अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित पंचप्रयाग
उत्तराखण्ड की नदी प्रणालियां (River Systems) राज्य के भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जहाँ से हर बार प्रश्न पूछे जाते हैं। यह टॉपिक आगामी UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard और अन्य सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस लेख में नदियों के उद्गम, संगम और उनसे जुड़े परीक्षापयोगी तथ्यों का बेहतरीन संकलन दिया गया है।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- पंचप्रयाग और यमुना नदी तंत्र: अलकनंदा के किनारे स्थित देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग सहित सभी पांच प्रयागों की जानकारी और यमुना व उसकी सबसे बड़ी सहायक नदी 'टोंस' का विस्तृत वर्णन।
- राज्य की सबसे लंबी नदी - काली (शारदा) तंत्र: काली नदी का उद्गम, इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ (गौरीगंगा, पूर्वी धौलीगंगा आदि) और उत्तराखण्ड की अंतिम नदी मानी जाने वाली 'लधिया' के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य।
- सरयू, गोमती और नयार उप-प्रवाह तंत्र: कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थल, घाटियाँ (जैसे कत्यूर घाटी) और उनके संगम बिन्दुओं का सटीक विवरण।
- परीक्षापयोगी विविध तथ्य: दून घाटी की सौंग, रिस्पना, और बिंदाल जैसी नदियों के साथ-साथ अन्य लघु हिमालयी नदियों से जुड़े वे सीधे तथ्य जो अक्सर पिछली परीक्षाओं (जैसे Patwari 2023, UKPSC 2025) में पूछे गए हैं।
अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित पंचप्रयाग
- विष्णुप्रयाग (चमोली) अलकनन्दा व विष्णुगंगा (पश्चिमी धौलीगंगा)
- नन्दप्रयाग (चमोली) अलकनन्दा और नन्दाकिनी नदी
- कर्णप्रयाग (चमोली) पिण्डर व अलकनन्दा
- रुद्रप्रयाग अलकनन्दा व मन्दाकिनी नदी
- देवप्रयाग (टिहरी) अन्तिम प्रयाग - अलकनन्दा व भागीरथी नदी
यमुना नदी तन्त्र
- उद्गम - उत्तरकाशी के बन्दरपूँछ पर्वत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित यमुनोत्री हिमनद के यमुनोत्री काण्ठा से
- राज्य में लम्बाई - 136 किमी
- प्रमुख सहायक नदियाँ - टोंस (सबसे बड़ी), आसन नदी, ऋषिगंगा, हनुमान गंगा, कृष्णागाड़, बनाड़गाड़, कमलगाड़, बरनीगाड़, भद्रीगाड़, मुगरागाड़, गडोलीगाड़
- उत्तरकाशी से होते हुए देहरादून के धालीपुर के पास यमुना नदी राज्य से बाहर हो जाती है।
- अगलाड़ नदी (मौण मेले के लिए प्रसिद्ध) यमुना के विकासनगर मार्ग पर पड़ने वाले यमुना पुल के पास मिलती है।
टोंस नदी : यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी
- उद्गम - बन्दरपूँछ पर्वत के स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर से निकलने वाली सुपिन नदी एवं रूपिन नदी से मिलकर
