उत्तराखण्ड के प्रमुख साहसिक खेल
उत्तराखण्ड का प्राकृतिक सौंदर्य सिर्फ पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि अपने रोमांचक साहसिक खेलों के लिए भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस लेख में हमने "उत्तराखण्ड के प्रमुख साहसिक खेल और प्रसिद्ध पर्वतारोही" विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी संकलित की है। यह टॉपिक आगामी UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ से अक्सर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- रोमांचक खेल और उनके प्रमुख स्थल: राज्य में रिवर राफ्टिंग (कौड़ियाला, शिवपुरी), स्कीइंग (औली), और ट्रैकिंग (जखोल-देवक्यारा बुग्याल) जैसे प्रमुख साहसिक खेलों से जुड़े परीक्षापयोगी स्थलों की विस्तृत जानकारी।
- पर्वतारोहण का ऐतिहासिक सफर: उत्तराखण्ड में पर्वतारोहण की शुरुआत (1905) और उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा एवरेस्ट फतह करने जैसे गौरवशाली और महत्वपूर्ण तथ्य।
- बछेन्द्री पाल की ऐतिहासिक उपलब्धि: भारत की पहली महिला एवरेस्ट विजेता बछेन्द्री पाल के 1984 के सफल आरोहण और उन्हें मिले सम्मानों से जुड़े महत्वपूर्ण फैक्ट्स।
- राज्य के अन्य प्रमुख पर्वतारोही: 'माउण्टेन गोट' के नाम से मशहूर चन्द्रप्रभा एतवाल और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाली अर्जुन पुरस्कार विजेता हर्षवंती बिष्ट के प्रेरक जीवन से जुड़ी जानकारियाँ।
रिवर राफ्टिंग
यह एक आउटडोर गतिविधि है, जिसमें रबर राफ्ट के माध्यम से नदी की तेज धारा में आगे निकलना होता है।
राज्य में रिवर राफ्टिंग के प्रमुख स्थान ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग गंगा तट पर स्थित कौड़ियाला एवं शिवपुरी हैं।
स्कीइंग
- राज्य में स्कीइंग तथा अन्य शीतकालीन खेलों के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध स्थान औली (चमोली) है।
- राज्य में स्कीइंग के लिए अन्य प्रसिद्ध स्थल बागेश्वर का पिण्डारी ग्लेशियर, उत्तरकाशी का दायरा व कुश कल्याण, टिहरी का पनवाली व पिथौरागढ़ का मिलम व रालम हैं।
क्लिफ जम्पिंग
इसका आयोजन नदियों तथा झीलों में किया जाता है।
क्लिफ जम्पिंग के लिए उपयुक्त नदियाँ गंगा, भागीरथी, अलकनन्दा आदि हैं।
ट्रैकिंग (पैदल यात्रा)
राज्य में प्रमुख ट्रैक दायरा बुग्याल, नामिक ग्लेशियर व जखोल-देवक्यारा आदि हैं।
उत्तरकाशी के जखोल-देवक्यारा बुग्याल को वर्ष 2019 में ट्रैक ऑफ द ईयर चुना गया था।
रॉक क्लाइंबिंग
रॉक क्लाइंबिंग का अर्थ दुर्गम पहाड़ियों पर तकनीक के माध्यम से चढ़ना है।
राज्य में इसके प्रमुख स्थल: सेनगढ़ और टेखला (उत्तरकाशी), थराली एवं तपोवन (चमोली), कौड़ियाल (टिहरी) आदि हैं।
माउण्टेनियरिंग (पर्वतारोहण)
- राज्य में आधुनिक पर्वतारोहण का प्रारम्भ वर्ष 1905 में टी. जी. लॉन्गस्टाफ के नन्दादेवी अभियान से माना जाता है।
- वर्ष 1936 में टिलमैन व ओडेल ने नन्दादेवी के शिखर पर सफल आरोहण किया था।
- उत्तराखण्ड पुलिस देश की पहली पुलिस है, जिसने एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था।
- वर्ष 1968 से नैनीताल में पर्वतारोहण क्लब कार्यरत है।
- टिहरी के बुरांशखण्डा का सम्बन्ध रॉक क्लाइम्बिंग साहसिक खेल से है।
प्रमुख पर्वतारोहण संस्थान
| संस्थान | विवरण |
|---|---|
| नेहरू पर्वतारोहण संस्थान | 14 नवम्बर, 1965 को उत्तरकाशी में इसकी स्थापना की गई। संस्थान में बेसिक एवं एडवान्स पर्वतारोहण, एडवेन्चर कोर्स, सर्च एण्ड रेस्क्यू आदि कोर्स संचालित किए जाते हैं। |
| हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान | भारत में पर्वतारोहण को लोकप्रिय बनाने के लिए वर्ष 1954 में हिमालयन माउण्टेनियरिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना दार्जिलिंग में की गई। इसी क्रम में वर्ष 1961 में नई दिल्ली में भारतीय पर्वतारोहण फाउण्डेशन की भी स्थापना की गई। |
