उत्तराखण्ड की प्रमुख झीलें एवं ताल

उत्तराखण्ड की प्रमुख झीलें एवं ताल

उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता यहाँ की झीलों और तालों में बसती है, जो न केवल पर्यटकों को लुभाती हैं बल्कि आपकी परीक्षाओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह विषय UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड और अन्य सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक अनिवार्य टॉपिक है। इस लेख में हमने कुमाऊँ और गढ़वाल मण्डल के तालों से जुड़े उन सभी गहन तथ्यों को संकलित किया है, जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • कुमाऊँ की झीलों का खजाना: कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे बड़ी झील 'भीमताल' और नौ कोनों वाले 'नौकुचिया ताल' के साथ-साथ नैनीताल (त्रि-ऋषि सरोवर) के ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों का विस्तृत विवरण।
  • गढ़वाल के रहस्यमयी ताल: चमोली के प्रसिद्ध 'कंकाली ताल' (रूपकुण्ड) का रहस्य, केदारनाथ के समीप स्थित 'गाँधी सरोवर' का इतिहास और नन्दा देवी राजजात यात्रा से जुड़े 'होमकुण्ड' की महत्वपूर्ण जानकारी।
  • भौगोलिक विशिष्टताएँ: गढ़वाल क्षेत्र के सबसे बड़े और गहरे 'सहस्त्र ताल' तथा अलकनंदा नदी के उद्गम स्थल 'सतोपंथ ताल' से जुड़ी सटीक जानकारी।
  • धार्मिक एवं पौराणिक महत्व: सिखों के पवित्र तीर्थ 'हेमकुण्ड साहिब' (लोकपाल) और महर्षि नचिकेता के नाम पर प्रसिद्ध 'नचिकेता ताल' जैसे प्रमुख स्थलों का परीक्षा उपयोगी विवरण।
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कुमाऊँ मण्डल की झीलें/ताल

कुमाऊँ मण्डल की प्रमुख झीलें/ताल निम्नलिखित हैं-

नैनीताल

  • अवस्थिति - नैनीताल नगर के मध्य में
  • आकार - कटोरे की भाँति
  • खोज - सी. पी. बैरन (1841 ई. में )
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 1,937 मी
  • लम्बाई - 1,430 मी
  • चौड़ाई - 465 मी
  • गहराई - 16 से 26 मी
  • निकट अवस्थित स्थल नैना देवी शक्तिपीठ
  • स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में इस ताल को त्रि-ऋषि सरोवर कहा गया है।
  • इस ताल के चारों ओर दक्षिण-पूर्वी भाग को छोड़कर ऊँचे-ऊँचे सात पहाड़ या सप्तश्रृंग हैं। इन सात पहाड़ों में सबसे ऊँची चाइना/चीना अथवा नैना पीक है।
  • बलिया नदी इसके दक्षिण-पूर्वी भाग से निकलती है।
  • इसके उत्तरी भाग को मल्लीताल तथा दक्षिणी भाग को तल्लीताल कहा जाता है।
  • इस ताल के तट के पास झील की ऊपरी सतह कुकुरमकरी शैवाल से आच्छादित है।

भीमताल

  • अवस्थिति - काठगोदाम से 10 किमी उत्तर और नैनीताल से 22 किमी पूर्व
  • आकार - त्रिभुजाकार
  • लम्बाई - 1,674 मी (कुमाऊँ क्षेत्र का सबसे बड़ा ताल)
  • चौड़ाई - 447 मी
  • गहराई - 26 मी
  • यह कमल और कमल ककड़ी के लिए प्रसिद्ध है।
  • इसके जल का रंग गहरा नीला है तथा इसके बीच में एक टापू भी है।

नौकुचिया ताल

  • अवस्थिति - नैनीताल से 26 किमी व भीमताल से 5 किमी की दूरी पर
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 1,292 मी
  • लम्बाई - 950 मी
  • चौड़ाई - 680 मी
  • गहराई - 40 मी (कुमाऊँ क्षेत्र का सबसे गहरा ताल)
  • इस ताल में नौ कोने होने के कारण इसे नौकुछिया ताल कहा जाता है।
  • यह ताल पक्षियों के निवास के लिए उत्तम है, इसलिए यहाँ विदेशी पक्षी भी देखे जाते हैं।

खुरपा ताल

  • अवस्थिति - नैनीताल नगर से 12 किमी की दूरी पर
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 1,635 मी
  • लम्बाई - 1,633 मी
  • चौड़ाई - 226 मी
  • इस ताल की आकृति जानवर के खुर के समान है, इसलिए इसका नाम खुरपा ताल है।
  • यह ताल तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है तथा इसके जल का रंग गहरा हरा है। इसके चारों ओर सीढ़ीनुमा खेत हैं।

