उत्तराखण्ड की जनसंचार व्यवस्था

उत्तराखण्ड की जनसंचार व्यवस्था

उत्तराखण्ड राज्य की जनसंचार व्यवस्था और यहाँ का गौरवशाली फिल्म इतिहास राज्य की सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। आगामी UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड और अन्य सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह टॉपिक अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में हमने राज्य की डाक सेवा, संचार माध्यमों और क्षेत्रीय सिनेमा के विकास से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को संकलित किया है जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
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इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • जनसंचार के प्रमुख माध्यम: उत्तराखण्ड में डाक सेवा का शताब्दी सफर, दूरदर्शन और आकाशवाणी केन्द्रों की स्थापना व उनके मुख्यालयों से जुड़ी सटीक जानकारी।
  • उत्तराखण्ड सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास: राज्य की पहली गढ़वाली फिल्म 'जगवाल' से लेकर सबसे सफल फिल्म 'घरजवैं' और कुमाऊँनी फिल्म 'मेघा आ' तक के रोचक तथ्य और उनके निर्माताओं का विवरण।
  • विशिष्ट विषयों पर आधारित फिल्में: राज्य आंदोलन (रामपुर तिराहा काण्ड), कुली बेगार और भूकम्प जैसी ऐतिहासिक व सामाजिक घटनाओं पर बनी फिल्मों का विशेष विश्लेषण।
  • उत्तराखण्ड फिल्म नीति 2022: राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी, नई योजनाओं और क्षेत्रीय कलाकारों के लिए प्रोत्साहन नीतियों की पूरी जानकारी।

राज्य में उपलब्ध जनसंचार सेवाओं का विवरण निम्न है-
  • डाकघर राज्य के अल्मोड़ा जिले में वर्ष 1905 में प्रधान डाकघर भवन बनाया गया, जिसने वर्ष 2005 में अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष पूरा किया।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार राज्य में 2,736 डाकघर कार्यरत हैं।
  • दूरदर्शन राज्य में दूरदर्शन केन्द्र वर्ष 1994 में प्रारम्भ किया गया। इसका मुख्यालय देहरादून में स्थित है।
  • आकाशवाणी राज्य में आकाशवाणी का प्रारम्भ वर्ष 1986 में अल्मोड़ा से किया गया। राज्य में आकाशवाणी के दो केन्द्र अल्मोड़ा व पौड़ी में स्थित हैं।

फिल्म उद्योग

  • पारेश्वर गौड़ द्वारा निर्मित प्रथम गढ़वाली फिल्म जगवाल वर्ष 1983 में रिलीज की गई।
  • दूसरी गढ़वाली फिल्म कभी सुख कभी दुःख (वर्ष 1984-85) थी, जिसके निर्देशक बिन्देश नौटियाल थे।
  • राज्य की सबसे सफल गढ़वाली फिल्म घरजवैं (वर्ष 1985-86) थी, इसके निर्माता विश्वेश्वर दत्त 'प्रेमी' व निर्देशक तरुन तारण थे।
  • संगम सिनेमाघर (दिल्ली) में 29 सप्ताह तक घरजवैं फिल्म का प्रदर्शन किया गया था। यह राज्य की एकमात्र गढ़वाली फिल्म है, जो 35 एम एम की है।
  • कुमाऊँनी बोली की पहली फिल्म मेघा आ है। यह फिल्म वर्ष 1987 में रिलीज हुई थी। इसके निर्देशक काका शर्मा व निर्माता जीवन सिंह बिष्ट थे।
  • निर्देशक नरेन्द्र कुमार ने वर्ष 1997 में चक्रचाल नामक भूकम्प केन्द्रित फिल्म बनाई थी।
  • निर्माता बलवेन्द्र ने वर्ष 2003 में जीतु बगड़वाल नामक गढ़वाली फिल्म बनाई थी।
  • के.सीरीज राज्य की पहली ऑडियो कम्पनी तथा राज्य की पहली म्यूजिक वीडियो एल्बम झुम्पा है।
  • राज्य की प्रथम वीडियो फिल्म समलौण थी।
  • तेरी सौं नामक फिल्म राज्य आन्दोलन रामपुर तिराहा काण्ड (1994) पर आधारित थी, जिसके निर्देशक अनुज जोशी व निर्माता अनिल जोशी थे।
  • सुदर्शन शाह द्वारा निर्मित फिल्म मधुली (2007) कुली बेगार पर आधारित थी।
  • कुमाऊँनी और गढ़वाली मिश्रित भाषा की पहली फिल्म सिपैंजी (2009) थी, जिसके निर्देशक राजेश जोशी थे।
  • गोपी भिना वर्ष 2017 में रिलीज राज्य की सबसे महँगी फिल्म है।
  • उत्तराखण्ड सिनेमा अवॉर्ड वर्ष 2010 में शुरू हुआ, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवॉर्ड 'ब्यो' को मिला।
नोट- गढ़वाली बोली का प्रथम नाटक जय-विजय का मंचन वर्ष 1911 में हुआ था, जिसके नाटककार भवानी प्रसाद थपलियाल थे।

कुमाऊँ की रामलीला

  • कुमाऊँ की रामलीला सम्पूर्ण उत्तराखण्ड राज्य में प्रसिद्ध है। यह अल्मोड़ा शैली की मानी जाती है। इसकी शुरुआत 1860 ई. बादरेश्वर मन्दिर अल्मोड़ा से हुई थी। इसे देवीदत्त जोशी द्वारा शुरू किया गया था।

उत्तराखण्ड फिल्म नीति, 2022

उत्तराखण्ड फिल्म नीति, 2015 को प्रतिस्थापित कर, उत्तराखण्ड फिल्म नीति, 2022 लागू की गई।
उत्तराखण्ड फिल्म नीति, 2022 का ड्राफ्ट 20 जुलाई, 2022 को विभागीय वेबसाइट पर जारी किया गया। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित उद्देश्यों को शामिल किया गया है-
  • फिल्मों के माध्यम से रोजगार सृजित करना।
  • अभी तक राज्य में हिन्दी फिल्मों की शूटिंग पर 75% छूट पर ही सब्सिडी दी जाती थी, परन्तु अब इसमें परिवर्तन कर सरकार ने शूट के टोटल खर्चे पर 30% सब्सिडी देने की घोषणा की है। यह सब्सिडी ₹ 2 करोड़ से अधिक नहीं होगी।
  • क्षेत्रीय फिल्मों को हिन्दी फिल्मों के समान ₹ 2 करोड़ की सब्सिडी दी जाएगी।
  • फिल्म उद्योग के माध्यम से उत्तराखण्ड में अतिरिक्त पूँजी निवेश आकर्षित करना।
  • उत्तराखण्ड के स्थानीय युवाओं को फिल्म के क्षेत्र में प्रशिक्षित किए जाने हेतु फिल्म से सम्बन्धित कोर्स प्रारम्भ करना।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में नए सिनेमाघरों, मल्टीप्लेक्स एवं मोबाइल थिएटर की स्थापना हेतु वित्तीय सहयोग प्रदान करना।
  • उत्तराखण्ड में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने हेतु उत्तराखण्ड में फिल्माई गई क्षेत्रीय एवं अन्य भाषाओं की फिल्मों के कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार प्रदान करना।
  • विदेशी, हिन्दी एवं अन्य भाषाओं की फिल्मों को उत्तराखण्ड राज्य में शूटिंग हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अनुदान प्रदान करना।
  • स्थानीय बोली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थानीय कलाकारों एवं फिल्मों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान प्रदान करना।

उत्तराखण्ड की अन्य प्रमुख फिल्में

फिल्म विवरण
बेटी ब्वारी यह फिल्म गंगोत्री चित्रकला द्वारा निर्मित तथा चन्दन ठाकुर द्वारा निर्देशित है।
ब्वारी हो तो इनी सूरज प्रकाश शर्मा द्वारा निर्मित फिल्म
बोई गढ़वाली फिल्म, जो वर्ष 2004 में प्रदर्शित हुई थी।
चेली वर्ष 2004 में कुमाऊँनी में प्रदर्शित फिल्म (राज्य की दूसरी कुमाऊँनी फिल्म)
चालदा जातरा वर्ष 2005 में चक्रधर फिल्म्स द्वारा निर्मित जौनसार-भाबर क्षेत्र की एकमात्र डॉक्युमेन्ट्री फिल्म
मंगतू बौल्या महेश प्रकाश द्वारा निर्देशित फिल्म
अमर शहीद श्रीदेव सुमन श्रीदेव सुमन के जीवन पर आधारित फिल्म, जो वर्ष 2007 में प्रदर्शित हुई।
याद आली टिहरी वर्ष 2010 में अनुज जोशी द्वारा निर्देशित यह फिल्म टिहरी बाँध पर आधारित है।
ल्या तुंगार वर्ष 2014 में प्रदर्शित गढ़वाली फिल्म
सतमंगल्या वर्ष 2015 में प्रदर्शित कुमाऊँनी फिल्म
बौड़िगी गंगा वर्ष 2016 में अनिरुद्ध गुप्ता द्वारा निर्देशित यह फिल्म राज्य से होने वाले पलायन पर आधारित है।
मेजर निराला जून, 2018 में प्रदर्शित यह फिल्म साहित्यकार व पूर्व मुख्यमन्त्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के उपन्यास पर आधारित है।
कन्यादान गढ़वाली फिल्म नवम्बर, 2019 में प्रदर्शित की गई थी। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता राजेश मालगुड़ी ने भी अभिनय किया। यह दो फौजी मित्रों की कहानी है।
खैरी का दिन यह गढ़वाली फिल्म जून, 2022 में प्रदर्शित तथा अशोक चौहान द्वारा निर्देशित है।
पोथली गढ़वाली फिल्म जून, 2023 में प्रदर्शित की गई तथा इसके निर्माता-निर्देशक रवि ममगाईं हैं। यह फिल्म बेटियों पर यौन हिंसा के कथानक पर बनाई गई है।
भैरव कथा यह गढ़वाली फिल्म वर्ष 2024 में प्रदर्शित की गई। इसके निर्देशक राघवेन्द्र सिंह हैं।
अजाण अनुज जोशी द्वारा निर्देशित यह गढ़वाली फिल्म अप्रैल, 2024 में प्रदर्शित की गई थी। इसमें शिवानी भण्डारी ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
घपरोल सिद्धार्थ शर्मा द्वारा निर्देशित यह फिल्म वर्ष 2025 में प्रदर्शित की गई। इसमें मनीष डिमरी, ऋषभ कुमार और गायिका करिश्मा शाह ने मुख्य भूमिका निभाई है।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।