टिहरी बाँध परियोजना
उत्तराखंड की प्रमुख जल-विद्युत परियोजनाओं और बाँधों का यह विषय राज्य की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, या Forest Guard जैसे एग्जाम्स की सफलता का सपना देख रहे हैं, तो टिहरी बाँध, लखवाड़ परियोजना और राज्य के विद्युत निगमों से जुड़े ये सटीक तथ्य आपके सिलेक्शन में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- टिहरी बाँध परियोजना का सम्पूर्ण विश्लेषण: भागीरथी और भिलंगना के संगम पर स्थित इस 2400 मेगावाट क्षमता वाले बाँध का इतिहास, इसके निर्माण से जुड़े रोचक तथ्य (जैसे- राष्ट्र का गाँव), विस्थापन और इससे जुड़े ऐतिहासिक चिपको व अन्य आंदोलनों की पूरी जानकारी।
- राज्य की अन्य प्रमुख जल-विद्युत परियोजनाएँ: यमुना नदी पर लखवाड़ बाँध, टोंस नदी पर किशाऊ परियोजना, काली नदी पर महात्वाकांक्षी पंचेश्वर बाँध और धौलीगंगा व विष्णुप्रयाग परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता, नदियाँ और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण समझौते।
- उत्तराखण्ड के ऊर्जा निगमों की संरचना: उत्तराखण्ड जल-विद्युत निगम (UJVNL), पावर कॉर्पोरेशन (UPCL) और ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (PTCUL) की स्थापना तिथियां, उनके मुख्यालय और राज्य में बिजली उत्पादन व वितरण में उनकी भूमिका।
- अवस्थिति - भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर
- स्वीकृति - 1972 में योजना आयोग से
- निर्माण प्रारम्भ - 1978, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
- राष्ट्र को समर्पित - 30 जुलाई 2006
- डिज़ाइन कर्ता - प्रो. जेम्स ब्रून
- उपनाम - राष्ट्र का गाँव
- वास्तविक नाम - स्वामी रामतीर्थ सागर
- स्थानीय नाम - सुमन सागर
- विशेषता - राज्य की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना, सुरंग प्रणाली (रन ऑफ द रिवर तकनीक)
- कुल विद्युत क्षमता - 2400 मेगावाट
- प्रथम चरण - 1000 मेगावाट (टिहरी बाँध एवं जल विद्युत)
- द्वितीय चरण - 1000 मेगावाट (टिहरी पम्प स्टोरेज प्लान्ट) 400 मेगावाट (कोटेश्वर बाँध एवं जल विद्युत)
- उद्देश्य - बिजली आपूर्ति, सिंचाई, पर्यटन विकास, बाढ़ नियन्त्रण
- जलाशय क्षेत्रफल - 42 वर्ग किमी
- बाँध की ऊँचाई - 260.5 मी (मिट्टी व पत्थर से निर्मित)
- सिंचाई क्षमता - 6.04 लाख हेक्टेयर में स्थायी सिंचाई, 2.7 लाख हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई
- पेयजल - दिल्ली को आपूर्ति
- आर्थिक लाभ - देश को प्रतिवर्ष ₹200 करोड़ का लाभ; उत्तराखण्ड को 12% मुफ्त बिजली (रॉयल्टी के रूप में)
टिहरी हाइड्रो डेवलपमेण्ट कॉर्पोरेशन (THDC)
स्थापना - 12 जुलाई, 1988
कार्य सौंपा गया - फरवरी, 1989 में उत्तर प्रदेश, दिल्ली को विद्युत आपूर्ति
जलधारण क्षमता - कुल 354 करोड़ घन मी
वर्तमान उपयोग - 261 करोड़ घन मी
टिहरी बाँध का विरोध व विस्थापन
विरोध का प्रमुख कारण
भूकम्प क्षेत्र के जोन-V में महान टियर फाल्ट पर स्थित।
रिक्टर स्केल पर 7.5 से भी अधिक तीव्रता के भूकम्प आने की सम्भावना।
बाँध की आयु 160 वर्ष अनुमानित, परन्तु गाद जमा होते रहने से बाँध की आयु में 61 वर्ष की कमी सम्भव।
विरोध का इतिहास
सर्वप्रथम विरोध टिहरी गढ़वाल रियासत की राजमाता कमलेन्दुमती शाह ने किया था।
वर्ष 1978 में टिहरी बाँध विरोधी समिति (अध्यक्ष विद्यासागर नौटियाल) से चिपको आन्दोलन के नेता सुन्दरलाल बहुगुणा तथा वीरेन्द्र सकलानी भी जुड़े हुए थे।
वीरेन्द्र सकलानी द्वारा वर्ष 1979 में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई।
