उत्तराखण्ड में पशुपालन

उत्तराखण्ड में पशुपालन

उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन और डेयरी विकास का आधारभूत महत्व है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड और VDO/VPDO जैसी सभी राज्य स्तरीय परीक्षाओं में यहाँ के पशुधन आंकड़ों और सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। अपनी तैयारी को सटीक दिशा देने के लिए यह लेख आपके लिए एक रामबाण सिद्ध होगा।
uttarakhand-pashupalan

इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • पशुधन और डेयरी विकास: 20वीं पशुसंगणना के नवीनतम आंकड़े, प्रदेश में 'आँचल' ब्रांड की भूमिका और ऋषिकेश व पंतनगर जैसे प्रमुख पशुधन संस्थानों की विस्तृत जानकारी।
  • प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं: गंगा गाय महिला डेयरी योजना, नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन और मिनी डेयरी जैसी योजनाओं का विश्लेषण, जो महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही हैं।
  • भेड़, रेशम एवं मत्स्य पालन: ऑस्ट्रेलिया से आयातित मेरिनो भेड़, रेशम के विभिन्न प्रकार (मलवरी, टसर) और मत्स्य नीति लागू करने वाले देश के प्रथम राज्य उत्तराखण्ड की प्रमुख मत्स्य योजनाओं का विवरण।
  • नवाचार और बुनियादी ढांचा: राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित चारा बैंक, अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केन्द्र और ट्राउट हैचरी जैसे आधुनिक केंद्रों की महत्वपूर्ण जानकारी।
20वीं पशुसंगणना (2019) के अनुसार, उत्तराखण्ड में कुल पशुधन संख्या 44.27 लाख और कुक्कुटों की कुल संख्या 50.19 लाख है।

पशुधन विकास

  • पशुधन विकास बोर्ड प्रशिक्षण केन्द्र - ऋषिकेश
  • पशुधन विकास से सम्बन्धित संस्थान - उत्तराखण्ड पशुधन विकास बोर्ड देहरादून, पशु कल्याण बोर्ड एवं पशु चिकित्सा परिषद्
  • गौवंश संरक्षण - गौ-सेवा आयोग द्वारा
  • अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केन्द्र - श्यामपुर, देहरादून (ISO 9001) 2015 मानक प्राप्त)
  • पशुओं से सम्बन्धित रोगों की जाँच एवं उनके निदान हेतु पौड़ी व नैनीताल में दो प्रयोगशालाएँ संचालित हैं।
  • चारा विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत पशुलोक एवं पंतनगर में दो चारा बैंकों की स्थापना की गई है।
  • अभिनव जवाहर योजना के अन्तर्गत 18 वन पंचायिता में चारा उत्पादन के लिए केन्द्र स्थापित किए गए है।
  • मौन पालन शहद उत्पादन व परागण हेतु संचालित कार्यक्रम।

डेयरी विकास

  • प्रथम दुग्ध संघ - हल्द्वानी (नैनीताल, 1949)
  • मिल्क पाउडर प्लाण्ट - उधमसिंह नगर
  • डेयरी विकास संगठन - उत्तराखण्ड सहकारी डेयरी फेडरेशन (प्रदेश), दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (जिला), दुग्ध समितियों (ग्राम)।
  • राज्य में आँचल ब्राण्ड से दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की पूर्ति की जाती है।
  • राज्य में उत्पादों के भण्डारण हेतु लगभग 25 दुग्ध अवशीतलन केन्द्रों की स्थापना की गई है।

डेयरी विकास हेतु कार्यक्रम

योजना/कार्यक्रम विवरण
नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन यह योजना पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग भारत सरकार द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देहरादून व हरिद्वार में अप्रैल, 2021 से चलाई जा रही है। इसके अन्तर्गत गौवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं को शत-प्रतिशत UID Ear टैग द्वारा Information Network for Animal Productivity and Health में पंजीकरण किया जाना है।
स्वयं सहायता समूह वर्ष 2001-02 में शुरू यह समूह स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। इसमें महिलाओं की भी भागीदारी होती है।
समन्वित डेयरी विकास परियोजना वर्ष 2002-03 में शुरू। हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर में आधुनिक दुग्धशालाएँ स्थापित
गंगा गाय महिला डेयरी योजना वर्ष 2017 से संचालित। दुग्ध सहकारी समितियों की महिला सदस्यों को उच्च नस्ल की दुधारू गाय उपलब्ध कराई जाती है।
महिला डेयरी विकास परियोजना इस योजनान्तर्गत 2024-25 में ₹ 402.13 लाख की धनराशि प्रदान की गई है।
मिनी डेयरी योजना दुधारू पशुओं को क्रय करने हेतु सरकार द्वारा 50% अनुदान।

भेड़ एवं ऊन तथा रेशम विकास

  • उत्तराखण्ड में भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड का गठन किया गया है।
  • इस बोर्ड द्वारा वर्ष 2004-05 में एकीकृत ऊन विकास कार्यक्रम शुरू किया गया है।
  • इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु प्रदेश में 12 भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र तथा 113 भेड़ एवं ऊन प्रसार केन्द्रों की स्थापना हुई।
  • ऑस्ट्रेलिया से मेरिनो भेड़ का आयात, राज्य में भेड़ प्रजाति के सुधार के लिए किया गया है।
  • राज्य के पौड़ी में सघन भेड़ विकास परियोजना तथा मुनिकीरेती (टिहरी गढ़वाल) में ऊन श्रेणीकरण और क्रय-विक्रय केन्द्र हैं।
  • अंगोरा बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र चमोली, टिहरी, अल्मोड़ा एवं चम्पावत में हैं।
  • रेशम विकास के लिए उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन लिमिटेड की स्थापना वर्ष 2002 में की गई थी।
  • राज्य में उत्पादित अन्य रेशम के प्रकार मलवरी, टसर, मूँगा तथा ऐरी हैं।

शूकर तथा कुक्कुट विकास

राजकीय शूकर प्रक्षेत्र - पशुलोक श्यामपुर (देहरादून), काशीपुर (उधमसिंह नगर)
राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र - पशुलोक (ऋषिकेश), हवालबाग (अल्मोड़ा), विण (पिथौरागढ़)

मत्स्यपालन

  • मत्स्य नीति लागू करने वाला पहला राज्य - उत्तराखण्ड (वर्ष 2002)
  • मछुआरों के लिए नेशनल फिशरमैन वेलफेयर फण्ड बनाया गया है। मत्स्य विकास केन्द्र से मत्स्य प्रजनन, बीज उत्पादन तथा प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों की जानकारी मिलती है।
  • राज्य में तलवार फार्म बायोफ्लोक मछली पालन हेतु नवाचार एवं इनक्यूवेशन सेण्टर की तरह कार्य कर रहा है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, पिथौरागढ़ (गाँव बूंग) में ट्राउट हैचरी की स्थापना के कार्य प्रारम्भ किए गए हैं।
  • मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अन्तर्गत राज्य में प्रथम बार महिलाओं हेतु 60% अनुदान की व्यवस्था की गई है।
  • राज्य में समेकित सहकारी विकास योजना का विस्तारीकरण करते हुए उधमसिंह नगर में योजना प्रारम्भ की गई है, जिसमें तालाबों का सुधार कार्य किया जा रहा है।
उत्तराखण्ड की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की शानदार और सटीक तैयारी के लिए हमारी वेबसाइट https://www.uttarakhandgk.com/ पर नियमित रूप से विजिट करें। अपनी तैयारी को और मजबूत बनाने के लिए वेबसाइट का नाम हमेशा याद रखें - WWW.UTTARAKHANDGK.COM!
Tags:

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।