उत्तराखण्ड का नदी तन्त्र

उत्तराखण्ड का नदी तन्त्र

उत्तराखण्ड का भूगोल और यहाँ का नदी तन्त्र राज्य की किसी भी परीक्षा का सबसे अहम हिस्सा है। इस लेख में हमने 'उत्तराखण्ड के नदी तन्त्र' (विशेषकर गंगा, भागीरथी व अलकनंदा तन्त्र) को गहराई से कवर किया है। यह शानदार टॉपिक UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक उपयोगी है!
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • गंगा नदी तन्त्र का सम्पूर्ण विश्लेषण: भागीरथी और अलकनन्दा नदियों के उद्गम (गंगोत्री और सतोपन्थ हिमनद) से लेकर देवप्रयाग में उनके महासंगम तक का विस्तृत सफर।
  • प्रमुख उप-तन्त्र और सहायक नदियाँ: मन्दाकिनी (और उसकी प्रमुख सहायक नदियों व संगम स्थलों), पिण्डर, नन्दाकिनी और पश्चिमी धौलीगंगा के प्रवाह क्षेत्रों की सटीक और परीक्षा-उपयोगी जानकारी।
  • रामगंगा व कोसी नदी का विवरण: पश्चिमी और पूर्वी रामगंगा के साथ-साथ कुमाऊँ में 'धान का कटोरा' कहलाने वाली कोसी (कौशिकी) नदी घाटी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
  • परीक्षा उपयोगी रोचक तथ्य: नदियों के पौराणिक नाम, लम्बाई (जैसे भागीरथी की 205 किमी), उद्गम स्थल और 'सास-बहू' जैसी प्रसिद्ध संज्ञाओं से जुड़े सीधे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न।
उत्तराखण्ड में बहने वाली अधिकांश नदियों का प्रवाह दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में होता है।
राज्य के तीन प्रमुख नदी तन्त्र गंगा नदी प्रवाह तन्त्र, यमुना नदी प्रवाह तन्त्र एवं काली नदी प्रवाह तन्त्र हैं। इनका वर्णन निम्न प्रकार है-

गंगा नदी तन्त्र

  • उद्गम - गंगोत्री ग्लेशियर (भागीरथी नाम से)
  • उत्तराखण्ड में प्रवाह क्षेत्र - 96 किमी
  • देवप्रयाग में भागीरथी तथा अलकनन्दा के मिलन के पश्चात् इसे गंगा के नाम से जाना जाता है।
  • गंगा नदी में पौड़ी के व्यासघाट के निकट फुलचट्टी नामक स्थान पर बाईं ओर से नादगंगा (नयार) तथा आगे बढ़ने पर देहरादून के ऋषिकेश में दाईं ओर से चन्द्रभागा नदी मिलती है।
  • हरिद्वार जिले में गंगा नदी तन्त्र में रतमऊ एवं सोलानी नदियाँ मिलती हैं।
गंगा नदी तन्त्र के अन्तर्गत भागीरथी एवं अलकनन्दा उप-तन्त्र आते हैं, जिनका वर्णन निम्न प्रकार है-

भागीरथी उप-तन्त्र

  • उद्गम - गंगोत्री हिमनद (गोमुख)
  • गंगोत्री से देवप्रयाग तक लम्बाई - 205 किमी
  • सहायक नदियाँ - भिलंगना (खतलिंग ग्लेशियर से उद्गमित तथा सबसे बड़ी सहायक नदी), रुद्रगंगा (गंगोत्री में मिलन), जाह्नवी या जाड़गंगा, सियागंगा, मिलुनगंगा, असीगंगा तथा जटागंगा
  • गोमुख और गंगोत्री के बीच आकाश गंगा भागीरथी से मिलती है।
  • भागीरथी-अलकनन्दा नदियों को सास-बहू के नाम से जाना जाता है।
  • थांगला दर्रे के पास हिमनद से जाड़गंगा, केदारताल से केदारगंगा तथा डोडीताल से अस्सीगंगा निकलती है।
  • जलकुर नदी टिहरी जिले में भागीरथी में मिलती है।
  • भिलंगना की सहायक नदियाँ क्रमशः मेदेगंगा, दूधगंगा, धर्मगंगा एवं बालगंगा हैं।

भागीरथी की सहायक नदियाँ

संगम स्थल नदियाँ
झाला भागीरथी एवं सियागंगा
उत्तरकाशी मुख्यालय इन्द्रावतीगाड़ एवं स्यामल या वरुणागाड़
टिहरी डैम, गणेशप्रयाग भागीरथी एवं भिलंगना का संगम
भैरों या भैरम घाटी भागीरथी एवं जाड़गंगा या जाह्नवी या जाध नदी UKPSC 2024
गंगोरी भागीरथी एवं अस्सीगंगा नदी
हर्षिल भागीरथी एवं जलन्धरी या ककोड़ागाड़

अलकनन्दा उप-तन्त्र

  • प्राचीन नाम - विष्णुगंगा
  • उद्गम - सतोपन्थ शिखर के अलकापुरी बांक हिमनद व सतोपन्थ ताल से
  • सतोपन्थ से देवप्रयाग तक प्रवाह क्षेत्र - 195 किमी
  • सहायक नदियाँ - लक्ष्मणगंगा (पुष्पावती नदी, हेमगंगा लक्ष्मणगंगा की संयुक्त धारा), हेमगंगा, सरस्वती, पश्चिमी धौलीगंगा, नन्दाकिनी, पिण्डर, अमृतगंगा, कंचनगंगा, सोनधारा, वसुधारा
  • पुष्पावती नदी फूलों की घाटी के मध्य बहती है।
अलकनन्दा उप-तन्त्र की प्रमुख सहायक नदियों का वर्णन निम्न प्रकार हैं

पश्चिमी धौलीगंगा

उद्गम - धौलागिरि की कुनगुल श्रेणी
प्रवाह क्षेत्र - 94 किमी
सहायक नदियाँ - गिरथी नदी, ऋषिगंगा व कियोगाड़
गिरथी नदी किंगरी-बिंगरी से तथा ऋषिगंगा रेणी गाँव के पास स्थित ग्लेशियर से निकलती हैं तथा कियोगाड़ में गढ़वाल में मिलती हैं। UKPSC 2024

मन्दाकिनी नदी

  • उद्गम - मन्दरांचल श्रेणी (केदारनाथ) के चौराबाड़ी ग्लेशियर के पास स्थित गाँधी सरोवर से
  • अन्य नाम - सुरसरि (रामचरितमानस)
  • सहायक नदी - मधुगंगा

मन्दाकिनी नदी की सहायक नदियाँ
  • मन्दाकिनी व धूलगाड़ - अगस्त्यमुनि
  • मन्दाकिनी व कालीगंगा - कोटिप्रयाग
  • मन्दाकिनी व मधुगंगा - कालीमठ
  • मन्दाकिनी व सोन या बासुकी नदी - सोनप्रयाग
  • मन्दाकिनी व पुनाड़ नदी - रुद्रप्रयाग

नन्दाकिनी नदी

उद्गम - त्रिशूल पर्वत के पास नन्दाघुंघटी
लम्बाई - 56 किमी

पिण्डर नदी या कर्णगंगा

उद्गम - पिण्डारी ग्लेशियर (बागेश्वर)
सहायक नदियाँ - आटागाड़ (उद्गम दूधातोली) एवं कुफनी

अलकनन्दा की सहायक नदियाँ व संगम स्थल

नदियाँ संगम स्थल जिला
अलकनन्दा व खाड़वगंगा शिवप्रयाग पौड़ी
अलकनन्दा व कल्पगंगा हेलंग घाटी चमोली
अलकनन्दा व गरुड़गंगा पैनखण्डा चमोली
अलकनन्दा व लक्ष्मण नदी गोविन्दघाट चमोली
अलकनन्दा व ढुंढि नदी ढुण्डग्राम टिहरी
अलकनन्दा व सरस्वती नदी केशवप्रयाग माणा, चमोली

गंगा नदी तन्त्र की अन्य नदियाँ

भागीरथी एवं अलकनन्दा उप-तन्त्र के अतिरिक्त निम्न नदियाँ भी गंगा नदी तन्त्र का भाग हैं-

पश्चिमी रामगंगा नदी

  • उद्गम - दूधातोली श्रेणी
  • प्रवाह क्षेत्र - चमोली, अल्मोड़ा, पौड़ी के कॉर्बेट नेशनल पार्क
  • लम्बाई - 155 किमी
  • सहायक नदियाँ - बिरमा, गागस, बिनो
  • यह पौड़ी के कालागढ़ नामक स्थान पर राज्य से बाहर हो जाती है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज में यह गंगा नदी में मिल जाती है।
  • स्कन्दपुराण में पश्चिमी रामगंगा को रथवाहिनी कहा गया है।
  • पश्चिमी रामगंगा से गागस नदी, भिकियासैंण (अल्मोड़ा) नामक स्थान पर मिलती है।
  • नैनीताल के पहाड़पानी से निकलकर गौला या गार्गी नदी 102 किमी बहने के बाद ऊधमसिंह नगर के किच्छा के पास राज्य से बाहर होकर बरेली क्षेत्र में रामगंगा से मिलती है।
  • कोटद्वार क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली खोह नदी बिजनौर तथा उत्तर प्रदेश में पश्चिमी रामगंगा से मिल जाती है।

पूर्वी रामगंगा नदी

  • उद्गम - पिथौरागढ़ के पोंटिंग तथा नामिक हिमनद
  • लम्बाई - रामेश्वर तक 108 किमी
  • सहायक नदियाँ - भुजपत्री गाड़, कालापानी गाड़ तथा बेरल गाड़

कोसी नदी

  • उद्गम - कौसानी (बागेश्वर) में स्थित धारपानीधार
  • पौराणिक नाम - कौशिकी या कोसिला
  • लम्बाई - 168 किमी
  • प्रवाह क्षेत्र - अल्मोड़ा, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर
  • सहायक नदियाँ - देवगाड़, कालराऊ, सरोद, सुयाल, मिनोलगाड़ एवं सुमालीगाड़
  • कोसी नदी की सोमेश्वर घाटी को कुमाऊँ में धान का कटोरा कहते हैं।

उत्तराखण्ड में गंगा की सहायक नदियाँ

स्थान सहायक नदियाँ
ऋषिकेश दाईं ओर चन्द्रभागा नदी
रायवाला सोंग नदी
हरिद्वार, रुड़की रतमऊ नदी एवं सोलानी नदी
पौड़ी (फुलचट्टी) बाईं ओर से नयार नदी का गंगा में मिलन
शिवपुरी हेवल नदी
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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।