उत्तराखण्ड में परिवहन व्यवस्था

उत्तराखण्ड में परिवहन व्यवस्था

"उत्तराखण्ड में परिवहन व्यवस्था (Transportation in Uttarakhand)" राज्य के भूगोल और अर्थव्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विषय UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड और अन्य सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम राज्य के सड़क, रेल, वायु और जल परिवहन तंत्र के ऐतिहासिक तथ्यों और नवीनतम आंकड़ों का विस्तार से अध्ययन करेंगे जो परीक्षा में आपके अंक पक्के करेंगे।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग: उत्तराखण्ड में सड़क परिवहन का इतिहास, राज्य से गुजरने वाले 26 प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways), और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से जुड़ी परीक्षा उपयोगी जानकारी।
  • रेलवे नेटवर्क का विस्तार: राज्य में रेल नेटवर्क का ऐतिहासिक विकास, प्रमुख रेलवे लाइनें, और बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तथा चार धाम रेल नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
  • वायु एवं जल परिवहन: जौलीग्रांट, नैनी-सैनी जैसे प्रमुख हवाई अड्डे, पवन हंस हेलीकॉप्टर सेवाएं, और राज्य के प्रसिद्ध रज्जू मार्ग (Ropeways) की रोचक जानकारी।
  • प्रमुख योजनाएं व परिवहन विभाग: उत्तराखण्ड परिवहन निगम की स्थापना और केंद्र व राज्य सरकार की प्रमुख योजनाएं जैसे- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं चार धाम ऑल वैदर रोड परियोजना के महत्वपूर्ण बिंदु।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, लोक निर्माण विभाग ने मार्च, 2024 तक 33047 किमी वाहन चलने योग्य सड़कों का निर्माण किया है।
राज्य के गठन के समय सड़कों की लम्बाई लगभग 10,000 किमी थी।
राज्य में परिवहन को मुख्य रूप से चार भागों सड़क, रेल, वायु व जल परिवहन में बाँटा गया है। ये निम्न प्रकार हैं-

उत्तराखण्ड में सड़क परिवहन

  • राज्य के कुल यातायात में सड़क परिवहन का योगदान 85% है।
  • पहली इलेक्ट्रॉनिक बस देहरादून से मसूरी के बीच (9 अक्टूबर, 2018) चलाई गई थी।
  • गाड़ी सड़क आन्दोलन वर्ष 1938-39 गढ़वाल में हुआ था।
  • सर्वाधिक संख्या एवं सड़क लम्बाई वाला मण्डल गढ़वाल मण्डल है।
  • काठगोदाम को नैनीताल से 1882 ई. में सड़क मार्ग से जोड़ा गया था, जबकि लैंसडाउन से कोटद्वार को वर्ष 1909 में जोड़ा गया।
  • ब्रिटिश कमिश्नर विलियम ट्रेल ने हरिद्वार से केदारनाथ व बद्रीनाथ राजमार्गों का निर्माण करवाया था।
  • हिमालयन हाइवे ने वर्ष 2005 से देहरादून के त्यूनी से लोहाघाट तक 659 किमी का सड़क निर्माण कार्य प्रारम्भ किया था।

उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग

  • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण केन्द्र सरकार की प्रमुख एजेन्सी है, जिसका कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण, उन्नयन तथा प्रबन्धन का कार्य देखना है। उत्तराखण्ड में कुल 26 राष्ट्रीय राजमार्ग हैं।
  • यहाँ राष्ट्रीय राजमार्गों की लम्बाई 3595 किमी है।
  • राज्य के 26 राष्ट्रीय राजमार्ग इस प्रकार हैं- NH-7, NH-9, NH-30, NH-34, NH-107, NH-107A, NH-107B, NH-109, NH-109D, NH-109K, NH-134, NH-134A, NH-307, NH-309, NH-309A, NH-309B, NH-334, NH-334A, NH-344, NH-344BG, NH-507, NH-534, NH-707, NH-707A, NH-731K, NH-734

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे (NH-72A)

यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की परियोजना है, जो दिल्ली को सहारनपुर के रास्ते देहरादून से जोड़ता है।
इसकी कुल लम्बाई लगभग 210 किमी है। यह 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसके निर्माण के बाद दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय कम हो जाएगा।

