उत्तराखण्ड का प्राचीन इतिहास
उत्तराखण्ड का प्राचीन इतिहास और यहाँ के पुरातात्विक साक्ष्य राज्य के गौरवशाली अतीत को दर्शाते हैं। यह विषय UKPSC, UKSSSC, Uttarakhand Police, Patwari, Forest Guard जैसी उत्तराखण्ड की सभी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस लेख में हमने राज्य के आरंभिक पुरातत्व और ऐतिहासिक शैलचित्रों से जुड़े उन सटीक तथ्यों को संकलित किया है, जो अक्सर परीक्षाओं में सीधे तौर पर पूछे जाते हैं।
इस लेख में आप क्या-क्या पढ़ेंगे:
- उत्तराखण्ड में पुरातत्व के जनक 'हेनवुड' और 1856 ई. में चम्पावत (देवीधुरा) से हुई उनकी ऐतिहासिक महापाषाणकालीन खोज के बारे में।
- राज्य के पुरातात्विक विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रमुख पुरातत्ववेत्ताओं (जैसे- के.पी. नौटियाल, डॉ. यशोधर मठपाल, डॉ. शिवप्रसाद डबराल आदि) की संक्षिप्त जानकारी।
- उत्तराखण्ड के विभिन्न प्रमुख जनपदों और स्थलों (जैसे- अल्मोड़ा का हटवाल घोड़ा, उत्तरकाशी का ठडुंगा, नैनीताल और द्वाराहाट) से प्राप्त प्राचीनकालीन शैलचित्रों के महत्वपूर्ण साक्ष्य।
हेनवुड को 'उत्तराखण्ड में पुरातत्व का जनक' माना जाता है। इनके द्वारा 1856 ई. में देवीधुरा (चम्पावत) से महापाषाणकालीन पुरावशेष की खोज की गई थी।
उत्तराखण्ड में पुरातत्व का विकास करने में विभिन्न पुरातत्ववेत्ताओं के.पी. नौटियाल, मदन भट्ट, डॉ. यशवन्त सिंह कठौच, यशोधर मठपाल, मदनमोहन जोशी, डॉ. शिवप्रसाद डबराल आदि की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
उत्तराखण्ड में पुरातत्व का विकास करने में विभिन्न पुरातत्ववेत्ताओं के.पी. नौटियाल, मदन भट्ट, डॉ. यशवन्त सिंह कठौच, यशोधर मठपाल, मदनमोहन जोशी, डॉ. शिवप्रसाद डबराल आदि की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
प्राचीनकालीन शैलचित्र उत्तराखण्ड के निम्नलिखित प्रमुख स्थलों से प्राप्त हुए हैं
- द्वाराहाट में मुनियों के ढाई पर्वत से शैलचित्र के अवशेष
- अल्मोड़ा से हटवाल घोड़ा शैलचित्र
- उत्तरकाशी से ठडुंगा शैलचित्र
- नैनीताल से मंगोली शैलचित्र
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