सात ताल

  • अवस्थिति - नैनीताल से 22 किमी की दूर
  • लम्बाई - 990 मी
  • चौड़ाई - 315 मी
  • यहाँ पर पहले सात झीलें थीं, जिनमें से वर्तमान में कुछ झीलें सूख गई हैं।
  • इनमें नल-दमयन्ती ताल, गरुड़ ताल तथा राम-सीता ताल प्रमुख हैं। ये ताल आन्तरिक जलधाराओं द्वारा आपस में जुड़े हैं।
  • नैनीताल से आने वाली वालियागाड़ नदी के माध्यम से इन तालों का जल गौला नदी में चला जाता है।

तड़ाग ताल

  • अवस्थिति - अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया से 10 किमी की दूरी पर
  • लम्बाई - 1 किमी
  • चौड़ाई - 500 मी
  • यह चीड़, देवदार, बाँस और बुराँस के वृक्षों से घिरा हुआ है।
  • इस ताल के निचले भाग में जल की निकासी हेतु पाँच सुरंगें बनी हैं, जिनमें से वर्तमान में तीन सुरंगें बन्द हैं।
  • ग्रीष्मकाल में इसका कुछ भाग सूख जाता है, जिसमें कृषि की जाती है।

श्यामला ताल

  • अवस्थिति - चम्पावत जिले में
  • परिधि - 2 किमी
  • निकट अवस्थित स्थल - स्वामी विवेकानन्द का आश्रम, सूखा ताल, नाग ताल, स्वामी ताल
  • गहरे श्याम रंग के जल से भरा यह ताल ऊँची-नीची पर्वतमालाओं तथा लहलहाते सीढ़ीदार खेतों से घिरा हुआ है।
  • इस ताल में सफेद कमल पुष्प भी खिलते हैं। यहाँ प्रतिवर्ष झूला मेला आयोजित किया जाता है।

कुमाऊँ के अन्य प्रमुख ताल

झील/ताल स्थिति एवं महत्त्वपूर्ण तथ्य
गिरि ताल उधमसिंह नगर (काशीपुर)
द्रोण ताल उधमसिंह नगर (काशीपुर के निकट)
सुकुण्डा ताल बागेश्वर
झिलमिल ताल चम्पावत (टनकपुर के निकट)
सूखा ताल, मलवा ताल, सड़िया ताल, हरीश ताल नैनीताल

गढ़वाल मण्डल की झीलें/ताल एवं कुण्ड

गढ़वाल मण्डल की सर्वाधिक झीलें/ताल चमोली जिले में पाई जाती हैं। गढ़वाल मण्डल की प्रमुख झीलें व ताल निम्नलिखित हैं-

गाँधी ताल/चौराबाड़ी ताल (शरवदी ताल)

अवस्थिति - केदारनाथ, रुद्रप्रयाग
इस ताल में वर्ष 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की अस्थियों का विसर्जन किया गया था। अतः इस ताल का नाम गाँधीताल अथवा गाँधी सरोवर पड़ा।
चौराबाड़ी ताल से केदारनाथ मन्दिर की दूरी मात्र 1 किमी है। केदारनाथ में होने वाली त्रासदी का मुख्य कारण यह ताल ही था।

रूपकुण्ड

  • अवस्थिति - बेदनी बुग्याल के समीप, चमोली
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 5029 मी
  • इस कुण्ड से नन्दाघुंघटी व त्रिशूली पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं।
  • कुछ किंवदन्तियों के अनुसार, रूपकुण्ड का महत्त्व यह है कि यहाँ से 600 ई. पूर्व के राजा यशधवल और रानी बल्या के कंकाल मिले हैं।
  • इस कारण इसे कंकाली ताल या रहस्यमयी ताल भी कहा जाता है।

होमकुण्ड

अवस्थिति - रूपकुण्ड से लगभग 17 किमी आगे
समुद्र तल से ऊँचाई - 4,000 मी
एक मान्यता के अनुसार इस ताल के किनारे स्थित चबूतरे पर नन्दादेवी का डोला रखा गया था।
इसी स्थान से प्रत्येक 12 वर्ष के पश्चात् नन्दा देवी राजजात यात्रा में चार सिंहों वाला मेढ़ा (चौसिंग्या खाडू) नेतृत्व करता है।