राज्य उच्च पथ (प्रादेशिक राजमार्ग)
राज्य में स्थित विभिन्न नगरों, जिला मुख्यालयों व प्रमुख स्थानों को एक-दूसरे से जोड़ने वाले मार्ग को राज्य उच्च पथ कहते हैं। इसका निर्माण तथा अनुरक्षण राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, राज्य उच्च पथों की लम्बाई 5,689 किमी है।

सम्पर्क मार्ग
राज्य में स्थित विभिन्न नगरों के निकटवर्ती ग्रामों को एक-दूसरे से जोड़ने वाले मार्ग को सम्पर्क मार्ग कहते हैं। इन मार्गों का निर्माण व अनुरक्षण स्थानीय निकायों द्वारा किया जाता है।
रामनगर को कोटद्वार (पौड़ी) से जोड़ने वाला कण्डी मार्ग (माउण्टेन रोड) को अंग्रेजों ने बनवाया था। यह मार्ग कॉर्बेट नेशनल पार्क से गुजरता है।

उत्तराखण्ड में परिवहन विभाग एवं ट्रांसपोर्ट

  • उत्तराखण्ड परिवहन निगम की स्थापना - 30 अक्टूबर, 2003
  • निगम के तीन डिवीजनल कार्यालय - देहरादून, नैनीताल तथा टनकपुर
  • हिल मोटर ट्रांसपोर्ट कम्पनी की स्थापना - वर्ष 1920
  • राज्य की पहली ट्रांसपोर्ट कम्पनी - ललिता प्रसाद टम्टा
  • वाहन के नम्बर प्लेटों पर UK सीरीज की शुरुआत - 1 नवम्बर, 2007 से
  • कुमाऊँ क्षेत्र में काठगोदाम से नैनीताल के बीच मोटर यातायात की शुरुआत वर्ष 1915 से हुई और वर्ष 1920 में काठगोदाम से अल्मोड़ा के बीच हुई।

परिवहन सम्बन्धी संस्थाएँ

संस्था स्थापना कार्यालय मुख्यालय
कुमाऊँ मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड वर्ष 1939 टनकपुर व रामनगर काठगोदाम
गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन वर्ष 1941 ऋषिकेश कोटद्वार (पौड़ी)
टिहरी गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड वर्ष 1950 - टिहरी
गढ़वाल मोटर यूजर्स को-ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसाइटी लिमिटेड वर्ष 1958 - रामनगर

सड़क परिवहन से सम्बन्धित राज्य व केन्द्र सरकार की प्रमुख योजनाएँ/कार्यक्रम

सड़क परिवहन से सम्बन्धित राज्य व केन्द्र सरकार की प्रमुख योजनाएँ एवं कार्यक्रम निम्नलिखित हैं-

राष्ट्रीय राजमार्ग विकास योजना

  • शुरुआत - 24 अक्टूबर, 1998
  • इसके अन्तर्गत देश के महानगरों को जोड़ने का कार्य किया गया है, जिसमें स्वर्णिम चतुर्भुज योजना शामिल है, जो दिल्ली, चेन्नई, मुम्बई और कोलकाता महानगरों को जोड़ती है।
  • राज्य में प्रदूषण मुक्त सिटी बसों का संचालन हरिद्वार, नैनीताल तथा देहरादून में किया जा रहा है।

प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना

  • शुरुआत - 25 दिसम्बर, 2000
  • इसके अन्तर्गत मैदानी भागों में 500 लोगों के अधिवासी क्षेत्रों, जनजातीय एवं पहाड़ी क्षेत्रों में 250 लोगों के अधिवासित क्षेत्रों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है।

चार धाम ऑल वैदर रोड परियोजना

  • शुरुआत - 27 दिसम्बर, 2016
  • इसके अन्तर्गत राज्य में चारों धामों के जोड़ने वाले राजमार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाना है।