- मोरी के नेटवाड़ क्षेत्र में रूपिन एवं सुपिन का संगम होता है, जिसे कुछ दूरी तक तमसा नाम से जाना जाता है।
- टोंस नदी कालसी व डाकपत्थर के बीच यमुना में मिल जाती है। पटवारी 2023
- राज्य में इसकी लम्बाई 148 किमी है।
- इसकी सहायक नदियाँ खूनीगाड़ व मौनागाड़ हैं।
- राज्य में कुल क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वन क्षेत्रफल टोंस नदी बेसिन में 76.6% पाया जाता है। टोंस के पश्चात् क्रमशः कोसी (69%), यमुना (56.7%) तथा काली नदी (45.4%) का स्थान है।
काली (शारदा) नदी तन्त्र
- उद्गम - मिलम पिथौरागढ़ में जास्कर श्रेणी के कालापानी (व्यास आश्रम) से
- काली नदी राज्य में बहने वाली सबसे बड़ी नदी है। पटवारी 2023
- काली नदी को स्कन्द पुराण में श्यामा नदी कहा गया है।
- पिथौरागढ़ के बाद काली नदी चम्पावत के पूर्णागिरि तीर्थ से होकर टनकपुर के पास बरमदेव मण्डी से शारदा नदी के नाम से नेपाल में प्रवेश करती है।
- भारत व नेपाल की सीमा बनाते हुए काली नदी काकागिरि पर्वत के समानान्तर बहती है।
काली नदी व उसकी सहायक नदियों का संगम
| नदियाँ | संगम स्थल | जिला |
|---|---|---|
| काली नदी व लोहावती नदी | गढ़मुक्तेश्वर | चम्पावत |
| काली नदी व लाधिया नदी | चूका | चम्पावत |
| काली नदी व कटिपानीगाड़ | तालेश्वर | पिथौरागढ़ |
| काली नदी व पूर्वी धौलीगंगा | खेला गाँव | पिथौरागढ़ |
| काली नदी व गोरी गंगा नदी | जौलजीवी | पिथौरागढ़ |
| काली नदी व सरयू नदी | पंचेश्वर | चम्पावत |
- कुठीयांग्टी उप-तन्त्र, पूर्वी धौलीगंगा उप-तन्त्र, गौरीगंगा उप-तन्त्र व सरयू उप-तन्त्र काली नदी के प्रमुख सहायक उप-तन्त्र हैं, जिनका वर्णन इस प्रकार है
कुठीयांग्टी
- उद्गम - जास्कर श्रेणी की पश्चिम ढाल से
- सहायक नदियाँ - थुमका, संगचुम्ना व निकुर्ट
पूर्वी धौलीगंगा
- उद्गम - गोवानखना हिमनद (लिस्सर एवं दरमा नदी के मिलने से)
- प्रमुख सहायक नदियाँ - सेलायांग्टी, नानदारमा व कंचुतिच
गौरीगंगा
- उद्गम - मल्ला जौहार क्षेत्र में मिलम हिमनद (गोरी और रामल (शुनकल्पा) गाड़ से मिलकर) से
- सहायक नदियाँ - गोन्खागाड़ व रमलगाड़
- राज्य में 104 किमी बहने के बाद यह दाईं ओर से जौलजीवी, (पिथौरागढ़) के पास काली नदी में मिल जाती है।
लधिया नदी
- उद्गम - गजार (पिथौरागढ़, अल्मोड़ा व नैनीताल का मिलन बिन्दु)
- सहायक नदी - कोइराला नदी
- चम्पावत के चूका नामक स्थान पर यह काली नदी में मिलती है।
- इसे उत्तराखण्ड की अन्तिम नदी माना जाता है।
- लधिया नदी राटिया नदी के साथ मीठा-रीठा साहिब (चम्पावत) में संगम बनाती है।
सरयू उप-तन्त्र
- उद्गम - सरमूल (झुण्डी)
- लम्बाई 164 किमी (लगभग)
- यह पिथौरागढ़-अल्मोड़ा एवं पिथौरागढ़-चम्पावत जिलों की सीमा बनाते हुए पंचेश्वर पहुँचकर काली नदी में विलीन हो जाती है।
- पूर्वी रामगंगा सरयू में रामतीर्थ नामक स्थान पर मिल जाती है।