वर्ष 1991 में सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में 76 दिनों का अनशन जिसके परिणामस्वरूप निर्माण रुका।
विस्थापन
प्रभावित - लगभग 1 लाख लोग
पुनर्वास - टिहरी शहर के लोग नई टिहरी, ऋषिकेश, देहरादून में
लखवाड़ बाँध परियोजना
अवस्थिति - यमुना नदी (देहरादून जिले में) पर
विद्युत क्षमता - 300 मेगावाट
मंजूरी - वर्ष 1967 में
रोक - वर्ष 1992 में
राष्ट्रीय परियोजना घोषित - वर्ष 2008 में
इस परियोजना के अन्तर्गत 204 मी ऊँचा कंक्रीट बाँध प्रस्तावित है।
लाभान्वित क्षेत्र भारत के 6 राज्य क्रमश: उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली।
इस परियोजना का 90% केन्द्र सरकार द्वारा व 10% राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
यमुना नदी पर बनी व्यासी परियोजना (120 मेगावाट) से लोहारी गाँव (देहरादून) जलमग्न हो गया है।
किशाऊ बाँध (किशौ बाँध) परियोजना
अवस्थिति - टोंस नदी (देहरादून)
विद्युत क्षमता - 660 मेगावाट
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण में दोनों राज्यों (उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश) की भागीदारी 50-50% रहेगी।
पंचेश्वर बाँध परियोजना
अवस्थिति - काली या शारदा नदी
विद्युत क्षमता - 5400 मेगावाट
सन्धि वर्ष 1996 में भारत व नेपाल सरकार के बीच।
पंचेश्वर बाँध के अन्तर्गत पिथौरागढ़, चम्पावत और नेपाल का कुछ भाग आता है।
कोटेश्वर बाँध परियोजना
अवस्थिति - टिहरी जिले में भागीरथी नदी पर
विद्युत क्षमता - 400 मेगावाट
पहला चरण प्रारम्भ - 27 मार्च, 2011
विष्णुप्रयाग जल-विद्युत परियोजना
अवस्थिति - चमोली जिले में अलकनन्दा नदी पर
विद्युत क्षमता - 650 मेगावाट
इसका निर्माण अविभाजित उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन द्वारा एक प्राइवेट कम्पनी के माध्यम से किया गया।
राज्य विभाजन के पश्चात् इससे उत्पादित बिजली 88% उत्तर प्रदेश सरकार को तथा शेष 12% उत्तराखण्ड सरकार को रॉयल्टी के रूप में मिलती है।
धौलीगंगा परियोजना (फेज-I)
अवस्थिति - पूर्वी धौलीगंगा नदी, पिथौरागढ़
विद्युत उत्पादन क्षमता - 280 मेगावाट
प्रारम्भ - वर्ष 2005
इस परियोजना का बाँध बनाने में पहली बार कट ऑफ वॉल तकनीक का प्रयोग किया गया है।
कुमाऊँ क्षेत्र में भूमिगत पावर हाउस और सुरंगों वाली यह पहली परियोजना है।
उत्तराखण्ड की अन्य प्रमुख परियोजनाएँ
| परियोजना | अवस्थिति/नदी | विद्युत क्षमता (मेगावाट) |
|---|---|---|
| लोहारी नागपाला परियोजना | भटवाड़ी (भागीरथी नदी) | 600 |
| पाला-मनेरी परियोजना | उत्तरकाशी (भागीरथी नदी) | 480 |
| मनेरी-भाली परियोजना (फेज -1) | तिलोथ (भागीरथी नदी) | 90 |
| मनेरी-भाली परियोजना (फेज-2) | धरासू (भागीरथी नदी) | 304 |
| करमोली जल-विद्युत परियोजना | जाड़गंगा नदी | 140 |
| आराकोट-त्यूनी परियोजना | टोंस नदी | 81 |
| नैटवार-मोरी जल-विद्युत परियोजना | टोंस नदी | 60 |
| जखोल सांकरी जल-विद्युत परियोजना | सुपिन नदी | 44 |
| छिबरो परियोजना (वर्ष 1974-76) | देहरादून (टोंस नदी) | 240 |
| खोदरी परियोजना (वर्ष 1983-84) | देहरादून (यमुना नदी) | 120 |
| व्यासी जल-विद्युत परियोजना | देहरादून (यमुना नदी) | 120 |
| ढालीपुर परियोजना (1965-70) | देहरादून (यमुना नदी, डाक-पत्थर बैराज) | 51 |
| ढकरानी परियोजना (1965-70) | देहरादून (यमुना नदी, डाक-पत्थर बैराज) | 33.75 |
| कुल्हाल जल-विद्युत परियोजना | देहरादून (यमुना नदी) | 30 |
| उत्यासू बाँध परियोजना | पौड़ी (अलकनन्दा नदी) | 1000 |
