उत्तराखण्ड पर्यटन नीति, 2023
उत्तराखण्ड राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास में पर्यटन का एक विशेष एवं महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए हाल ही में लाई गई "उत्तराखण्ड पर्यटन नीति 2023" और सरकार के विभिन्न पर्यटन प्रयास परीक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। यह लेख आगामी सभी उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard आदि की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगा।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- मार्च 2023 में लागू की गई नई 'उत्तराखण्ड पर्यटन नीति' के मुख्य प्रावधान, निवेश की सीमाएँ (न्यूनतम ₹5 करोड़) और सरकार द्वारा दिए जाने वाले 50% तक के अनुदान की जानकारी।
- पर्यटन के विकास हेतु प्रदेश के शहरों का तीन मुख्य श्रेणियों (श्रेणी-ए, बी, और सी) में भौगोलिक वर्गीकरण।
- वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, होम स्टे योजना और चारधाम यात्रा के बायोमैट्रिक पंजीकरण से जुड़े परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य।
- राज्य पर्यटन विकास के लिए अपनाए गए 'सिंगापुर मॉडल' और राज्य में सर्वाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने वाले प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों की विस्तृत जानकारी।
मार्च, 2023 में उत्तराखण्ड में पर्यटन निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने नई पर्यटन नीति को मंजूरी दी है।
इसमें पर्यटन क्षेत्र में निवेश प्रोत्साहन का लाभ लेने के लिए प्रोजेक्ट लागत की न्यूनतम सीमा ₹ 5 करोड़ की गई है।
प्रदेश की नई पर्यटन नीति से निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए पर्यटन स्थल विकसित किए जाएँगे।
पर्यटन निवेश हेतु बनाई गई नीति के अन्तर्गत प्रदेश के शहरों को तीन श्रेणियों में अलग किया गया है। इनमें पर्यटन की दृष्टि से अनछुए स्थलों पर निवेश करने पर सरकार की ओर से 50% तक
अनुदान दिया जाएगा।
इन शहरों की तीन श्रेणियाँ निम्नलिखित हैं-
- श्रेणी-ए : हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर, देहरादून, रानीखेत, अल्मोड़ा तहसील।
- श्रेणी-बी : जिला अल्मोड़ा के शेष क्षेत्र, देहरादून जिले की कालसी, चकराता और त्यूनी तहसील, बागेश्वर का गरुड़, पौड़ी जिले का कोटद्वार, लैन्सडाउन, यमकेश्वर और धूमाकोट तहसील, टिहरी गढ़वाल की धनौल्टी और नरेन्द्रनगर तहसील।
- श्रेणी-सी : उत्तरकाशी, चमोली, चम्पावत, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर जिले का शेष क्षेत्र, पौड़ी और टिहरी जिले के वे शेष क्षेत्र, जो श्रेणी-बी में शामिल नहीं हैं।
उत्तराखण्ड सरकार के पर्यटन से सम्बन्धित प्रयास
- उत्तराखण्ड सरकार ने पर्यटन को थ्रस्ट उद्योग का दर्जा दिया है।
- उत्तराखण्ड में पर्यटन के विकास के लिए सिंगापुर मॉडल को अपनाया गया है।
- राज्य को अक्टूबर, 2001 में कॉनफेडरेशन ऑफ इण्डियन इण्डस्ट्री द्वारा 'पार्टनर स्टेट' का दर्जा दिया गया है।
- राज्य में पर्यटन में लोगों की सहभागिता को बढ़ाने के उद्देश्य से 1 जून, 2002 से वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना चलाई जा रही है।
- राज्य में वर्ष 2014-15 से चारधाम यात्रियों के लिए बायोमैट्रिक
- पंजीकरण प्रारम्भ किया गया है।
- उत्तराखण्ड राज्य को देवभूमि के नाम से जाना जाता है।
- राज्य में सर्वे ऑफ इण्डिया परिसर देहरादून में 'पार्क ऑफ द ग्रेट आर्क' विकसित किया जा रहा है।
- राज्य में अक्टूबर, 2015 से दूरदराज के गाँवों/कस्बों में पर्यटकों को ठहराने को लेकर होम स्टे योजना प्रारम्भ की गई है।
- राज्य में सर्वाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने वाला राष्ट्रीय उद्यान, 2015-16 के अनुसार जिम कॉर्बेट है, इसके पश्चात् क्रमशः राजाजी व फूलों की घाटी है।
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