स्वतन्त्रता सेनानी तथा आन्दोलनकारियों के कल्याण हेतु प्रयास/योजनाएँ
उत्तराखण्ड राज्य में स्वतन्त्रता सेनानियों, आन्दोलनकारियों, पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाएं तथा राज्य की ई-गवर्नेस (E-Governance) सुविधाएं परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। यह टॉपिक आगामी UKPSC, UKSSSC, उत्तराखण्ड पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड जैसी सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद उपयोगी है। इसे ध्यान से पढ़ें और परीक्षा में अपने अंक पक्के करें।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- पूर्व सैनिक व आन्दोलनकारी कल्याण: पूर्व सैनिकों, राज्य आन्दोलनकारियों और स्वतन्त्रता सेनानियों के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजनाएं, पेंशन, और 5% आरक्षण (जैसे- 'जय जवान आवास योजना' और 'इकोटास्क फोर्स')।
- ई-गवर्नेस की पहल: उत्तराखण्ड में ई-गवर्नेस वर्ष (2001) की शुरुआत और सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकारी कार्यों के सुगमता से क्रियान्वयन की पूरी जानकारी।
- प्रमुख पोर्टल एवं सॉफ्टवेयर: भू-अभिलेखों के लिए 'देवभूमि' सॉफ्टवेयर, 'स्वान' (SWAN) नेटवर्क, 'उत्तरा' और हाल ही में लॉन्च 'अपणि सरकार' पोर्टल के कार्य और महत्व।
- नागरिक सेवाएं: 'ई-डिस्ट्रिक्ट योजना' और 'पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जनाधार ई-सेवा' के जरिए आम जनता को निवास, जाति और चरित्र प्रमाण-पत्र मिलने की डिजिटल सुविधाओं के महत्वपूर्ण तथ्य।
राज्य में पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु पूर्व सैनिक कल्याण निगम की स्थापना की गई है।
पूर्व सैनिकों को आवास बनवाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने सम्बन्धी योजना जय जवान आवास योजना है।
पूर्व सैनिकों को समूह 'ग' व 'घ' की राज्य सेवाओं में 5% आरक्षण देने का प्रावधान है।
भूतपूर्व सैनिकों को रोजगार देने व पर्यावरण रक्षा हेतु इकोटास्क फोर्स योजना की शुरुआत वर्ष 2008-09 में की गई।
सैनिक विधवाओं की पुत्रियों व पूर्व सैनिकों की अनाथ पुत्रियों की शादी के लिए राज्य सरकार द्वारा ₹ 5,0000 (अब) अनुदान दिया जाता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के सैनिकों को ₹3,000 प्रतिमाह पेंशन दी जाती है।
राज्य आन्दोलनकारियों में सामान्य को ₹5,000 तथा दिव्यांग को ₹10,000 पेंशन दी जाती है।
पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए सैनिक कल्याण निदेशालय की व्यवस्था की गई है।
पूर्व सैनिकों के सेवायोजन में सहयोग के लिए विभिन्न सैन्य मुख्यालयों (स्टेशन हेडक्वाटर्स) पर सेवायोजन प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं।
राज्य में सैन्य मुख्यालयों, यूनिट मुख्यालयों, रेजीमेण्टल मुख्यालयों द्वारा कल्याणकारी गतिविधियाँ चलाई जाती हैं।
ई-गवर्नेस सुविधा
- सरकारी कामकाजों के शीघ्र निपटान एवं क्रियान्वयन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना ई-गवर्नेस कहलाता है। राज्य ने वर्ष 2001 को ई-गवर्नेस वर्ष घोषित किया था।
- देवभूमि नामक सॉफ्टवेयर का उपयोग राज्य में भू-अभिलेखों को तैयार करने के लिए किया गया है।
- राज्य की सभी तहसीलों को SWAN नेटवर्क से जोड़ा गया है।
- उत्तरा नामक पोर्टल के माध्यम से सरकारी सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
- ई-डिस्ट्रिक्ट योजना (2009) पौड़ी से चालू की गई थी, जिसका उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकारी सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाना है।
- ई-डिस्ट्रिक्ट की सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिए अपणि सरकार पोर्टल लॉन्च किया गया है।
- पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जनाधार ई-सेवा का उद्देश्य राज्य की तहसीलों में निवास, हैसियत, चरित्र व जाति प्रमाण-पत्र सम्बन्धित अभिलेखों का सुगमता से जनता को उपलब्ध कराना है।
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