्ष 2021 में रुद्रपुर में खोला गया।
चम्पावत
- संस्थापक - प्रथम चन्दवंशीय राजा सोमचन्द
- प्रमुख स्थल - पूर्णागिरी शक्तिपीठ व पाताल रुद्रेश्वर महादेव मन्दिर
- नौ ढुंगाघर मकान चम्पावत में स्थित है, जिसके प्रत्येक कोने को गिनने पर 9 पत्थर दिखाई देते हैं।
- बाणासुर का किला चम्पावत शहर से 16 किमी की दूरी पर एक पर्वत शिखर पर स्थित है। यह शिव के परम भक्त बाणासुर के नाम पर है।
- चम्पावत में सोमचन्द द्वारा राजबुंगा किले का निर्माण कराया गया था।
- चम्पावत में रामकृष्ण शान्तिमठ की स्थापना स्वामी विवेकानन्द द्वारा वर्ष 1901 में की गई थी।
लोहाघाट
- चम्पावत से 14 किमी की दूरी पर लोहावती नदी के किनारे स्थित है। लोहाघाट को पुराणों में लोहार्गल कहा गया। लोहाघाट को सुई नाम से भी जाना जाता था।
- लोहाघाट में आस्था का केन्द्र ऋषेश्वर महादेव मन्दिर है। यहाँ मानेश्वर मन्दिर भी स्थित है।
- मायावती आश्रम यह लोहाघाट से 9 किमी दूर स्थित है।
- 19 मार्च, 1899 को मायावती आश्रम की स्थापना हुई। एच. सेवियर को इसको बनाने का प्रमुख श्रेय दिया जाता है।
- धर्मार्थ अस्पताल की स्थापना मायावती आश्रम में वर्ष 1903 में की गई थी।
उत्तराखण्ड की पवित्र गुफाएँ
| नाम | स्थान |
|---|---|
| व्यास गुफा, गणेश गुफा, स्कन्द गुफा, मुचकुन्द गुफा, राम गुफा | बद्रीनाथ |
| गोरखनाथ गुफा | भक्त्याना, श्रीनगर |
| वशिष्ठ गुफा | टिहरी (उत्तरकाशी) |
| भरत गुफा, हनुमान गुफा | लंगासू के पार, गिरसा में |
| शंकर गुफा | देवप्रयाग |
| भीम गुफा, ब्रह्म गुफा | केदारनाथ |
| कोटेश्वर गुफा | रुद्रप्रयाग |
| स्मर, सुमेरु गुफा | पिथौरागढ़ (गंगोलीहाट) |
| गढ़नाथ गुफा, पाण्डुखोली गुफा, कपलेश्वर गुफा | अल्मोड़ा |
पवित्र शिलाएँ (गढ़वाल)
| नाम | स्थान |
|---|---|
| चरणपादुका, गरुड़ शिला, नारद शिला, नरसिंह शिला, वराह शिला | बद्रीनाथ |
| चन्द्र शिला | तुंगनाथ |
| काल शिला | कालीमठ के ऊपर |
| भृगु शिला/ दिव्य शिला (2013 के आपदा के समय प्रकट) | केदारनाथ |
| भीम शिला | माणा ग्राम, केदारनाथ |
| भागीरथी शिला | गंगोत्री, उत्तरकाशी |
| शिलासमुद्र | रूपकुण्ड (त्रिशूली अंचल) |
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