उत्तराखण्ड में नगर निकाय प्रणाली

उत्तराखण्ड में नगर निकाय प्रणाली

उत्तराखण्ड में नगर निकाय प्रणाली (Urban Local Bodies System) राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लेख में हम राज्य के नगर निगमों, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों से जुड़े सभी जरूरी तथ्यों को विस्तार से समझेंगे। यह विषय UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड जैसी सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहाँ से अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • उत्तराखण्ड में नगरीय स्वायत्त शासन का ऐतिहासिक आरम्भ (वर्ष 1916) और इसके मुख्य बिंदु।
  • राज्य के 9 नगर निगमों की सूची, उनके जनसंख्या मानक और 31 दिसम्बर 2021 को बने सबसे नए नगर निगम (श्रीनगर) के महत्वपूर्ण तथ्य।
  • राज्य की सबसे पुरानी नगरपालिका (मसूरी - 1842) और नगरपालिका परिषद् के अध्यक्ष व सदस्यों के निर्वाचन की प्रक्रिया।
  • नगर पंचायतों के गठन के नियम और उन 3 विशेष स्थानों (गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ) की रोचक जानकारी, जहाँ चुनाव की जगह सदस्य मनोनीत किये जाते हैं।
वर्ष 1916 से राज्य में नगरीय स्वायत्त शासन की शुरुआत मानी जाती है।

नगर निगम

नगर निगम के गठन के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में कम-से-कम 90,000 एवं मैदानी क्षेत्रों में 1,00,000 से अधिक जनसंख्या होनी चाहिए।
नगर निगम के प्रमुख महापौर या मेयर नगर का पहला नागरिक होता है।
उत्तराखण्ड राज्य में कुल 9 नगर निगम हैं, जो क्रमश: देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, कोटद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी, रुद्रपुर व श्रीनगर आदि नगरों में हैं। श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) को 31 दिसम्बर, 2021 को नगर निगम का दर्जा दिया गया।

नगरपालिका परिषद्

सबसे पुरानी नगरपालिका परिषद् मसूरी नगरपालिका (1842 ई.) है। ऐसे नगरीय क्षेत्र, जहाँ की जनसंख्या 50,000 से 1 लाख के बीच हो (मैदानी क्षेत्रों में) तथा पर्वतीय क्षेत्रों में 90,000 तक हो, वहाँ नगरपालिका परिषद् की स्थापना की जा सकती है।
नगरपालिका परिषद् के अध्यक्ष एवं सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा होता है।
इसके अध्यक्ष व सदस्यों का चुनाव 5 वर्षों के लिए किया जाता है।

नगर पंचायत

जिन नगरीय क्षेत्रों/कस्बों की जनसंख्या 5,000 से 50,000 तक होती है, वहाँ नगर पंचायत का गठन किया जा सकता है।
नगर पंचायत के अध्यक्ष एवं सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रीति द्वारा 5 वर्षों के लिए होता है।
उत्तराखण्ड राज्य की 3 नगर पंचायतों (गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ) में चुनाव नहीं होते, बल्कि सदस्य मनोनीत होते हैं।

उत्तराखण्ड में ब्लॉक

जिले ब्लॉक
पौड़ी गढ़वाल (15) पौड़ी, थलीसैंण, कोट, पाबो, कल्जीखाल, द्वारीखाल, यमकेश्वर, पोखड़ा, नोनीडाण्डा, खिरसू, एकेश्वर, जहरीखाल, दुगड्डा, वीरोंखाल, रिखणीखाल
अल्मोड़ा (11) भिकियासैंण, चौखुटिया, स्यालदे, ताड़ीखेत, सल्ट, द्वाराहाट, लमगड़ा, हवालबाग, ताकुला, धौलादेवी, भैंसियाछाना
टिहरी गढ़वाल (9) प्रतापनगर, नरेन्द्रनगर, जौनपुर, चम्बा, कीर्तिनगर, घनसाली, जाखणीधार, थौलधार, देवप्रयाग
चमोली (9) गैरसैंण, देवाल, थराली, नारायण बगड़, दसौली, घाट, कर्णप्रयाग, जोशीमठ, पोखरी
नैनीताल (8) रामनगर, हल्द्वानी, भीमताल, रामगढ़, कोटाबाग, धारी, बेतालघाट, ओखलकाण्डा
पिथौरागढ़ (8) पिथौरागढ़, कनालीछीना, गंगोलीहाट, मूनाकोट, मुनस्यारी, धारचूला, बेरीनाग, डीडीहाट
उधमसिंह नगर (7) जसपुर, खटीमा, सितारगंज, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर
उत्तरकाशी (6) मोरी, पुरोला, नौगाँव, डुण्डा, चिन्यालीसौड़, भटवाड़ी
देहरादून (6) कालसी, रायपुर, डोईवाला, चकराता, विकासनगर, सहसपुर
हरिद्वार (6) रुड़की, लक्सर, खानपुर, बहादराबाद, नारसन, भगवानपुर
चम्पावत (4) चम्पावत, पाटी, बाराकोट, लोहाघाट
बागेश्वर (3) बागेश्वर, कपकोट, गरुड़
रुद्रप्रयाग (3) अगस्त्यमुनि, जखोली, ऊखीमठ
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।