उत्तराखण्ड में चित्रकला | uttarakhand chitrakala

उत्तराखण्ड में चित्रकला

उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में यहाँ की चित्रकला का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्राचीनकालीन गुफाओं के शैलचित्रों से लेकर मध्यकालीन 'गढ़वाली चित्रशैली' तक का यह सफर बेहद रोचक है। यह विषय UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी उत्तराखण्ड की सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जहाँ से अक्सर कई परीक्षापयोगी प्रश्न पूछे जाते हैं।
uttarakhand-chitrakala

इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
  • उत्तराखण्ड की प्राचीन गुफाओं (ग्वारख्या, लाखू, किमनी आदि) में मिलने वाले प्रागैतिहासिक शैलचित्रों का विस्तृत विवरण।
  • पहाड़ी और गढ़वाली चित्रशैली का क्रमिक विकास तथा मुगल दरबार से आए चित्रकारों (श्यामदास व हरदास) का ऐतिहासिक योगदान।
  • गढ़वाल के सबसे महान चित्रकार 'मोलाराम तोमर' का जीवन, उनके प्रमुख चित्र (हिण्डोला की मस्तानी, मयंकमुखी) और उन्हें संरक्षण देने वाले परमार शासक।
  • प्रसिद्ध दरबारी चित्रकारों 'चैतू' और 'माणकू' की अद्वितीय कलाकृतियां, जैसे 'रुक्मिणीहरण', 'आँख मिचौली' और 'गीत गोविन्द' का मनमोहक चित्रण।
उत्तराखण्ड में चित्रकला धार्मिक पर्व व तीज-त्योहारों और विविध संस्कारों में देखने को मिलती है। इसके अतिरिक्त पूजा, अनुष्ठान आदि में भी इसके अनेक रूप देखने को मिलते हैं।
राज्य में चित्रकला कालक्रम को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है-

प्राचीनकालीन चित्रकला

उत्तराखण्ड राज्य में ग्वारख्या, लाखू, ल्वेथाप, किमनी गाँव, हुडली, पेटशाल, फलसीमा आदि प्रागैतिहासिक गुफाओं में चित्रकला के सबसे प्राचीनतम (शैलचित्र) नमूने के रूप में मिलते हैं।

मध्य एवं आधुनिककालीन चित्रकला

  • 16वीं से 19वीं शताब्दी के मध्य जम्मू से लेकर गढ़वाल तक पहाड़ी चित्रशैली प्रचलित थी। 'गढ़वाली चित्रशैली' एक प्रकार से पहाड़ी चित्रशैली की ही एक मुख्य धारा है।
  • गढ़वाल नरेश पृथ्वीपति शाह के शासनकाल (1658 ई.) में मुगल शाहजादा सुलेमान शिकोह के दो चित्रकार तुँवर श्यामदास और उसका पुत्र हरदास गढ़वाल में बस गए तथा हरदास के वंशजों ने गढ़वाल शैली के विकास के लिए कार्य किया।
  • चित्रकार हरदास के पुत्र का नाम हीरालाल एवं हीरालाल के पुत्र का नाम मंगतराम था। प्रसिद्ध चित्रकार मोलाराम मंगतराम का पुत्र था।
  • हीरालाल को गढ़वाल शैली का सूत्रपात कर्ता तथा मोलाराम तोमर (1743-1833 ई.) को सबसे महान चित्रकार माना जाता है।

मोलाराम तोमर

  • मोलाराम को प्रदीपशाह, ललितशाह, जयकीर्तिशाह, प्रद्युम्नशाह एवं सुदर्शनशाह शासकों द्वारा संरक्षण प्रदान किया गया था।
  • सर्वप्रथम मोलाराम को बैरिस्टर मुकुन्दीलाल ने प्रस्तुत किया था।
  • मोलाराम वंश के अन्य चित्रकार ज्वालाराम, शिवराम, आत्माराम, अजबराम, तेजराम आदि हैं।
  • हिण्डोला की मस्तानी की चित्रावली मोलाराम के प्रमुख चित्र हैं।
  • इनके अन्य प्रसिद्ध चित्र मयंकमुखी, उत्कण्ठिता नायिका, राधाकृष्ण मिलन, विप्रलम्भा नायिका, सितार प्रिया तथा वासकसटैया नायिका, प्रद्युम्नशाह व उनकी रानी का चित्र आदि हैं।

चैतू व माणकू

  • ये मोलाराम के शिष्य थे। माणकू का निवास स्थान देवलगढ़ के समीप रामपुर में था।
  • सुदर्शन शाह के दरबारी चित्रकारों में चैतू व माणकू प्रसिद्ध थे।
  • गढ़वाली चित्रकार चैतू के द्वारा 13 चित्रों की रुक्मिणीहरण माला का चित्रांकन किया गया।
  • कृष्ण लीलाओं के कारण चैतू ने प्रसिद्धि प्राप्त की थी।
  • चैतू के समय के अन्य चित्रकारों में मणिराम वैरागी का नाम प्रसिद्ध था।
  • माणकू ने आँख मिचौली नामक रंगीन चित्र का चित्रांकन किया था।
  • जयदेव द्वारा रचित गीत गोविन्द का चित्रण 1830 ई. में माणकू द्वारा किया गया था।

उत्तराखण्ड में आर्ट संग्रहालय

आर्ट संग्रहालय अवस्थिति
कुँवर विचित्रशाह संग्रहालय टिहरी (गढ़वाल)
महाराजा कुंवर नरेन्द्रशाह संग्रहालय नरेन्द्रनगर (टिहरी)
मोलाराम आर्ट गैलरी श्रीनगर (गढ़वाल)
मुकुन्दीलाल संग्रहालय कोटद्वार (पौड़ी)
गिरिजा किशोर जोशी संग्रहालय अल्मोड़ा
राव वीरेन्द्र शाह संग्रहालय देहरादून

गढ़वाली चित्रशैली की प्रमुख कृतियाँ

नाम वर्ष कृतियाँ
कुमारस्वामी 1916 राजपूत पेण्टिंग्स (ऑक्सफोर्ड)
बैरिस्टर मुकुन्दीलाल 1921 सम नोट्स ऑन मोलाराम व गढ़वाल स्कूल ऑफ पेण्टिंग
अजीत घोष 1929 द स्कूल ऑफ राजपूत पेण्टिंग्स
जे. सी. फ्रेंच 1931 हिमालयन आर्ट (प्रकाशन लन्दन से)
डब्ल्यू. जी. आर्चर 1954 गढ़वाल पेण्टिंग (प्रकाशन लन्दन से)
किशोरीलाल वैद्य 1969 पहाड़ी चित्रकला
बैरिस्टर मुकुन्दीलाल 1973 गढ़वाल पेण्टिंग्स
डॉ. यशवन्त सिंह कठौच - गढ़वाली चित्रशैली : एक सर्वेक्षण
रणबीर सिंह बिष्ट - पहाड़ी घसियारे
उत्तराखण्ड की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की शानदार और सटीक तैयारी के लिए हमारी वेबसाइट https://www.uttarakhandgk.com/ पर नियमित रूप से विजिट करें। अपनी तैयारी को और मजबूत बनाने के लिए वेबसाइट का नाम हमेशा याद रखें - WWW.UTTARAKHANDGK.COM!
Tags:

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत, भूगोल, नदी प्रणालियों और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।