| श्रीनगर जल-विद्युत परियोजना | पौड़ी (अलकनन्दा नदी) | 330 |
| रामगंगा परियोजना या कालागढ़ परियोजना | पौड़ी (रामगंगा नदी) | 198 |
| तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना | चमोली (धौलीगंगा नदी) | 520 |
| विष्णुगाड़ पीपलकोटी परियोजना | चमोली (अलकनन्दा नदी) | 444 |
| मलेरी-झेलम परियोजना | चमोली (धौलीगंगा नदी) | 144 |
| नन्दप्रयाग लंगासू जल-विद्युत परियोजना | चमोली (अलकनन्दा नदी) | 100 |
| गोहनाताल जल-विद्युत परियोजना | चमोली (विरहीगंगा नदी) | 60 |
| राजवक्ती जल-विद्युत परियोजना | चमोली (मन्दाकिनी नदी) | 4.4 |
| उर्गम परियोजना (UJVNL) | चमोली (कल्पगंगा नदी) | 3 |
| कालिका दन्तु परियोजना | पिथौरागढ़ (काली नदी) | 230 |
| सेला उर्थिंग जल-विद्युत परियोजना | पिथौरागढ़ (पूर्वी धौलीगंगा) | 202 |
| सुरिनगाड़ जल-विद्युत परियोजना (UJVNL) | पिथौरागढ़ (सुरिन नदी) | 5 |
अन्य प्रमुख जल परियोजनाएँ
| परियोजना | विवरण |
|---|---|
| सिंगोली भटवाड़ी परियोजना | रुद्रप्रयाग में मन्दाकिनी नदी पर स्थित है। |
| टनकपुर परियोजना | चम्पावत जिले में शारदा नदी पर स्थित है। वर्ष 1993 में इसका निर्माण किया गया था। इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट है। |
| चीला परियोजना | चीला नदी गंगा की सहायक नदी है। चीला नदी पर पौड़ी में 144 मेगावाट की चीला परियोजना का निर्माण किया गया है। |
| नानक सागर | उधमसिंह नगर में देओहा नदी पर नानक सागर नामक कृत्रिम झील का निर्माण किया गया है। |
| सप्तेश्वर जल-विद्युत परियोजना | यह परियोजना शारदा नदी पर बनाई गई है। जोशियारा से धरासू तक विद्युत परियोजना हेतु जल ले जाने के लिए भागीरथी नदी पर 16 किमी लम्बी भूमिगत सुरंग स्थित है। |
उत्तराखण्ड विद्युत निगम
इसका गठन 1 अप्रैल, 2001 को उत्तर प्रदेश सरकार से प्रशासनिक नियन्त्रण प्राप्त करने के बाद किया।
इसमें विद्युत उत्पादन, वितरण व पारेषण के लिए तीन अन्य निगमों का गठन किया गया। इन निगमों का वर्णन निम्न प्रकार है-
उत्तराखण्ड जल-विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL)
- गठन - 12 फरवरी, 2001 (उत्तराखण्ड निगम के अन्तर्गत)
- मुख्यालय - उज्जवल भवन देहरादून
- यह निगम राज्य की परियोजनाओं के निर्माण हेतु निजी क्षेत्रों या केन्द्रीय संगठनों को आवण्टित करता है।
- 2 जुलाई, 2007 से पहले इस निगम का नाम 'उत्तरांचल जल-विद्युत निगम लिमिटेड' था।
उत्तराखण्ड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL)
गठन - 1 अप्रैल, 2001 को उत्तराखण्ड जल-विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) तथा पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (PTCUL) से बिजली लेकर उपभोक्ताओं तक वितरण करने के लिए किया गया।
मुख्यालय - देहरादून
पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (PTCUL)
- इसका गठन 1 जून, 2004 को राज्य की विद्युत ट्रांसमिशन की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया।
- इसका कार्य 132 किलोवाट और उससे अधिक क्षमता की बिजली आपूर्ति के लिए नेटवर्क स्थापित करना और बिजली सप्लाई को बनाए रखना है।
उत्तराखण्ड की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की शानदार और सटीक तैयारी के लिए हमारी वेबसाइट https://www.uttarakhandgk.com/ पर नियमित रूप से विजिट करें। अपनी तैयारी को और मजबूत बनाने के लिए वेबसाइट का नाम हमेशा याद रखें - WWW.UTTARAKHANDGK.COM!

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें