उत्तराखण्ड के हिमनद (ग्लेशियर)
उत्तराखण्ड के हिमनद (ग्लेशियर) राज्य के भूगोल और पर्यावरण का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। पहाड़ों पर मौजूद ये विशाल 'बर्फ की नदियाँ' न केवल हमारी सदानीरा नदियों का उद्गम स्थल हैं, बल्कि परीक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। यह विषय UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard आदि जैसी उत्तराखण्ड की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक उपयोगी है, जहाँ ग्लेशियरों की अवस्थिति और विशेषताओं से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- उत्तराखण्ड के प्रमुख हिमनदों (बमक) का सटीक परिचय और उनकी भौगोलिक अवस्थिति।
- राज्य के सबसे बड़े 'गंगोत्री ग्लेशियर' और कुमाऊँ-गढ़वाल में फैले दूसरे सबसे बड़े 'पिण्डारी ग्लेशियर' से जुड़े महत्त्वपूर्ण परीक्षापयोगी तथ्य।
- चौराबाड़ी, भागीरथी और सतोपन्थ जैसे ग्लेशियरों का विस्तार और उनसे जुड़े विशेष स्थान (जैसे- गाँधी सरोवर और अलकापुरी)।
- खतलिंग ग्लेशियर का अनूठा भौगोलिक महत्त्व, जहाँ से भीलगंगा निकलती है और जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग भी माना जाता है।
पर्वतीय ढालों पर हिम के खिसकने से हिमनदों की उत्पत्ति होती है।
वृहत् हिमालय में विशाल हिमनद पाए जाते हैं, हिमनदों को हिमानियाँ, बर्फ की नदियाँ व बमक कहा जाता है।
उत्तराखण्ड हिमालय में कई प्रसिद्ध हिमानियाँ; जैसे- गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, सुन्दरढुंगा (बागेश्वर), नन्दादेवी, अरवा, पिण्डारी आदि अवस्थित हैं।
कुछ हिमानियों/ग्लेशियरों का विवरण निम्न प्रकार है-
गंगोत्री ग्लेशियर
- अवस्थिति - उत्तरकाशी में गढ़वाल हिमालय की चौखम्बा पर्वत चोटी के पश्चिमी ढाल पर
- संलग्न हिमनद - चतुरंगी, स्वच्छन्द, कैलाश मान
- विस्तार - लम्बाई 30 किमी तथा औसत चौड़ाई 2 किमी (सबसे बड़ा हिमनद)
चौराबाड़ी ग्लेशियर
- अवस्थिति - केदारनाथ से लगभग 3 किमी पूर्व में स्थित
- विस्तार - 14 किमी लम्बा व 500 मी चौड़ा
- गाँधी सरोवर इसी हिमनद के निकट स्थित है।
भागीरथी व सतोपन्थ ग्लेशियर
- अवस्थिति - नीलकण्ठ पर्वत के पूर्व में (अलकापुरी)
- विस्तार - सतोपन्थ ग्लेशियर 13 किमी तथा भागीरथी ग्लेशियर 18 किमी लम्बा
- ग्रीष्म ऋतु में बद्रीनाथ-माणा-वसुधारा प्रपात के मार्ग से होते हुए इन हिमनदों पर सरलता से पहुँचा जा सकता है।
पिण्डारी ग्लेशियर
- अवस्थिति - कुमाऊँ मण्डल के बागेश्वर व पिथौरागढ़ तथा गढ़वाल मण्डल के चमोली में (नन्दादेवी, त्रिशूल व नन्दाकोट शिखरों के मध्य)
- विस्तार - लम्बाई लगभग 30 किमी तथा औसत चौड़ाई 400 मी (राज्य का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर)
- कस्तूरी मृग, मोनाल पक्षी, ब्रह्म कमल व भोजपत्र के वृक्ष यहाँ देखे जा सकते हैं।
खतलिंग ग्लेशियर
- अवस्थिति - टिहरी उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग के संगम पर (जोगिन, स्फटिक प्रिस्वार, बार्त कौटर एवं कीर्ति स्तम्भ चोटियों के मध्य)
- भीलगंगा नदी इसी ग्लेशियर से निकलती है। केदारखण्ड में उल्लिखित स्फटिक लिंग सम्भवतः यहीं स्थित है। इसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जा सकता है।
उत्तराखण्ड के प्रमुख ग्लेशियर
| ग्लेशियर | जनपद |
|---|---|
| यमुनोत्री ग्लेशियर, डोरियानी ग्लेशियर | उत्तरकाशी |
| केदारनाथ ग्लेशियर | रुद्रप्रयाग |
| दूनागिरि ग्लेशियर, हिपराबमक ग्लेशियर, बद्रीनाथ ग्लेशियर | चमोली |
| काली ग्लेशियर, नामिक ग्लेशियर, पिनौरा ग्लेशियर, रालम ग्लेशियर, पोटिंग ग्लेशियर | पिथौरागढ़ |
| कफनी ग्लेशियर, मैकतोली ग्लेशियर | बागेश्वर |
| मिलम ग्लेशियर | पिथौरागढ़ |
| बन्दरपूँछ ग्लेशियर | उत्तरकाशी |
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