उत्तराखण्ड के प्रमुख खनिज

उत्तराखण्ड के प्रमुख खनिज

उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक और भूगर्भीय संरचना इसे खनिज सम्पदा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यह विषय-"उत्तराखण्ड के प्रमुख खनिज"-परीक्षा के नजरिए से बेहद खास है। यदि आप UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, या फॉरेस्ट गार्ड जैसी किसी भी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इस टॉपिक से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। इस विषय की अच्छी समझ आपको परीक्षा में बढ़त दिला सकती है!
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • खनिजों का विस्तृत भौगोलिक वितरण: राज्य में चूना-पत्थर, संगमरमर, मैग्नेसाइट, और खड़िया जैसे प्रमुख खनिजों के भंडार किन-किन जिलों (जैसे- देहरादून, अल्मोड़ा, चमोली, आदि) में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
  • रोचक और परीक्षापयोगी तथ्य: देहरादून के सहस्रधारा में स्थित गंधक (Sulphur) युक्त जलप्रपात के त्वचा रोगों को ठीक करने वाले गुण और नैनीताल-गढ़वाल क्षेत्र से प्राप्त होने वाले लोहे (हेमेटाइट व मैग्नेटाइट) की अहम जानकारी।
  • ताँबा, सीसा और स्थानीय खनिज संपदा: कुमाऊँ और गढ़वाल मंडल में तांबे और सीसे के प्रमुख क्षेत्र, साथ ही पर्वतीय मकानों की छतों में इस्तेमाल होने वाले प्रसिद्ध स्थानीय खनिज 'पाथर और पटाल' के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य।
  • उत्तराखण्ड की खनिज नीति: वर्ष 2001 में लागू राज्य की खनिज नीति के प्रमुख प्रावधान, खनन कार्यों की जिम्मेदारी (वन विकास निगम व मण्डल विकास निगम) और 'खनिज निधि' की स्थापना से जुड़े जरूरी आँकड़े।

चूना-पत्थर

  • प्रमुख जिले - देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चमोली एवं रुद्रप्रयाग
  • सर्वोत्तम श्रेणी - चमोली (पीपलकोटी)
  • मसूरी (ऋषिकेश) में क्रीम रंग के सख्त चूना-पत्थर के भण्डार उपलब्ध हैं।
  • अल्मोड़ा के दानापानी व चौखुटिया क्षेत्र में चूना-पत्थर के भण्डार प्राप्त हुए हैं।
  • देहरादून के मन्दारम तथा बारकोंट क्षेत्र में अच्छे किस्म के चूना-पत्थर का प्रचुर भण्डार है।

संगमरमर (मार्बल)

प्रमुख जिले - देहरादून एवं टिहरी
देहरादून जिले में मसूरी के समीप संगमरमर के लगभग 4 मिलियन टन भण्डार पाए जाते हैं। चमोली की अलकनन्दा घाटी तथा विरही गंगा घाटी में भी संगमरमर पाया जाता है।

मैग्नेसाइट

  • प्रमुख क्षेत्र - कुमाऊँ (बागेश्वर, पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा) तथा गढ़वाल (चमोली)
  • कुमाऊँ क्षेत्र - देश के प्रमुख मैग्नेसाइट भण्डारों में शामिल
  • अल्मोड़ा के झिरौली तथा पिथौरागढ़ के चण्डाक क्षेत्र में मैग्नेसाइट के पर्याप्त भण्डार हैं।
  • चमोली के पोखरी, तपोवन, जोशीमठ, देवलधार, पिण्डर घाटी तथा मन्दाकिनी घाटी में मैग्नेसाइट के पर्याप्त भण्डार उपलब्ध हैं।

खड़िया (चॉक)

प्रमुख जिले - देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल तथा चमोली
मसूरी के समीप महागाँव और कियारकुली खड़िया के प्रमुख क्षेत्र हैं। यहाँ की खड़िया में कैल्शियम सल्फेट की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।
देहरादून में लक्ष्मण झूले के समीप नीट गाँव व सीत नाला तथा टिहरी में सोन नदी के किनारे स्थित रंगार एवं रीरा गाँव भी खड़िया के प्रमुख क्षेत्र हैं।

जिप्सम

इसके प्रमुख क्षेत्र देहरादून (धपीला क्षेत्र), टिहरी एवं पौड़ी (खरारी घाटी, खेरा, लक्ष्मण झूला), नैनीताल (खुरपाताल, मंझरिया), अल्मोड़ा आदि हैं।

लोहा

प्रमुख जिले - नैनीताल, चमोली, पौड़ी और टिहरी
नैनीताल जिले के कालाढुंगी और रामगढ़ से हेमेटाइट और मैग्नेटाइट प्रकार का लोहा प्राप्त होता है।
गढ़वाल मण्डल में लोहे के प्रमुख क्षेत्र चाँदपुर पट्टी, राजबगुना, कालीफाट, दूधातोली, चोपड़ा, लोहा गाँव, दशोली आदि हैं।

ताँबा

  • प्रमुख क्षेत्र - कुमाऊँ मण्डल (बागेश्वर, थैलीपाटन अल्मोड़ा, झिरौली फलमती पहाड़ी)
  • अन्य क्षेत्र - पौड़ी, टिहरी, देहरादून और चमोली जिले (पोखरी, धमैथी, नागनाथ क्षेत्र, धनपुर, मोहनखाल क्षेत्र)
  • अल्मोड़ा, भागीरथी घाटी, पौड़ी (धनपुरडोबरी) में ताँबा एवं जस्ता संयुक्त रूप में पाया जाता है।

गन्धक

सर्वप्रथम वर्ष 1957 में नन्दप्रयाग से 50 किमी पूर्व में स्थित रूपगंगा घाटी में सुदौला ग्राम के निकट स्फटिक शिलाओं में गन्धक होने के प्रमाण मिले थे।
इसके अतिरिक्त देहरादून में भी गन्धक पाया जाता है। देहरादून के सहस्रधारा जलप्रपात का जल गन्धक युक्त है, जिसमें स्नान करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।

सीसा (सिलिका सैण्ड)

प्रमुख क्षेत्र पिथौरागढ़ (चण्डाक, देवलगढ़, रालम तथा भैंसवाल), अल्मोड़ा (राई, चैनापानी और विलौन क्षेत्र) तथा देहरादून (टोंस नदी घाटी में कुमा-बुरेला और मुधौला), उत्तरकाशी, टिहरी व पौड़ी हैं।
अल्मोड़ा जिले के पट्टीखराही में कच्चे सीसे की विस्तृत खोज की गई है।

पाथर और पटाल

उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले में उत्तम प्रकार का पाथर और पटाल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
यह खनिज पर्वतीय भाग में मकानों की छतों में प्रयुक्त होता है और राज्य में लगभग सभी स्थानों पर पाया जाता है।

खनिज नीति

  • खनिज नीति के अनुसार, उत्तरांचल वन विकास निगम को 4 अप्रैल, 2001 को वन क्षेत्र में स्थित खदानों में खनन कार्य का दायित्व सौंपा गया तथा अन्य (राजस्व) क्षेत्रों में खनन कार्य गढ़वाल मण्डल विकास निगम एवं कुमाऊँ मण्डल विकास निगम द्वारा किया जाता है।
  • इस नीति के अन्तर्गत 'खनिज निधि' की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिसके अन्तर्गत राजस्व का 5% मुख्य खनिजों से तथा 5% उप-खनिजों से एकत्रित करके इस निधि में जमा करवाने का प्रावधान किया गया है।

प्रमुख खनिज : एक नजर में

खनिज उत्पादन स्थल
टिन चमोली (राज्य का एकमात्र टिन उपलब्ध जिला)
चाँदी अल्मोड़ा
ग्रेफाइट अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल आदि
सोप स्टोन (टैल्क) पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली आदि
एस्बेस्टस कांधेरा (पौड़ी), अल्मोड़ा
सोना रामगंगा, शारदा, अलकनन्दा व पिण्डार नदियों के रेत में
यूरेनियम टिहरी (यूरेनियम उपलब्धता के संकेत प्राप्त हुए हैं)
स्टेटाइट अल्मोड़ा
रॉक फॉस्फेट देहरादून, टिहरी (मसूरी, दुरमाला, किमोई, मसरान, माल देवता एवं चमसारी क्षेत्र) तथा नैनीताल
फॉस्फोराइट टिहरी (रझगेंवा क्षेत्र) और देहरादून
डोलोमाइट टिहरी, पिथौरागढ़ और देहरादून
बेराइट्स एवं एण्डालूसाइट देहरादून
स्टेटाइट अल्मोड़ा
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।