देवरिया ताल

  • अवस्थिति - ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 3,000 मी
  • लम्बाई - 1.5 किमी
  • अगस्त-सितम्बर में इस ताल के आस-पास कई प्रकार के पुष्प खिलते हैं, जिनसे इस ताल की सुन्दरता और भी बढ़ जाती है।
  • पुष्प खिलने के समय चौखम्बा हिमशिखर अत्यन्त सुन्दर दिखाई देता है।

वासुकी ताल

  • अवस्थिति - केदारनाथ से लगभग 8 किमी दूर
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 4,150 मी
  • इस ताल का जल लाल रंग का है।
  • इस ताल को वासुकि/वासुकी नाग के लहूलुहान होने की कथा से जोड़ा जाता है।
  • यह ताल नीले रंग के कमल के लिए प्रसिद्ध है।

डोडी ताल

अवस्थिति - गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर
समुद्र तल से ऊँचाई - 3,657 मी
ठण्डे पानी तथा रंगीन मछलियों के लिए प्रसिद्ध 6 कोनों वाला यह ताल भोजपत्रों के वृक्षों से घिरा हुआ है।
भागीरथी की सहायक असौ नदी यहीं से निकलती है।

सतोपन्थ ताल

  • अवस्थिति - बद्रीनाथ से लगभग 21 किमी आगे
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 1,334 मी
  • परिधि - 2 मील
  • निकट अवस्थित स्थल - सूर्यकुण्ड व चन्द्रकुण्ड ताल
  • ऐसी मान्यता है कि इस ताल के पास स्थित स्वर्गारोहिणी शिखर से पाण्डव स्वर्ग गए थे।
  • अलकनन्दा नदी इसी ताल से निकलती है।

नचिकेता ताल

  • अवस्थिति - उत्तरकाशी जिले में नगरीय क्षेत्र से लगभग 32 किमी दूर
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 2453 मी
  • इसके किनारे पर एक छोटा-सा मन्दिर भी स्थित है।
  • नचिकेता ताल का नाम महर्षि उद्दालक के पुत्र नचिकेता के नाम पर रखा गया है।
  • यहाँ चौरंगी खाल में लोक निर्माण विभाग का विश्राम गृह भी अवस्थित है।

केदार ताल

अवस्थिति - उत्तरकाशी में गंगोत्री से 20 किमी की दूरी पर (थलैयासागर पर्वत श्रृंखला)
समुद्र तल से ऊँचाई - 4,750 मी
थलैयासागर, जोगिन, भृगुपन्थ आदि पर्वतों के पर्वतारोहण के लिए झील के समीप कैम्प लगाए जाते हैं।

लोकपाल (हेमकुण्ड)

इस कुण्ड के किनारे पर सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने तपस्या की थी।
यहाँ पर एक लक्ष्मण मन्दिर तथा एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा अवस्थित है।
यह कुण्ड सात हिमाच्छादित शिखरों से घिरा हुआ है।

बेनी ताल

  • अवस्थिति - चमोली में कर्णप्रयाग से नन्दप्रयाग की ओर लगभग 30 किमी और चमोली आदिबद्री से 5 किमी दूरी पर
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 3,000 मी
  • लम्बाई - 320 मी
  • चौड़ाई - 150 मी
  • निकट अवस्थित स्थल - नन्दादेवी मन्दिर

मंसूर ताल

  • अवस्थिति - टिहरी जिले की सीमा पर खतलिंग ग्लेशियर के ठीक सामने
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 5,029 मी
  • परिधि - 3 किमी
  • इस ताल के पूर्वी छोर पर केदारनाथ का ट्रैकिंग रास्ता है।
  • भिलंगना नदी की सहायक नदी दूधगंगा का उद्गम मंसूर ताल से होता है।
  • यहाँ पर्यटकों को 'राजहंस' भी देखने को मिलते हैं।

सहस्त्र ताल

  • अवस्थिति - टिहरी गढ़वाल
  • समुद्र तल से ऊँचाई - 1,530 मी
  • सहस्त्र ताल अनेक तालों का समूह है।
  • ये ताल चट्टानों व हिमखण्डों के खिसकने से बनते-बिगड़ते रहते हैं।
  • सहस्त्र ताल गढ़वाल क्षेत्र का सबसे बड़ा और गहरा ताल है।