उत्तराखण्ड में रेल परिवहन

  • राज्य के रेल लाइन वाले जिले - 6 (हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल पौड़ी, उधमसिंह नगर, चम्पावत)
  • सर्वाधिक रेल ट्रैक वाला जिला - हरिद्वार
  • सबसे कम रेल ट्रैक वाला जिला - पौड़ी
  • राज्य में गंगा नहर निर्माण के समय रुड़की क्षेत्र में मिट्टी को ढोने के लिए दो डिब्बों वाली रेलगाड़ी का प्रयोग हुआ, जिसमें थॉमसन लोकोमोटिव इंजन का प्रयोग किया गया था।
  • 24 अप्रैल, 1884 को काठगोदाम रेलवे स्टेशन में लखनऊ से पहली रेलगाड़ी आई थी। काठगोदाम को मई, 1994 में बड़ी लाइन सेवा से जोड़ा गया था।
  • 1 जनवरी, 1896 को लक्सर जंक्शन को हरिद्वार से जोड़ा गया था।

राज्य के दो प्रमुख रेल पथ निम्न हैं-
  1. पहला रेलवे पथ उत्तर रेलवे की बड़ी लाइन है, जो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से हरिद्वार के कलसिया, लक्सर तथा रुड़की होते हुए पुनः उत्तर प्रदेश के सहारनपुर को जाती है।
  2. दूसरा रेलवे पथ भी उत्तर रेलवे की बड़ी लाइन है, जो लक्सर, हरिद्वार और देहरादून से गुजरती है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, राज्य में कुल रेलवे लाइनों की लम्बाई 344.91 किमी है, जिसमें 283.76 किमी बड़ी लाइन तथा 61.15 किमी छोटी लाइन है।
  • मार्च, 1900 में स्थापित देहरादून रेलवे स्टेशन उत्तराखण्ड में उत्तर रेलवे का आखिरी स्टेशन है।
  • वर्ष 1907 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से काशीपुर होते हुए रामनगर तक रेलवे लाइन का निर्माण किया गया था।
  • कुमाऊँ क्षेत्र उत्तर-पूर्वी रेलवे जोन के इज्जतनगर डिवीजन के अन्तर्गत आता है, जबकि गढ़वाल का क्षेत्र उत्तर-रेलवे जोन के मुरादाबाद डिवीजन के अन्तर्गत आता है।
  • काठगोदाम (नैनीताल) और कोटद्वार (पौड़ी) बड़ी रेलवे लाइनों के प्रमुख टर्मिनल स्टेशन हैं।
  • टनकपुर (चम्पावत) छोटी रेलवे लाइन का टर्मिनल स्टेशन है।
  • राजाजी नेशनल पार्क के मध्य से हरिद्वार-देहरादून रेलमार्ग गुजरता है। राज्य में प्रस्तावित मेट्रो रेल पथ हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून है।
  • वर्ष 2000 के मॉडल रेलवे स्टेशन के अन्तर्गत देहरादून रेलवे स्टेशन को साफ-सफाई व अच्छी यात्रा सुविधाओं के लिए सितम्बर, 2003 में ISO का दर्जा प्रदान किया गया। यह दर्जा पाने वाला यह राज्य का पहला स्टेशन है।
  • वर्ष 2018 में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का सर्वे कार्य पूर्ण हुआ और परियोजना का कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा प्रारम्भ किया गया।
  • इसके अन्तर्गत ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 125 किमी की रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 17 सुरंगें तथा 12 रेलवे स्टेशन बनाए जाएँगे।

रेलवे : महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • दून-काठगोदाम के मध्य अगस्त, 2018 में नई नैनी-दून एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत की गई।
  • दिल्ली से टनकपुर के मध्य चलने वाली रेलगाड़ी जनशताब्दी एक्सप्रेस का नाम बदलकर पूर्णागिरी जनशताब्दी एक्सप्रेस रखा गया।
  • कोटद्वार से दिल्ली के मध्य चलने वाली रेलगाड़ी जनशताब्दी का नाम बदलकर सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस रखा गया।
  • वर्ष 2012 में हरिद्वार से रामनगर के बीच रेलगाड़ी सेवा शुरू हुई।
  • राज्य में चार धाम रेल परियोजना प्रस्तावित है। इसे कुल 327 किमी लम्बाई वाली चार अलग-अलग रेल लाइनों में शामिल किया गया है।