गोमती नदी
- उद्गम - डेबरा श्रेणी के भटकोट (बागेश्वर)
- इस नदी घाटी को कत्यूर घाटी के नाम से जानते हैं। यह नदी बागेश्वर में सरयू नदी से मिल जाती है।
- बैजनाथ बैराज में गोमती से गरुड़गंगा नदी निकलती है।
नयार नदी उप-प्रवाह तन्त्र
- पूर्वी नयार एवं पश्चिमी नयार से मिलकर नयार या नादगंगा बनी है, लम्बाई क्रमशः 78 किमी तथा 109 किमी, जिसका संगम पौड़ी के सतपुली में होता है।
- पूर्वी नयार नदी, दूधातोली के दक्षिणी जखमोलीधार श्रेणी से स्यूंसी या कैन्यूर गाड़ नाम से निकलती है।
- पश्चिमी नयार दूधातोली श्रृंखला के उत्तरी-पश्चिमी ढाल से ढाईज्यूली व स्योली गाड़ नामक दो शाखाओं से निकलती है।
उत्तराखण्ड की नदियाँ : विविध तथ्य
- सरयू, नयार, पश्चिमी रामगंगा, लाधिया, आटागाड़ आदि नदियाँ उत्तराखण्ड में लघु हिमालय या मध्य हिमालय श्रेणी से निकलती हैं।
- चम्पावत के कोटा गाँव में कोइराला नदी बहती है।
- पीली व कोटावली नदी हरिद्वार जिले में बहती है।
- देहरादून-हरिद्वार में सूखी नदी बहती है।
- नैनीताल में बाकरा नदी, दाबका नदी के पूर्व और उसके समानान्तर बहती है तथा उधमसिंह नगर के खानपुर में राज्य से बाहर हो जाती है।
- अल्मोड़ा नगर कोसी नदी के जलागम में स्थित है। UKPSC 2025
सौंग नदी: देहरादून की प्रमुख नदी
- सौंग दून घाटी की सबसे प्रमुख नदी है, जो सुरकुण्डा से निकलकर रायवाला के पास गंगा नदी से मिलती है।
- सिसवा, विधालना-रौं आदि सौंग नदी की सहायक नदियाँ हैं।
- सिसवा की सहायक नदियाँ रिस्पना या ऋषिपर्णा एवं बिन्दाल नदी हैं, जो देहरादून के मध्य से प्रवाहित होती हैं।
- दून घाटी की अन्य प्रमुख नदियाँ जाखन नदी, दुल्हनी नदी, नून नदी आदि हैं।
प्रमुख नदियों के किनारे अवस्थित नगर/कस्बे
| नदी | नगर/कस्बे |
|---|---|
| काली नदी | टनकपुर, तवाघाट, धारचूला, बनबसा, जिब्ती आदि |
| भागीरथी | लंका, गंगनानी, मनेरी, उत्तरकाशी, हर्षिल चिन्यालीसौड़, गणेशप्रयाग आदि |
| अलकनन्दा | बद्रीनाथ, माणा, जोशीमठ, गोविन्दघाट नन्दप्रयाग, श्रीनगर, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर आदि |
| कोसी | कौसानी, बेतालघाट, रामनगर आदि |
| पश्चिमी रामगंगा | गैरसैंण, चौखुटिया, कालागढ़ आदि |
| सरयू | बैजनाथ, बागेश्वर, कपकोट आदि |
| यमुना | जानकीचट्टी, फूलचट्टी, हनुमानचट्टी, कालसी, लाखामण्डल, डाकपत्थर, नैन बाग, नौगाँव तथा डामट आदि |
| पूर्वी रामगंगा | रामेश्वर, विरथी आदि |
| पिण्डर | सिमली, थराली, नारायणबगड़ आदि |
| गौरीगंगा | मिलम, मरतोली, बरम आदि |
| गंगा | देवप्रयाग, कोड़ियाला, कनखल, ऋषिकेश, हरिद्वार आदि |
| पश्चिमी धौलीगंगा | मलारी, जेलम, तपोवन, विष्णुप्रयाग आदि |
| मन्दाकिनी | केदारनाथ, रामबाड़ा, सोनप्रयाग, सीतापुर, ऊखीमठ, तिलवाड़ा आदि |
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