गढ़वाल क्षेत्र के अन्य प्रमुख ताल

ताल/झील स्थिति एवं वर्णन
महासर ताल टिहरी गढ़वाल (सहस्त्रताल के समीप)
भराड़सर ताल उत्तरकाशी
अप्सरा ताल टिहरी के पास बूढ़ा केदार में
लिंगा ताल चमोली (फूलों की घाटी के मध्य में)
मातृका ताल लिंगाताल से उत्तर की ओर
नरसिंह ताल चमोली, मातृकाताल से आगे
सिद्ध ताल चमोली, नरसिंहताल से 20 किमी की ऊँचाई पर
यम ताल सहस्त्रताल के समीप
भेंकल ताल रुद्रप्रयाग जिले के बधाण के समीप (आकार अण्डे के समान)
बयाँ ताल उत्तरकाशी (पानी अत्यधिक गर्म)
खिड़ा ताल उत्तरकाशी के हुरी गाँव में
काणा ताल टिहरी (इस ताल में सदैव जल नहीं रहता है, इसलिए इसे काणा (अन्धा) ताल कहा जाता है।)
दुग्ध ताल पौड़ी गढ़वाल (दूधातोली में)
बधाणी ताल रुद्रप्रयाग (जखोली ब्लॉक)
चन्दबाड़ी ताल देहरादून (चन्द्रभागा नदी का उद्गम)
काँसरो ताल देहरादून (रायवाला के पास)
विष्णु ताल चमोली (बद्रीनाथ के निकट)
झल ताल सुखताल के निकट
काकभुशुण्डी ताल हाथी पर्वत, जोशीमठ
फाचकण्डी बयां ताल उत्तरकाशी
वसुधारा ताल चमोली (हिमनद झील)

उत्तराखण्ड में स्थित ठण्डे जल के प्रमुख कुण्ड

अवस्थित प्रमुख कुण्ड
बद्रीनाथ नारद, त्रिकोण, मानुषी, सतोपन्थ, ब्रह्म व गौरीकुण्ड
गोपेश्वर के निकट वैतरणी कुण्ड
सतोपन्थ के निकट सोम, विष्णु, सूर्य व चन्द्रकुण्ड
चमोली हेम, होम, रूप, नन्दी, नन्दा, भाँप, परी, बेदिनी, शाण्डिल्य व ऋषि आदि कुण्ड
उत्तरकाशी सप्त, रुद्र व देवकुण्ड
गंगोत्री ब्रह्म, विष्णु, सूर्य व गौरी
टिहरी ब्रह्म, वशिष्ट, नरसिंह कुण्ड
केदारनाथ के निकट रेतस, हंस, ईषाण, उदक, अमृत व हवनकुण्ड
तुंगनाथ सरस्वती कुण्ड
त्रिजुगीनारायण सरस्वती, नाग व ब्रह्मकुण्ड
रुद्रप्रयाग गौरी व नन्दकुण्ड
पिथौरागढ़ ब्रह्म, सूर्य, नन्दा, पार्वती, मैसर, कटोज, थामरी, हरचन्द व बालचन्द

उत्तराखण्ड में स्थित गर्म जल के प्रमुख कुण्ड

अवस्थिति प्रमुख कुण्ड
गौरीकुण्ड के समीप भौरी अमोला कुण्ड
उत्तरकाशी गंगानी (गन्धक युक्त)
यमुनोत्री (उत्तरकाशी) सूर्यकुण्ड
बद्रीनाथ (चमोली) तप्तकुण्ड
तपोवन (चमोली) भापकुण्ड व सलधार
पिथौरागढ़ मदकोट कुण्ड

उत्तराखण्ड के प्रमुख जलप्रपात

जलप्रपात स्थिति
कैम्पटी फॉल • मसूरी (टिहरी) से लगभग 15 किमी दूर यमुनोत्री मार्ग पर
सहस्त्रधारा • देहरादून से लगभग 14 किमी दूर बाल्दी नदी के पास, नाम के अनुरूप यहाँ हजारों झरने हैं, जिनमें से एक झरना गन्धक युक्त जल का है।
मुनस्यारी प्रपात • पिथौरागढ़ से लगभग 127 किमी दूर
वसुन्धरा या वसुधारा प्रपात • माणा गाँव (चमोली) से लगभग 5 किमी पश्चिम में
• यहाँ लगभग 121 मी की ऊँचाई से जल गिरता है।
टाइगर फॉल • चकराता के पास (देहरादून)
• यहाँ 50 मी की ऊँचाई से जल गिरता है।
भट्ठा एवं हार्डी जलप्रपात • मसूरी (देहरादून)
विरथी जलप्रपात • मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
भुरमुनी जलप्रपात • पिथौरागढ़ मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर
भेलछड़ा जलप्रपात • पिथौरागढ़ जिले में नेपाल बॉर्डर के निकट
कॉर्बेट जलप्रपात • नैनीताल में रामनगर से 25 किमी की दूरी पर
गरुड़चट्टी प्रपात • नीलकण्ठ के रास्ते में पौड़ी में
खराड़ी जलप्रपात • उत्तरकाशी में गंगानी से 2 किमी की दूरी पर
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।