| कुमाऊँ मण्डल विकास निगम व गढ़वाल मण्डल | इन संस्थाओं द्वारा भी पर्वतारोहण को प्रोत्साहित करने का कार्य किया जाता है। गढ़वाल मण्डल विकास निगम द्वारा औली में स्कीइंग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। |
| नैनसिंह सर्वेयर पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान | पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में पर्वतारोहण, स्पोर्ट्स, क्लाइबिंग तथा अन्य साहसिक क्रियाकलापों के प्रशिक्षण प्रदान किए जाने हेतु इस संस्थान की स्थापना की गई है। वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड को सर्वश्रेष्ठ साहसिक पर्यटन पुरस्कार मिला। |
राज्य के प्रमुख पर्वतारोही
बछेन्द्री पाल
- जन्म वर्ष 1954 (नाकुरी, उत्तरकाशी)
- इन्होंने एवरेस्ट पर्वत का सफल आरोहण 23 मई, 1984 को किया।
- इन्होंने वर्ष 1982 में एनआईएम के बेसिक कोर्स के अन्तर्गत गंगोत्री पर्वत की चढ़ाई को पूरा किया था।
- वर्ष 1984 में बछेन्द्री पाल को पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया।
- वर्ष 1990 में इनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। ये भारत की पहली एवं विश्व की पाँचवीं सफल महिला एवरेस्ट आरोहण विजेता हैं।
हर्षवंती बिष्ट
- वर्ष 1981 में इन्होंने नन्दादेवी पर्वत का सफल आरोहण किया।
- वर्ष 1981 में ये अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं।
- गंगोत्री में हर्षवंती बिष्ट ने भोजपत्र वृक्षों का रोपण किया था।
- इनके पर्यावरण क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए, इन्हें वर्ष 2010 में सीसीआई ग्रीन पुरस्कार से सम्मानित किया था।
चन्द्रप्रभा एतवाल
- मूल निवासी - पिथौरागढ़
- उपनाम - माउण्टेन गोट या पहाड़ी बकरी
- इन्हें अर्जुन पुरस्कार (1981), पद्मश्री (1990), नेशनल एडवेन्चर अवॉर्ड (1993) तथा तेनजिंग नॉरगे पुरस्कार (2010) से सम्मानित किया गया है।
- विश्व मानचित्र में दयारा बुग्याल को लाने का श्रेय चन्द्रप्रभा एतवाल को जाता है।
अन्य पर्वतारोही
| पर्वतारोही | विवरण |
|---|---|
| हरिश्चन्द्र सिंह रावत | ये राज्य के पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने वर्ष 1965 में एवरेस्ट का सफल आरोहण किया। इन्हें पद्मश्री व अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। |
| हुकुम सिंह रावत | वर्ष 1991 में इनके नेतृत्व में पर्वतारोही दल कंचनजंघा पर आरोहण में सफल रहा। इनके द्वारा कंचनजंघा नामक पुस्तक भी लिखी गई है। |
| कन्हैयालाल पोखरियाल (पौड़ी) | इन्होंने वर्ष 1992 को एवरेस्ट का सफल आरोहण किया। इन्हें वर्ष 2003 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ। |
| सविता मार्तोलिया (पिथौरागढ़) | ये वर्ष 1993 में एवरेस्ट का सफल आरोहण करने वाली कुमाऊँ की प्रथम महिला हैं। |
| सुमन कुटियाल (पिथौरागढ़) | इन्होंने वर्ष 1993 में एवरेस्ट का सफल आरोहण किया। इन्हें वर्ष 1994 में नेशनल एडवेन्चर अवॉर्ड प्रदान किया गया। |
| सविता कंसवाल (उत्तरकाशी) | इन्होंने 12 मई, 2022 को एवरेस्ट का सफल आरोहण किया। |
| प्रवीण राणा (उत्तरकाशी) | इन्होंने 21 मई, 2022 को एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। |
| शीतलराज (पिथौरागढ़) | इन्होंने सबसे कम आयु में कंचनजंघा का आरोहण वर्ष 2018 में एवं एवरेस्ट का सफल आरोहण 16 मई, 2019 को किया था। इन्हें तेनजिंग नॉरगे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 13 नवम्बर, 2021 को प्रदान किया गया। |
| देवयानी सेमवाल (उत्तरकाशी) | इन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी किलिमंजारो का सफल आरोहण किया था। |
| लवराज सिंह धर्मसक्तू (पिथौरागढ़) | इन्होंने लगातार 7 बार एवरेस्ट का सफल आरोहण किया। इन्हें तेनजिंग नॉरगे अवॉर्ड (2003) एवं पद्मश्री (2014) से सम्मानित किया गया। |
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