उत्तराखण्ड में चलने वाली प्रमुख रेलगाड़ियाँ

ट्रेन का नाम मार्ग
कुम्भ एक्सप्रेस हरिद्वार से हावड़ा
उत्तरांचल एक्सप्रेस देहरादून से ओखा
सम्पूर्ण क्रान्ति एक्सप्रेस दिल्ली से काठगोदाम
संगम एक्सप्रेस इलाहाबाद से देहरादून
मसूरी एक्सप्रेस देहरादून से दिल्ली
नन्दादेवी एक्सप्रेस देहरादून से कोटा
रानीखेत एक्सप्रेस काठगोदाम से जैसलमेर
उपासना एक्सप्रेस देहरादून से हावड़ा

उत्तराखण्ड में वायु परिवहन

  • देहरादून हवाई अड्डे का निर्माण - वर्ष 1974
  • नैनी-सैनी (पिथौरागढ़) हवाई अड्डे का निर्माण - वर्ष 1991
  • केदारनाथ के लिए सर्वप्रथम पवन हंस कम्पनी द्वारा हेलीकॉप्टर सेवा 16 मई, 2003 शुरू की गई।
  • सहस्रधारा बाईपास देहरादून में हेली टूरिज्म के लिए हैंगर व हेलीपैड हैं।
  • गौचर (चमोली) में हेलीकॉप्टर सर्विस हेतु हैंगर का निर्माण किया गया है।
  • वर्ष 2007 में दून (जौलीग्राण्ट) हवाई अड्डे को बोईंग और एयर बस उतरने के लिए विस्तारित किया गया। वर्ष 2021 में यहाँ नया और बड़ा टर्मिनल भी बनाया गया है।
  • पन्तनगर हवाई अड्डे को कार्गो एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया गया है।
  • बाजपुर (उधमसिंह नगर) में छोटे विमानों के लिए एयरस्ट्रिप निर्माण प्रस्तावित है।
  • ऑपरेशन गगन शक्ति की शुरुआत वायु सेना ने वर्ष 2018 में चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी से की थी।
  • जैव ईंधन से उड़ने वाला भारत का पहला स्पाइसजेट Q400 दिल्ली से जौलीग्राण्ट (देहरादून) के बीच वर्ष 2018 में सफलतापूर्वक उड़ा था।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार राज्य में पाँच हवाई पट्टियाँ विद्यमान हैं।
  • राज्य के पाँचों हवाई अड्डों में सबसे बड़ा रनवे जौलीग्राण्ट तथा सबसे छोटा चिन्यालीसौड़ का है।

उत्तराखण्ड के प्रमुख हवाई अड्डे/हेलीपैड

प्रमुख हवाई अड्डा स्थान रनवे की लम्बाई एवं चौड़ाई
जौलीग्रान्ट हवाई अड्डा देहरादून 2140 मी एवं 45 मी
पन्तनगर (फूलबाग) ऊधमसिंह नगर 1372 मी एवं 30 मी
नैनी-सैनी पिथौरागढ़ 1568 मी एवं 30 मी
गोचर चमोली 1315 मी एवं 25 मी
चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी 1150 मी एवं 30 मी

उत्तराखण्ड में जल परिवहन

राज्य में प्रवाहित गंगा, यमुना तथा अन्य नदियों में नौकाओं के माध्यम से भी आवागमन का कार्य संचालित होता है।
जल परिवहन राज्य में टूरिज्म का भी साधन है। राज्य की नदियों में रिवर राफ्टिंग एवं कैनोइंग जैसे साहसिक खेल आयोजित किए जाते हैं।

रज्जू मार्ग
  • पहाड़ी क्षेत्रों में रज्जू मार्ग यातायात का प्रमुख साधन है। रज्जू मार्ग का विकास वहाँ किया जाता है जहाँ सड़क या रेलवे का विकास सम्भव नहीं है। यह तारों पर आधुनिक परिवहन का साधन है।

उत्तराखण्ड के प्रमुख रज्जू मार्ग-
  • नैनीताल रोपवे - नैनीताल शहर को स्नोव्यू से जोड़ता है।
  • जोशीमठ-आली रोपवे - वर्ष 1993 से संचालित
  • भीमताल रोपवे - वर्ष 2018 से प्रस्तावित
  • उत्तराखण्ड में केदारनाथ रज्जू मार्ग तथा देहरादून से मसूरी रज्जू मार्ग प्रस्तावित है।
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।